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महिला ने मात्र 30 हजार का लिया लोन, लगाया दिमाग, चप्पल बनाने का कारोबार किया शुरू, बदल गई जिंदगी

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Success Story: दौसा के पिचूपाड़ा गांव की महिलाएं राजीविका से जुड़कर अपनी जिंदगी बदल रही हैं और आत्मनिर्भर होकर वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं. गांव की मन्ना देवी ने लोन लेकर चप्पल का कारखाना लगाकर न केवल अ…और पढ़ें

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चप्पल

चप्पल की बिक्री करती हुई महिला

हाइलाइट्स

  • मन्ना देवी ने ₹30,000 लोन लेकर चप्पल का कारखाना शुरू किया
  • चप्पल निर्माण से अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला
  • राजीविका से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं

दौसा:- जिले के पिचूपाड़ा गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं. वे दूसरी महिलाओं के लिए आज प्रेरणा हैं. राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) से जुड़कर, इन्होंने स्वयं सहायता समूह का गठन किया, और बैंक से ₹30,000 का लोन लेकर चप्पल निर्माण का व्यवसाय शुरू किया. इस पहल से न केवल वे खुद सशक्त बनीं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए. मन्ना देवी आज चप्पल का कारखाना चलाकर खुद आत्मनिर्भर हो रही हैं, और बाकी महिलाओं को भी उन्होंने रोजगार दिया है, चलिए जानते हैं उनसे कैसे बदली उन्होंने अपनी जिंदगी

लोन लेकर चप्पल का लगाया कारखाना
समूह की सदस्य मन्ना देवी ने बताया, कि लोन मिलने के बाद उन्होंने चप्पल बनाने का कारखाना शुरू किया, जो अब तेजी से प्रगति कर रहा है. बिक्री के लिए ये महिलाएं विभिन्न मेलों और बाजारों में अपनी दुकानें लगाती हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है. इस आय से उनके परिवारों का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा में सहायता मिल रही है. मन्ना देवी ने आगे बताया, कि पहले बच्चों की पढ़ाई के लिए भी परेशान हुआ करती थी, लेकिन राजीविका से जुड़ने के बाद से लगातार तरक्की हो रही है. अब चप्पल का व्यवसाय शुरू किया है, तो लाभ भी अच्छा मिल रहा है. अन्य महिलाओं को भी यह व्यवसाय शुरू करना चाहिए.

चप्पल के साथ बना रही हैं बाकी चीजें
आपको बता दें, कि चप्पल निर्माण के साथ-साथ, इन महिलाओं ने बाकी उत्पादों का निर्माण भी शुरू किया है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है. इससे उनकी आय में और वृद्धि हुई है, जिससे वे अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं. पहले जो महिलाएं आर्थिक तंगी के कारण अपने पतियों पर निर्भर थीं, वे अब आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं.

वहीं मन्ना देवी ने बेरोजगार महिलाओं को भी राजीविका से जुड़कर इस प्रकार के कार्य शुरू करने की सलाह दी है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकें. वहीं यह उदाहरण दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकती हैं.

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महिला ने मात्र 30 हजार का लिया लोन, फिर बिजनेस से बदली जिंदगी, अब कमा रही इतना

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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