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बकस्वाहा नगर परिषद:’लापरवाही’ का पर्याय बनीं CMO, क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा प्रशासन?

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नीता रैकबार / अतुल्य भास्कर
बकस्वाहा (छतरपुर)। विकास के दावों के बीच बकस्वाहा नगर परिषद इन दिनों भ्रष्टाचार और घोर प्रशासनिक संवेदनहीनता का केंद्र बन चुकी है। आलम यह है कि पिछले दो वर्षों से नगर की सड़कों पर खुले पड़े नाली के चेंबर यमदूत बनकर राहगीरों का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) नेहा शर्मा और जनप्रतिनिधियों की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
कुर्सी का अहंकार या काम से जी चुराना?
स्थानीय नागरिकों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। आरोप है कि CMO नेहा शर्मा का रवैया तानाशाही पूर्ण है। वे न केवल आम जनता की समस्याओं को अनसुना करती हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और मातहत कर्मचारियों के साथ भी उनका व्यवहार बेहद असहयोगात्मक रहता है। नगरवासियों का सीधा सवाल है— “अगर जनता की सुरक्षा ही प्राथमिकता नहीं है, तो फिर परिषद और अधिकारियों की फौज किस काम की?”
मंदिर के पास ‘मौत’ के गड्ढे: आस्था का भी सम्मान नहीं
सबसे शर्मनाक स्थिति वार्ड नंबर 4 की है, जो नगर परिषद उपाध्यक्ष का गृह वार्ड है। यहाँ माता मंदिर और सार्वजनिक बाबा कुआं जैसे व्यस्त और धार्मिक स्थलों के पास ही चेंबर खुले पड़े हैं।
सवाल: क्या प्रशासन किसी मासूम बच्चे या बुजुर्ग के इन गड्ढों में गिरने और जान गंवाने का इंतज़ार कर रहा है?  दो साल से शिकायतें फाइलों में दफन हैं, जबकि धरातल पर मौत के कुएं खुले हैं।
नगर परिषद की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ अब सोशल मीडिया पर ‘जंग’ छिड़ गई है। नागरिक खुले चेंबरों की तस्वीरें साझा कर सीधे शासन-प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारी और नेता सिर्फ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालकर अपनी खाल बचा रहे हैं।
मुख्य मांगें:
तत्काल प्रभाव से सभी खुले चेंबरों को बंद किया जाए
कार्य में लापरवाही बरतने वाली CMO नेहा शर्मा की जवाबदेही तय हो और उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
वार्ड नंबर 4 सहित पूरे नगर में लंबित विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने भी दी चेतावनी

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नोट: इस समाचार के साथ फोटो क्रमांक 14 लगाएं।

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संजय दुबे ने नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अल्टीमेटम दिया है कि जनहित की इन समस्याओं का निराकरण शीघ्र किया जाए, अन्यथा वे जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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