Home एक्सक्लूसिव केन-बेतवा विस्थापितों की हुंकार: दौड़न बांध पर सिस्टम के खिलाफ फूटा महिलाओं...

केन-बेतवा विस्थापितों की हुंकार: दौड़न बांध पर सिस्टम के खिलाफ फूटा महिलाओं का आक्रोश; प्रशासन की हठधर्मिता के खिलाफ आदिवासियों का शंखनाद

67
0

#छतरपुर। विकास और विनाश के बीच की लकीर जब धुंधली पड़ने लगती है, तब आक्रोश का जन्म होता है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बन रहे दौड़न बांध निर्माण स्थल पर आज यही दृश्य देखने को मिला। सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने प्रशासनिक ‘मनमानी’ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न केवल निर्माण कार्य रुकवाया, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया।

#फर्जी प्रक्रिया और लोकतंत्र का उपहास

Google search engine

​प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि जिस जमीन से उनकी आस्था और आजीविका जुड़ी है, उसका सौदा बंद कमरों में ‘फर्जी ग्राम सभाओं’ के जरिए किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बिना वास्तविक ग्राम सभा की सहमति और बिना वैधानिक प्रक्रिया के निर्माण कार्य शुरू करना सीधे तौर पर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। यह विडंबना ही है कि जिन्हें विस्थापित होना है, उनकी आवाज सुनने के बजाय प्रशासन उन्हें कानून का डर दिखाकर चुप कराने की कोशिश कर रहा है।

शांतिपूर्ण मांग पर लाठियों का प्रहार

​आदिवासी समुदाय का आक्रोश तब और भड़क गया जब उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक हक की बात करने पर उन्हें प्रशासनिक दमन और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने दो टूक कहा कि यह संघर्ष विकास के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस ‘अलोकतांत्रिक तरीके’ के विरुद्ध है जिसमें विस्थापितों को केवल एक आंकड़ा मान लिया गया है, इंसान नहीं।

​”कानून का पालन हो, मनमानी नहीं”: #अमित_भटनागर

​मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, “प्रशासन कानून सम्मत प्रक्रिया को ताक पर रखकर आदिवासी अधिकारों को रौंद रहा है। जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिलता और वैधानिक नियमों का पालन नहीं होता, यह संघर्ष विराम नहीं लेगा।”

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here