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ड्राइवर बना ‘tea king’…रोड एक्सीडेंट के बाद शुरू किया चाय स्टॉल, अब बन चुके हैं लाखों के मालिक

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हजारीबाग की सड़कों पर चाय की खुशबू आज एक नए नाम से जानी जाती है अरविंद टी स्टॉल. ये सिर्फ एक दुकान नहीं, एक सपना है, जो चाय की हर चुस्की के साथ ज़िंदा है. अरविंद सोनी, जिन्होंने कभी गाड़ी चलाकर अपनी जिंदगी की गाड़ी खींची, आज अपने हाथों से बनाई चाय से आठ लोगों को रोज़गार और हजारों ग्राहकों को मुस्कुराहट दे रहे हैं.

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साल 2018 से पहले अरविंद एक ड्राइवर थे. लेकिन एक सड़क दुर्घटना के बाद परिवार की सलाह पर उन्होंने गाड़ी छोड़ दी. आमदनी का जरिया खत्म हुआ, लेकिन हौसला कायम रहा. बनारस की गलियों में पी गई कुल्हड़ चाय ने उन्हें एक आइडिया दिया,क्यों न हजारीबाग में कुल्हड़ चाय बेची जाए?

एक छोटी सी रेडी से शुरुआत हुई. दिनभर मेहनत, और चाय के साथ ईमानदारी का स्वाद भी मिलने लगा. ग्राहकों की जुबान पर चाय का ज़ायका चढ़ने लगा और धीरे-धीरे कुल्हड़ चाय एक पहचान बन गई. फिर समोसा, कचौड़ी, रसगुल्ला और लस्सी जैसे लोकल स्नैक्स भी मेन्यू में जुड़ गए.

आज अरविंद के स्टॉल से रोज़ाना 700 से 800 कप चाय और 1200 से ज्यादा समोसे-कचौड़ी बिकते हैं. हाईवे पर मौजूद उनकी दुकान रुकने का एक शानदार बहाना बन गई है. बिहार से लेकर रांची तक जाने वाले यात्री अरविंद की चाय के कायल हो चुके हैं.

शेखर कुमार, जो पटना के रहने वाले हैं, बताते हैं “जब भी रांची की यात्रा करता हूं, हजारीबाग में अरविंद की दुकान से चाय और समोसा लिए बिना आगे नहीं बढ़ता.”

अरविंद कहते हैं, “काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस मेहनत और ईमानदारी होनी चाहिए.” उनकी कहानी आज उन युवाओं को रास्ता दिखा रही है जो पढ़े-लिखे होकर भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. यह कहानी सिर्फ चाय की नहीं, एक सोच की है कि अगर दिल से किया जाए, तो हर काम में स्वाद होता है… और शायद, कुछ चुस्कियां किस्मत भी बदल देती हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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