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जब हुक्मरान बने हमदर्द: जनसुनवाई में विधवा मां की बेबसी देख भावुक हुए कलेक्टर, एक घंटे में थमाया बीपीएल कार्ड

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छतरपुर। शासन और प्रशासन जब संवेदनशील हो, तो आम आदमी की बड़ी से बड़ी समस्या चुटकियों में हल हो जाती है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई इसका जीवंत प्रमाण बनी, जहां कलेक्टर पार्थ जैसवाल के मानवीय दृष्टिकोण ने एक दुखी परिवार के अंधेरे जीवन में रोशनी भर दी। नारायणपुरा रोड निवासी अंजलि मिश्रा जब अपने मासूम बच्चों को लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुंची, तो उसकी आंखों में भविष्य को लेकर गहरा खौफ और बेबसी साफ झलक रही थी।
अंजलि ने सिसकते हुए अपनी व्यथा सुनाई कि मार्च 2025 में पति के असमय देहांत के बाद उसके पांच बच्चों (चार लड़के और एक पुत्री) के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। आय का कोई साधन न होने के कारण वह दर-दर भटकने को मजबूर थी। मामले की गंभीरता को भांपते हुए कलेक्टर ने प्रोटोकॉल और फाइलों की लंबी प्रक्रिया को किनारे कर दिया। जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया के प्रस्ताव पर उन्होंने मौके पर ही एसडीएम को बीपीएल कार्ड बनाने का आदेश दिया। प्रशासन की सक्रियता का आलम यह रहा कि महज एक घंटे के भीतर अंजलि को उसका राशन कार्ड सौंप दिया गया।


सिर्फ अंजलि ही नहीं, जनसुनवाई में पहुंचे कई अन्य लोगों के लिए भी यह मंगलवार मंगलकारी साबित हुआ। बुजुर्ग बलगोटी श्रीवास और आरती अग्रवाल की वर्षों की पेंशन संबंधी बाधाएं दूर करते हुए उन्हें तत्काल स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। वहीं, नैगुवां के जमुना प्रसाद अहिरवार की रुकी हुई 59 हजार रुपये की मुआवजा राशि का तत्काल अवार्ड पारित कर भुगतान के निर्देश दिए गए। कु. मान्या गौतम की समग्र आईडी की तकनीकी खामी को भी ई-गवर्नेंस के माध्यम से तुरंत दुरुस्त कराया गया। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के इस ऑन द स्पॉट एक्शन ने जनसुनवाई के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत कर दिया है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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