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पारस मिल्क: 60 लीटर से 36 लाख लीटर तक का सफर, जानें पूरी कहानी.

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वेद राम नागर द्वारा 60 लीटर दूध बेचकर शुरू की गई पारस मिल्क आज भारत की प्रमुख डेयरी कंपनियों में से एक है, जो हर दिन 36 लाख लीटर दूध बेचती है और अमूल जैसी कंपनियों को टक्कर देती है. कंपनी का नेटवर्क 5,400 गांवो…और पढ़ें

कैसा छोटा सा दूधिया बना 'मिल्क किंग', 60 लीटर से 36 लाख लीटर तक का सफर

वेद राम नगर ने 27 साल की उम्र में अपने बिजनेस की नींव रखी थी.

हाइलाइट्स

  • पारस मिल्क हर दिन 36 लाख लीटर दूध बेचता है.
  • कंपनी का नेटवर्क 5,400 गांवों से जुड़ा है.
  • पारस मिल्क अमूल और मदर डेयरी को टक्कर दे रहा है.

नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली-एनसीआर या आसपास के इलाकों में रहते हैं, तो ‘पारस मिल्क’ का नाम सुना ही होगा. यह ब्रांड हर दिन लाखों घरों तक दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स पहुंचाता है. आज पारस मिल्क भारत की सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों में से एक बन चुका है, जो मदर डेयरी और अमूल जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर दे रहा है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बिजनेस की शुरुआत सिर्फ 60 लीटर दूध बेचने से हुई थी. इस कंपनी की नींव वेद राम नागर (Ved Ram Nagar) ने रखी थी, जिन्होंने मेहनत और दूरदर्शिता से इसे एक बड़े ब्रांड में तब्दील कर दिया.

वेद राम नागर का जन्म 1933 में हुआ था. उन्होंने 27 साल की उम्र में एक छोटे दूध विक्रेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. शुरुआती दिनों में वह रोजाना केवल 50-60 लीटर दूध ही बेच पाते थे. उस समय यह सिर्फ एक छोटा व्यवसाय था, जिसमें बहुत अधिक ग्रोथ की उम्मीद नहीं थी. लेकिन वेद राम नागर ने इस इंडस्ट्री की गहराई से समझ विकसित की और महसूस किया कि अगर बड़े स्तर पर दूध का सही तरीके से प्रसंस्करण (processing) और वितरण (distribution) किया जाए, तो एक बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है.

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उनकी दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत रंग लाई, और 1980 में उन्होंने अपनी पहली फर्म स्थापित की. 1984 में दूध और डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए एक यूनिट की शुरुआत की. इसके बाद 1986 में उन्होंने ‘वी.आर.एस. फूड्स’ नाम की कंपनी बनाई, जो आगे चलकर एक बड़ी डेयरी कंपनी में तब्दील हो गई.

बड़ा कारोबार बनाने की दिशा में पहला कदम
1987 में वेद राम नागर ने गाजियाबाद के साहिबाबाद में अपना पहला बड़ा मिल्क प्लांट स्थापित किया. इससे दूध के बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण और वितरण की क्षमता बढ़ी. इसके बाद 1992 में उन्होंने गुलावठी में एक और बड़ा प्लांट लगाया. इस विस्तार से कारोबार में तेजी आई और कंपनी की पहचान एक विश्वसनीय डेयरी ब्रांड के रूप में बनने लगी.

2004 में कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर से बाहर कदम बढ़ाया और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक और मिल्क प्लांट स्थापित किया. इससे व्यवसाय को देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार करने का मौका मिला.

संस्थापक का निधन और कंपनी का नाम बदलना
2005 में वेद राम नागर का निधन हो गया. उनके जाने के बाद उनके बेटों ने इस बिजनेस को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली. 2008 में कंपनी का नाम बदलकर ‘वेदराम एंड संस प्राइवेट लिमिटेड’ कर दिया गया. इस बदलाव के बाद कंपनी ने पारस ब्रांड के तहत तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की और दूध से जुड़े अन्य प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए.

अब सिर्फ डेयरी तक सीमित नहीं रहा कारोबार
पारस मिल्क का कारोबार अब सिर्फ डेयरी तक सीमित नहीं रहा. वेद राम नागर के बेटों ने कंपनी को हेल्थकेयर, रियल एस्टेट, शिक्षा और फार्मास्युटिकल्स जैसे कई अन्य सेक्टर्स में भी विस्तार देना शुरू किया. इससे कंपनी की कमाई के नए स्रोत बने और इसे एक बड़े बिजनेस ग्रुप के रूप में स्थापित किया गया.

राजनीति और समाजसेवा में भी सक्रिय परिवार
वेद राम नागर के पांच बेटे हैं, जिनमें से एक, सुरेंद्र सिंह नागर, राज्यसभा सांसद हैं. बाकी बेटे कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहे हैं. बिजनेस के साथ-साथ परिवार समाजसेवा में भी सक्रिय है. चौधरी वेद राम चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से वे कई सामाजिक कार्यों में योगदान दे रहे हैं, खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में.

5,400 गांवों से जुड़ा है नेटवर्क, लाखों किसानों को फायदा
आज पारस मिल्क कंपनी का नेटवर्क भारत के कई राज्यों तक फैल चुका है. खासतौर पर हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में इसका व्यापक प्रभाव है. कंपनी इन राज्यों के 5,400 गांवों से सीधे जुड़ी हुई है. यहां हजारों किसान डेयरी उत्पादन और पशुपालन से जुड़े हुए हैं. कंपनी न सिर्फ दूध खरीदती है, बल्कि किसानों को पशुपालन और खेती से संबंधित आर्थिक मदद भी देती है.

आज कैसा है पारस मिल्क का कारोबार?
वर्तमान में पारस मिल्क हर दिन करीब 36 लाख लीटर दूध बेचता है. दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रमुख शहरों में इसकी मजबूत उपस्थिति है. कंपनी ने कई डेयरी उत्पाद जैसे घी, मक्खन, पनीर, दही और फ्लेवर्ड मिल्क भी बाजार में उतारे हैं, जो ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं.

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कैसा छोटा सा दूधिया बना ‘मिल्क किंग’, 60 लीटर से 36 लाख लीटर तक का सफर

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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