छतरपुर। छतरपुर विधानसभा सीट के कांग्रेस पार्टी के दावेदार डीलमणि सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर बसपा का दामन थाम लिया है और उनकी टिकट भी पक्की हो गई है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए अपना दर्द बताया कि मेरे साथ विश्वासघात किया गया है। पिछले चुनाव में यह तय हुआ था कि इस बार हमें विधायक बनाओ अगली बार हम तुम्हें चुनाव के लिए टिकट दिलवाएंगे और जितवाएंगे परंतु याराना में धोखा हुआ है। कमलनाथ ने साफ तौर पर कह दिया है कि सिटिंग एमएलए का टिकट कटना संभव नहीं है। बब्बू राजा अब कहते हैं कि अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का और यार ने ही लूट लिया दिल यार का … यह कहावत आलोक चतुर्वेदी और डीलमणि सिंह के बीच चल रही चर्चा का विषय बनी हुई है। बब्बूराजा भले ही जीतें या हारें वह कांग्रेस पार्टी के लिए सिरदर्द तो बने ही रहेंगे। बसपा से जो भी प्रत्याशी खड़ा होता है उससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को होता है हालांकि केन्द्र सरकार में जो गठबंधन हुआ है उसको देखकर अब विभिन्न पार्टियों के मतदाता भी जागरुक हो गए हैं और अपना अमूल्य वोट व्यर्थ में गवां नहीं रहे हैं। छतरपुर के इतिहास में बहुजन समाज पार्टी से आज तक कोई भी विधायक चुनकर नहीं आया है। मायावती की एक विशाल आमसभा बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम में हुई थी तब लगता था कि छतरपुर में बसपा की एक सीट तो जरूर आएगी परंतु कोई भी प्रत्याशी जीतकर नहीं आया। कुल मिलाकर मप्र में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी की ही सरकार बनती है। इक्का दुक्का जगह सपा से जरूर विधायक चुनकर आए परंतु वह भी भारतीय जनता पार्टी में सरकार बनने के बाद दल बदलकर शामिल हो गए हैं। अब देखना है आने वाले समय में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार क्या गुल खिलाते हैं।








