छतरपुर और पन्ना की सीमाओं पर स्थित धोड़न डैम आज महज एक निर्माण स्थल नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एक बार फिर दहकते रणक्षेत्र में तब्दील हो गया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना की नींव में अपनी विरासत दफन होते देख आज आदिवासियों का धैर्य टूटकर सामूहिक आत्मदाह(सांकेतिक) की भयावह चेतावनी में बदल गया है। यहाँ से सामने आ रही तस्वीरें किसी पत्थर दिल इंसान की रूह कंपाने के लिए काफी हैं, जहाँ धधकने को तैयार सांकेतिक चिताओं पर आदिवासी महिलाएं अपने मासूम दुधमुंहे बच्चों को सीने से लगाकर लेटी हुई हैं।
आंदोलन के तीसरे दिन आक्रोश का यह समंदर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की चौखट को लांघकर सीधे उस जमीन पर उतर आया है, जिसे सरकार अधिग्रहित करने की तैयारी में है। इन सांकेतिक चिताओं पर लेटे लोगों की आँखों में अब आंसू नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ धधकती ज्वाला है। उनका यह मौन सत्याग्रह चीख-चीख कर कह रहा है कि प्रशासन को इस बांध की दीवारें खड़ी करने से पहले उनकी लाशों से गुजरना होगा। विस्थापितों का यह सैलाब अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
ग्रामीणों की मांग अब केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रही, उनकी रगों में उबाल बनकर दौड़ रहा है अपने नेता अमित भटनागर की रिहाई का संकल्प और अपने अस्तित्व को बचाने की जिद। “अमित भटनागर को रिहा करो या हमें अग्नि के हवाले करो” के गगनभेदी नारों के बीच प्रशासनिक तंत्र की चुप्पी और आला अधिकारियों की अनुपस्थिति इस आक्रोश की आग में घी डालने का काम कर रही है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार की गर्जना आज सत्ता के गलियारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है—कि अगर पूर्वजों की हड्डियों और आदिवासियों की कब्र पर विकास की इमारत खड़ी की गई, तो इन चिताओं से उठने वाला धुआं वक्त की इबारत बदल देगा।
ग्राउंड जीरो पर हालात विस्फोटक बने हुए हैं। दूर-दराज के गांवों से पैदल चलकर आ रहे हजारों आदिवासियों के करो या मरो के जज्बे के सामने भारी पुलिस बल भी बेबस नजर आ रहा है। पन्ना का यह संघर्ष अब केवल एक बांध का विरोध नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और पहचान को बचाने की अंतिम लड़ाई बन चुका है। यदि समय रहते संवाद और न्याय का रास्ता नहीं निकाला गया, तो धोड़न डैम की यह जमीन इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय की गवाह बन सकती है।
विस्थापितों को हक दिलाने कल छतरपुर आएंगे जीतू पटवारी: ढोढन बांध प्रभावितों से करेंगे जनसंवाद
केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत ढोढन बांध से विस्थापित हो रहे आदिवासी परिवारों की लड़ाई अब प्रदेश स्तर पर गरमाने वाली है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी कल, 12 मई को छतरपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। वे बांध प्रभावित गांवों का दौरा कर विस्थापितों के जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को मजबूती देंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पटवारी 11 मई की रात्रि खजुराहो पहुंचेंगे। इसके बाद 12 मई की सुबह वे खजुराहो से प्रस्थान कर बमीठा और रनगुवा होते हुए सीधे ढोढन बांध स्थल पहुंचेंगे। यहाँ वे विस्थापित आदिवासी परिवारों से सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन के समक्ष उठाने का संकल्प लेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वे आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के हनन के खिलाफ मजबूती से आवाज बुलंद करेंगे।










