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सागर जिले के खुरई थाना क्षेत्र के टीहर गांव में एक ही परिवार के 4 लोगों ने सुसाइड कर लिया। गांव के 42 साल के मनोहर लोधी ने अपनी 18 साल की बेटी शिवानी, 16 साल के बेटे अनिकेत और 70 साल की मां फूलरानी लोधी के साथ 25 जुलाई की रात सल्फॉस खा कर आत्महत्या कर ली। घटना के दो दिन बाद भी आत्महत्या की कोई पुख्ता वजह सामने नहीं आ पाई। बस एक सुसाइड नोट सामने आया जो मनोहर के बेटे के हाथ से लिखा बताया जा रहा है जिसे मनोहर ने लिखवाया था। सुसाइड नोट में मनोहर ने अपनी प्रॉपर्टी का एक टुकड़ा भी पत्नी को न देने की बात कही। साथ ही अपनी संपत्ति का बंटवारा भाई-बहनों के बीच किया है। सुसाइड नोट में ये जानकारी भी लगी कि मनोहर ने अपनी तेरहवीं तक का इंतजाम करके ये कदम उठाया है। उसने तेरहवीं के लिए तिजोरी में 1 लाख 40 हजार रुपए रखे होने की बात कही। साथ ही अपना फोनपे पासवर्ड भी लिखा। दैनिक भास्कर की टीम रविवार को सागर के टीहर गांव पहुंची। सबसे पहले हमने आत्महत्या की असली वजह जानने की कोशिश की। इसके लिए मनोहर के बड़े भाइयों से बात की। सुसाइड नोट में मनोहर के बेटे ने जिन बुआ को अपनी भैंस और 68 हजार रुपए देने की बात कही उनसे भी बात की। मनोहर की पत्नी घटना की जानकारी लगने के बाद गांव आई हैं। हमने मनोहर की पत्नी से भी बात की। चार लोगों की सुसाइड की असली वजह क्या है, पत्नी, परिवार और पुलिस का क्या कहना है, आइए सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं… सुसाइड की घटना के बाद से पूरे टीहर गांव में गम का माहौल है। गांव की परचून की दुकानों में बैठे कुछ लोगों से सामूहिक सुसाइड वाला घर पूछने पर लोगों ने बताया कि मनोहर जी का 2 मंजिला घर तो गांव से थोड़ा निकलकर उनके खेतों के बीच बना है, लेकिन घटना में उनका पूरा परिवार ही खत्म हो गया है इसलिए वहां कोई नहीं है। उनके भाइयों का घर गांव के अंदर कुछ ही दूरी पर है, वहां चले जाइए सभी लोग मिल जाएंगे। घर पहुंचने पर देखा कुछ रिश्तेदार घर के बाहर बैठे हुए हैं। हम घर के अंदर गए। अंदर मातम पसरा दिखा। मनोहर की 4 बड़ी बहनें और तीन बड़े भाई और कुछ लोग मौजूद हैं। 4 भाइयों में मनोहर घर का सबसे छोटा भाई था। सबसे बड़े भाई गोविंद सिंह लकवाग्रस्त हैं। दूसरे बड़े भाई जगदीश की दिमागी हालत पूरी तरह ठीक नहीं है। तीसरे भाई नंदराम ने हमसे बात की। मनोहर ने रास्ते में और बेटी ने अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ा नंदराम ने कहा कि पहले हमें कुछ जानकारी नहीं थी। मेरे बड़े भाई जगदीश भी मनोहर के घर उनके साथ ही रहते थे। घटना वाली रात शुक्रवार को भी वो वहीं थे। शनिवार सुबह उन्होंने ही हमें घर आकर जानकारी दी कि मेरी माता जी, भाई मनोहर और उनके बेटे, बेटी ने सल्फॉस खा कर आत्महत्या कर ली है। आनन- फानन हम खेत में बने मनोहर के घर की तरफ भागे। देखा हमारी मां और भतीजा गुजर चुके थे। मनोहर और बेटी शिवानी की सांस चल रही थी। हम उन्हें लेकर हॉस्पिटल की तरफ भागे। मनोहर ने रास्ते में ही सांसें तोड़ दी और भतीजी शिवानी की अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई। मनोहर सारी संपत्ति भाई-बहनों में बांट गया नंदराम ने आगे कहा कि मनोहर