छतरपुर। जल संरक्षण के प्रति संजीदा नजर आ रहे कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों की क्लास लगा दी है। सोमवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक उस वक्त हड़कंप में बदल गई जब कलेक्टर ने खराब परफॉर्मेंस और नियमों की अनदेखी करने वाले सहायक यंत्रियों (AE) और उपयंत्रियों (Sub Engineer) पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने दोटूक लहजे में चेतावनी दी कि जो काम नहीं करेगा, उसकी संविदा सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
कलेक्टर ने नौगांव जनपद के सहायक यंत्री की 7 दिन की वेतन काटने और उर्दमऊ, बैदार जैसे गांवों में खराब प्रगति पर उपयंत्री का इंक्रीमेंट रोकने का फरमान सुनाया। सबसे कड़ी कार्रवाई लवकुशनगर में देखने को मिली, जहाँ बलकौरा क्षेत्र में घोर लापरवाही बरतने पर उपयंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जनपद मुख्यालय अटैच कर दिया गया। इसके अलावा बड़ामलहरा और लवकुशनगर के उन उपयंत्रियों पर भी जांच बिठाई गई है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपात्र व्यक्तियों को खेत तालाब का लाभ पहुंचाया।
फील्ड पर दिखाएं प्रगति वरना होगी वसूली, पंचायतों पर गिरेगी धारा 92 की बिजली
कलेक्टर ने जल गंगा संवर्धन के कार्यों में लेबर की संख्या बढ़ाने और एक सप्ताह के भीतर खेत तालाबों के काम में दृश्य सुधार लाने की डेडलाइन तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन पंचायतों ने प्रशासकीय स्वीकृति के बावजूद काम शुरू नहीं किया है, उन पर धारा 92 के तहत वसूली की कार्रवाई की जाए। राजनगर जनपद के लापरवाह सचिवों पर भी वसूली निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि छतरपुर के बनगायं सहित अन्य गांवों में खराब रेटिंग मिलने पर उपयंत्री की वेतन रोकने के आदेश हुए हैं।
गौरीहार और बक्सवाहा जनपद के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कलेक्टर ने कहा कि जब तक जल संवर्धन के कार्य पूर्ण नहीं होते, तब तक अन्य कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी जाएगी। मस्टर रोल जारी करने और मटेरियल बिलों की फीडिंग में देरी पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब केवल परफॉर्मेंस ही इंजीनियरों की नौकरी का आधार होगा। इस सख्त तेवर ने पूरे जिले के तकनीकी अमले में खलबली मचा दी है।









