छतरपुर। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के पसीने की कमाई से खिलवाड़ और प्रशासनिक सुस्ती अब भारी पड़ने वाली है। मंगलवार को कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जब गौरगांय और छतरपुर कृषि उपज मंडी के केंद्रों का औचक निरीक्षण किया, तो वहां पसरी अव्यवस्थाओं ने उनकी नाराजगी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। गौरगांय केंद्र पर गेहूं की गुणवत्ता जांचने (FAQ) के मानकों में भारी अनदेखी और खराब मैकेनिज्म पाए जाने पर कलेक्टर ने तत्काल कड़ा प्रहार किया। उन्होंने न केवल सर्वेयर को पद से हटाने के निर्देश दिए, बल्कि समिति प्रबंधक की एक वेतन वृद्धि रोकने का भी फरमान सुना दिया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर खुद सक्रिय नजर आए। उन्होंने मौके पर अलग-अलग कांटों पर गेहूं की बोरियों की तौल कराई, जिसमें कांटा खराब पाए जाने पर संबंधितों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने दो-टूक कहा कि किसानों के एक-एक दाने की तौल सटीक होनी चाहिए। आसमान पर छाए बादलों और बारिश की आशंका को देखते हुए कलेक्टर ने सख्त हिदायत दी कि खुले में रखे गेहूं को ढंकने की पर्याप्त व्यवस्था हो और परिवहन के कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लेबर की संख्या बढ़ाएं ताकि तौल और लोडिंग में देरी न हो।
छतरपुर मंडी में विवेकानंद और गठेवरा समितियों के निरीक्षण के दौरान जब फटे-पुराने बारदाने सामने आए, तो कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने तुरंत बारदानों को बदलने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही एसडीएम को निर्देशित किया कि पटवारी के माध्यम से विक्रय हेतु आए गेहूं के रकबे और आवक की सूक्ष्म जांच कराएं। कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण और तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि अन्नदाता के साथ किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन अब पूरी तरह मुस्तैद है।