बहुत सीधा था। खेती करता था। उसने मेहनत करके हाल ही अपना दो मंजिला मकान बनवाया था। अभी तीन महीने पहले ही उसमें गृह प्रवेश किया था। वो पढ़ा-लिखा नहीं था, इसीलिए उसने आत्महत्या से पहले अपने बेटे अनिकेत से लेटर लिखवाया था। लेटर में मेरे भतीजे ने लिखा है कि उनकी संपत्ति में मां का कोई हिस्सा नहीं है। फोन पे का पासवर्ड भी लिख गया है। भैंसों के दो बच्चे अपने सबसे बड़े भाई गोविंद सिंह को देने को कहा है। मां के गहने भी अपनी 4 बहनों को बांटने की बात लिखी है। 4 एकड़ जमीन भाइयों को देने की बात लिखी है। लेटर में उन पर कोई कर्ज न होने की बात लिखी है। अनिकेत ने लिखा है कि मामा से 2 लाख रुपए उधार लिए थे, उसके बदले 2 लाख 40 हजार रुपए चुका दिए हैं। साथ ही अपनी तेरहवीं में खर्च करने के किए 1 लाख 20 हजार रुपए तिजोरी में रखे होने की बात कही है। मनोहर की पत्नी और सुरेंद्र हैं मौत के जिम्मेदार
नंदराम ने आरोप लगाया कि घटना के पीछे मनोहर की पत्नी और सुरेंद्र दोनों जिम्मेदार हैं। दोनों का संपर्क था। इसीलिए मेरे भाई को मजबूर होकर ऐसा कदम उठाना पड़ा। हमें जानकारी लगी है कि मनोहर की पत्नी और सुरेंद्र का संबंध 2-3 साल से चल रहा है। मनोहर की बेटी और बेटे ने दोनों को साथ में देख लिया था। पहले मनोहर भी उनकी ये हरकत देख चुका है। बदनामी के डर से उसे ये कदम उठाना पड़ा है। घटना के बाद मनोहर की पत्नी मायके से यहां आई है, तेरहवीं का इंतजार है। हम उसे यहां नहीं रखेंगे। जो हमारे भाई के साथ नहीं रह पाई वो हम परिवार वालों के साथ क्या रहेगी। अब उसका भविष्य उसके मां-बाप जानें। हमारे तो भाई, भतीजा,भतीजी और मां सब चले गए। 4 बहने बोलीं- वो हमसे बहुत प्रेम करता था, मां उससे बहुत प्रेम करती थी हमने मनोहर की 4 बहनों लक्ष्मी, शीला, सोऊकरी और अंतम से बात की। सभी सहमी हुई हैं। आंखों से आंसू लगातार बह रहे हैं। सभी ने कहा कि भाई ने ऐसा कदम कैसे उठा लिया, हमें भरोसा ही नहीं हो रहा। उसने हमसे इस बारे में कोई भी बातचीत नहीं की। सभी बहनों को घटना की असल वजह गांव पहुंचने के बाद पता चली। इसके बावजूद वो इस बारे में कुछ भी बात करने से झिझक रही हैं। बार-बार उन्होंने यही कहा कि हमें कोई जानकारी नहीं है। मां हमेशा मनोहर के साथ ही रहीं। वो उसे बहुत प्रेम करती थीं। शायद इसलिए उन्होंने मनोहर के साथ जाने का फैसला लिया। हमारा भाई हम सबसे बहुत प्रेम करता था। पूरा गांव उसके सीधापन के बारे में बता सकता है। मनोहर की पत्नी बोली- पति ने मायके जाने को कहा मनोहर की पत्नी भी सदमे में दिखाई दी। वो हमसे बात करने घर के एक कमरे से बाहर आईं। उन्होंने कहा, मैं दो दिन के लिए मायके चली गई थी। इसी बीच ये घटना हुई। हम पति-पत्नी के बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ था। इस घटना का जिम्मेदार सुरेंद्र है। वो मेरे साथ जबरदस्ती करता था। इसके बाद धमकी देने लगा था। कहता था कि अगर किसी को कुछ बताया तो पूरा घर मिटा दूंगा। मनोहर की पत्नी ने कहा- मेरे पति ने कहा था कि 2 दिन के लिए मायके चली जाओ। मैं मायके चली गई थी। फिर ये घटना कैसे हुई, मेरे बच्चों और पति और सासू मां ने आत्महत्या क्यों और कैसे की इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। पति का