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कबीर की वाणी और सुरों की सरिता: छतरपुर में ‘विरासत महोत्सव’ का शंखनाद, पद्मश्री टिपानिया के भजनों पर झूमा शहर, एसपी अगम जैन ने साझा कीं भावुक यादें…

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शिवम् सोनी
छतरपुर | शहर की सांस्कृतिक फिजाओं में मंगलवार की शाम एक नया रंग घुल गया। स्थानीय ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग के सहयोग से सात दिवसीय ‘विरासत महोत्सव’ का शानदार आगाज हुआ। जब दीप प्रज्वलन के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई, तो पूरा सभागार कला और परंपरा की रोशनी से जगमगा उठा।

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पद्मश्री टिपानिया ने बांधा समां, कबीर के दोहों से रूहानी हुई शाम
महोत्सव के पहले ही दिन विश्व प्रसिद्ध लोकगायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया ने अपनी जादुई आवाज से श्रोताओं को अध्यात्म की गहराई में उतार दिया। कबीर के दोहों और भजनों के माध्यम से उन्होंने जब सामाजिक समरसता और मानवता का संदेश दिया, तो ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से सराबोर हो गया। उनके गायन ने हर किसी को आत्मचिंतन और सादगी से जोड़ दिया।

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एसपी अगम जैन ने साझा कीं भावुक यादें
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने एक बेहद प्रेरक बात साझा की। उन्होंने बताया कि जब वे प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC) की तैयारी कर रहे थे, तब से वे प्रहलाद सिंह टिपानिया जी के कबीर भजन सुनते आ रहे हैं। एसपी ने कहा, “टिपानिया जी की आवाज में वो सम्मोहन है जो सीधे कबीर के विचारों से एकाकार करा देता है।”

संस्कृति ही समाज की आत्मा: कलेक्टर पार्थ जायसवाल
मुख्य अतिथि कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन हमारी विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया ने इसे स्थानीय कलाकारों के लिए एक बड़ा मंच बताते हुए शहर के लिए गौरव का क्षण बताया।

आने वाले दिनों में होंगे ये खास कार्यक्रम
विरासत महोत्सव की यह लहर अभी सात दिनों तक शहर को आनंदित करेगी।
बुधवार: दिल्ली की टीम द्वारा मनमोहक ‘नृत्य नाटिका’ की प्रस्तुति।
गुरुवार: भोपाल के वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता संजय मेहता के निर्देशन में कालजयी नाटक ‘संत तुकाराम’ का मंचन।

इस सांस्कृतिक संध्या में अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, प्रबुद्ध कलाकार और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी नगरवासी उपस्थित रहे।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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