घुवारा/छतरपुर: सरकार की गौवंश संरक्षण योजना बड़ामलहरा विकासखंड की ग्राम पंचायत मढ़ीखेरा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। मढ़ीखेरा स्थित गौशाला आज बदहाली के उस दौर में है, जहाँ न गौवंश का ठिकाना है और न ही चारे-पानी की व्यवस्था। आलम यह है कि गौशाला का टीन शेड धराशायी हो चुका है और परिसर पूरी तरह वीरान है, लेकिन चर्चा है कि कागजी गायों के नाम पर शासन से लाखों का भुगतान डकार लिया गया है।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच, सचिव और कामना स्व सहायता समूह की मिलीभगत से यह बड़ा खेल चल रहा है। अनुबंध के बावजूद समूह ने रखरखाव में भारी लापरवाही बरती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गौशाला सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है, फिर भी अधिकारियों की नाक के नीचे यह वित्तीय अनियमितता जारी है। सवाल उठ रहा है कि जब धरातल पर गौवंश है ही नहीं, तो भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाएगी। यदि लापरवाही और भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो समूह का अनुबंध तत्काल निरस्त कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। स्थानीय नागरिकों ने अब उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि गौवंश के नाम पर होने वाली इस लूट पर लगाम लग सके।