दोस्त है सुरेंद्र, बचपन से साथ रहा मनोहर की पत्नी ने बताया कि सुरेंद्र परिवार का ही था। वो हमेशा मेरे पति के साथ ही रहता था। इनकी बचपन से दोस्ती थी। सुसाइड नोट में क्या लिखा है, क्यों लिखा है, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। मुझे न्याय चाहिए। जैसे हमारा सब मिट गया वैसे ही उसका सब मिटना चाहिए। बच्चे आपसे नाराज थे, आपको गलत समझते थे? इसके जवाब में वो बोलीं- नहीं। बस उन्होंने हमें देख लिया था। दोनों बच्चों ने सुरेंद्र को घर में घुसते देख लिया था। इसी के बाद मेरे पति ने मुझे 2 दिन के लिए मायके जाने के लिए कहा था। घर से दो दिन के लिए निकाल दिया था। मेरे पति मुझसे बहुत प्रेम करते थे। बच्चे थोड़े नाराज थे। आगे को जिंदगी में क्या करेंगी? उन्होंने प्रॉपर्टी में भी आपको हक न देने की बात लिखी है। इस सवाल के जवाब में वो मौन रहीं। सुरेंद्र ने आपके साथ जबरदस्ती कब की? इसके जवाब में कहा, 2 साल की बात है। लगातार कर रहे थे या एक बार हुआ? बोलीं- 2-4 बार हुआ। मुझे इंसाफ चाहिए। जो मेरे साथ हुआ वो सुरेंद्र के साथ भी होना चाहिए। बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी, कॉलेज में एडमिशन भी हो गया था गांव और परिवार के ही एक व्यक्ति रामपाल ने कहा, मनोहर के बेटे ने इस साल 10वीं पास की थी। बेटी ने 12वीं। बेटी पढ़ने में बहुत तेज थी। वो डॉक्टर बनना चाहती थी। उसके लिए तैयारी भी कर रही थी। उसके पिता ने हाल ही 2 लाख की फीस जमा कर उसका किसी बढ़िया कॉलेज में एडमिशन भी कर दिया था। इसी बीच हमें मनोहर के एक भतीजे ने 4 कॉल रिकॉर्डिंग सुनाई जो घटना से एक दो दिन पहले की बताई जा रही हैं। ये रिकॉर्डिंग दैनिक भास्कर के पास मौजूद हैं। इनमें से दो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण हैं। पहली रिकॉर्डिंग बेटी शिवानी और मनोहर की उसके मामा-मामी के साथ बात शिवानी: तुम कह रही थीं कि हमने गलत किया है। क्या गलत किया है? मामी: तुमने अपनी मां को घर से बाहर निकालकर गलत किया है। मां के साथ गलत किया है। हमारे साथ कुछ गलत नहीं किया। हमें कौन से लठ्ठ मारे हैं। शिवानी: हमारी मां हमारे लिए मर गई है, बस। मामी: मां मर गई है तो ले जाकर उसका अंतिम संस्कार करो। हमारे पास मरी मां मत छोड़ो। मायके में अर्थी नहीं जाती। ससुराल में ही सब होता है। मामी: सब कुछ 5 साल से चल रहा है। पहले सब बतातीं। एक दिन पहले बुलाकर हमसे रंगे हाथ पकड़वातीं तो कोई बात होती। तुमने आंखों से देखा तो हमें एक दिन पहले बुलाती कि आज आने वाले हैं। हम भी आकर देखते। उन्हें पकड़ते। समझते तुम लोग आंखों से देखती भी रहीं और 5 साल तक बात छिपाए रही। शिवानी: वो पापा के समझाने से नहीं समझें तो हम तो दूर की बात हैं। मनोहर: हमने 50 बार कॉल किया। तुम लोगों ने उठाया नहीं। उसी दिन आ जाती भाभी तो बात दब जाती। पूरे गांव को सब पता चल गया है। मामा: पहले मुंह क्यों नहीं खुला। 