पन्ना/छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर हजारों आदिवासियों की जमीन छीनने के सरकारी ‘ऑपरेशन’ ने अब दमनकारी रूप अख्तियार कर लिया है। हक की आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और उनके साथियों को जेल की सलाखों के पीछे डालकर मोहन यादव सरकार भले ही आंदोलन कुचलने का मुगालता पाले बैठी हो, लेकिन जेल के बाहर जन-आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा है।
*जेल से बांध तक*
आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पन्ना जेल पहुंचकर बंदी आंदोलनकारियों से मुलाकात की और प्रशासन की इस तानाशाही को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। पटवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आदिवासियों को उनकी जड़ों से उजाड़ने वाली यह सरकार याद रखे कि कांग्रेस जल, जंगल और जमीन की इस लड़ाई में ढाल बनकर खड़ी है।
*कल ढोढन बांध पर मचेगा रार*
कल (12 मई) जीतू पटवारी सीधे ढोढन बांध पहुंचेंगे, जहां हजारों आदिवासी परिवार विस्थापन के खिलाफ और अपने साथियों की रिहाई के लिए मोर्चा खोले हुए हैं। पन्ना जेल में बंद साथियों से मुलाकात के बाद पटवारी का यह दौरा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। आदिवासियों का साफ संदेश है क़ि जमीन नहीं देंगे, चाहे जेल भर दो। यह लड़ाई अब केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि अस्मिता और न्याय की बन चुकी है।
वोट की राजनीति के लिए आदिवासियों को गले लगाने वाली सरकार, विकास के नाम पर उन्हें बेघर करने और विरोध करने पर जेल भेजने का जो खेल खेल रही है, उसका जवाब अब ढोढन की धरती से दिया जाएगा।










