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शिव ही सत्य, शिव ही अनन्त: ‘विरासत कला उत्सव’ में जीवंत हुआ महादेव का स्वरूप, नृत्य-नाटिका ने दर्शकों को कराया अध्यात्म का साक्षात्कार

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छतरपुर | छतरपुर की सांस्कृतिक धरा पर ‘विरासत कला उत्सव’ के दूसरे दिन भक्ति, भाव और कला की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। स्थानीय ऑडिटोरियम में जब घुंघरुओं की झंकार और डमरू की गूँज एक साथ मिली, तो पूरा वातावरण शिवमय हो गया। उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन के इस साझा मंच ने बुधवार की शाम को एक रूहानी अनुभूति में बदल दिया।
शिव के ‘साकार’ और ‘निराकार’ स्वरूप का अद्भुत दर्शन
समारोह का मुख्य आकर्षण दिल्ली से पधारीं प्रख्यात निर्देशिका संगीता शर्मा (अन्वेषणा समिति) के निर्देशन में प्रस्तुत नृत्य-नाटिका ‘आदि अनन्त’ रही। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और सधे हुए पदचापों से महादेव के तीनों स्वरूपों और उनकी कथाओं को मंच पर इस तरह जीवंत किया, मानो कैलाश साक्षात ऑडिटोरियम में उतर आया हो। शिव के सृजन, संहार और उनकी सर्वव्यापकता को दर्शाती इस प्रस्तुति ने दर्शकों को आदि और अनन्त के रहस्यों से साक्षात्कार कराया।
सांस्कृतिक महाकुंभ में उमड़ीं प्रबुद्ध हस्तियां
शाम 7 बजे कार्यक्रम का पावन शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्याम गौतम (जिला संयोजक, म.प्र. आजीविका मिशन), रविंद्र प्रजापति (कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी), ओ.पी. अरजरिया (डीसीडीसी, महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय), प्रेम नारायण मिश्रा (वरिष्ठ गांधीवादी विचारक) सहित वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र अग्रवाल, रशीद खान और समाजसेवी संजय शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने कला की इस विरासत को सहेजने के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की।
स्थानीय संयोजन और प्रशासन की जुगलबंदी
जिला प्रशासन डीएटीसीसी के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव को शिवेन्द्र शुक्ला और शंखनाद नाट्य मंच के स्थानीय संयोजन ने नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। कार्यक्रम के अंत तक दर्शक दीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान रही, जो कलाकारों के प्रति शहर के प्रेम को प्रदर्शित कर रही थी।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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