5 साल से बात को दबाए क्यों थे? मनोहर: पहले किसी को पता नहीं था तो बदनामी के डर से किसी को नहीं बताया। अब सबको सबकुछ पता चल गया है। बदनामी होने लगी है। हम रंगे हाथों पकड़ने का इंतजार कर रहे थे। मामा: गलती तुम्हारी भी है। तुम्हारे घर में औरत रह रही है, तुम्हें ये पता नहीं है कि वो क्या कर रही है। हम रह रहे क्या तुम्हारे घर? अब हमारे ऊपर थोपने लगे। उसे पकड़ना था तो पकड़ कर वहीं मरोड़ कर फेंक देते। हमने शादी करके तुम्हे दे दी तुम जानों तुम्हारा काम जाने। मनोहर: हम तुम्हारी बहन को रंगे हाथ पकड़ने के बाद कुछ कर देते तो तुम हमारा जीना हराम कर देते। (मनोहर के भतीजे ने बताया कि ये रिकॉर्डिंग घटना से 2 दिन पहले की है। जब चाचा ने चाची को उनके घर भेज दिया था। ये रिकॉर्डिंग उनके ही फोन से मिली है।) दूसरी रिकॉर्डिंग घटना वाले दिन मनोहर और सुरेंद्र के बीच की बात सुरेंद्र: कहां हो, घर पहुंच गए? मनोहर: नहीं, घर में क्या काम है? सुरेंद्र: यही कहने के लिए फोन लगाया है कि तुम मुझ पर शक कर रहे थे तो मैने तो सब क्लियर कर ही दिया। जो होना था वो हो भी गया। अब ठीक है? संतुष्टि है? मैंने यही कहने के लिए कॉल किया है कि जब मैं गलत नहीं करता था, तब तुमने गलत समझा। अब गलत कर दिया तो अब तो संतुष्ट हो। मनोहर: तुम तब भी गलत थे, अभी भी हो। सुरेंद्र: मैं तब नहीं था गलत। मनोहर: गलत नहीं थे, तब मैने शक नहीं किया। जब गलत किया तब शक किया। नहीं तो मैं शक क्यों करता। जब तुमने फोन दिया, मैंने तबसे शक किया। तब से मैंने कहा। तुम्हें सुनाया। मेरी पत्नी ने मेरे साथ जो किया वो किया, लेकिन मैंने उसे एक शब्द नहीं कहा। मैंने तुम्हें इतनी आत्मा से अपना दोस्त माना, लेकिन तुमने मेरे साथ ये किया। तुमने मेरे बच्चों का जीवन बर्बाद , मेरे और मेरी मां के साथ विश्वासघात किया है। अब तो तुम उसे अपने साथ रख भी लो तो मुझे क्या करना। सुरेंद्र: तुमने मुझ पर इतना शक किया, इसलिए मुझे ये करना पड़ा। तुमने शक किया तो मैंने अंजाम दे दिया। मैं उसे अपने साथ क्यों रखूंगा। मुझे जो करना था वो तो मैंने कर ही दिया। इसके बाद हम खेतों के बीचों बीच बने मनोहर के उस नए घर पर पहुंचे जिस घर की पहली मंजिल पर उसने अपने परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या की। घर के नीचे दोनों तरफ, भैंस और उनके बच्चे बंधे हुए थे। घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका हुआ था। मनोहर के साथ उनके बड़े भाई जगदीश भी रहते थे। जगदीश ने बताया, सुरेंद्र यहां आता-जाता रहता था। मैं नीचे सोया हुआ था, बाकी सब ऊपर थे। जब सुबह मैं वहां गया तो वहां सब अस्त-व्यस्त हालत में पड़े हुए थे। अभी केस दर्ज नहीं किया, जांच जारी है खुरई थाना इंचार्ज योगेन्द्र सिंह दांगी ने कहा, मृतकों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। घटना स्थल पर जहरीले पदार्थ की 3 डिब्बियां जब्त की गई हैं। मृतकों की उल्टी भी जब्त कर जांच के लिए भेजी है। सभी साक्ष्यों को इकट्ठा किया गया है। अभी जांच जारी है। प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला लग रहा है। आत्महत्या किन कारणों से की गई है इसके लिए हम परिजनों से पूछताछ कर रहे हैं। उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अभी एफआईआर नहीं की गई है। मर्ग कायम किया गया है। परिजनों के बयान और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए आत्महत्या के कारणों का पता लगा रहे हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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