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The light of the house was extinguished before Rakshabandhan | घर में हो रही थी रक्षाबंधन की तैयारी: छह बहनों का इकलौता भाई था सिद्धार्थ, रीवा में दीवार गिरने से चार बच्चों की मौत – Rewa News

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रीवा के गढ़ कस्बे में शनिवार को हुए दीवार हादसे में दो सगे भाई-बहनों समेत चार मासूमों की मौत से लोग सदमे में हैं। यह दीवार स्कूल से सटी हुई है। इसी रास्ते से रोज सैकड़ों बच्चे निकलते थे। दीवार जर्जर थी, इसके बाद भी इसे ढहाया नहीं गया। पुलिस ने इस मामल

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20 साल पुरानी इस दीवार का ढहना तय था। 30 फीट लंबी और 7 फीट ऊंची यह दीवार लंबे समय से जर्जर थी। मई में भी इसका एक हिस्सा ढह गया था। इसके बाद भी न तो इसे ढहाया गया, न ही इसकी मरम्मत की गई। यह दीवार गांव के ही दो भाइयों जगदीश नामदेव व सतीश नामदेव की है। दोनों भाइयों के बीच इसी दीवार को लेकर विवाद चल रहा है कि इसे कौन हटाएगा। सनराइज पब्लिक स्कूल के संचालक और अभिभावक इसे गिराने का कह चुके थे, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई और दीवार ढह गई। पुलिस ने दोनों भाइयों जगदीश नामदेव व सतीश नामदेव के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

घर का चिराग बुझ गया, 6 बहन बांधती थी राखी
रक्षाबंधन से 17 दिन पहले हुए हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। हादसे में वीरेंद्र गुप्ता गुप्ता के बेटे सिद्धार्थ की भी मौत हुई है। सिद्धार्थ तीन बहनों का इतलौता भाई था। सिद्धार्थ के चाचा सुरेंद्र गुप्ता का भी कोई बेटा नहीं था। उनकी तीनों लड़कियां भी सिद्धार्थ को ही राखी बांधती थीं। सुरेंद्र गुप्ता और वीरेंद्र गुप्ता सगे भाई हैं। सुरेंद्र कॉस्मेटिक तो वीरेंद्र किराना की दुकान चलाते हैं। सुरेंद्र की बेटी अंशिका की मौत हो गई। रक्षा घायल है। वीरेंद्र ने बेटी मान्या और बेटे सिद्धार्थ को खो दिया। दोनों संयुक्त परिवार में रहते हैं।

मन्नत के बाद हुआ था बेटे का जन्म
परिजनों ने बताया कि वीरेंद्र और सुरेंद्र के तीन-तीन बेटियां हैं। घर के लोग चाहते थे कि घर में एक बेटा हो जाए। ताकि रक्षा बंधन के त्योहार पर घर की बेटियां उसे राखी बांध सके। सिद्धार्थ के पिता वीरेंद्र ने बेटे के लिए कई मंदिरों में मन्नत मांगी थी। कई जगह अनुष्ठान भी कराए। तब जाकर घर में पांच साल पहले एक लड़का हुआ। संयुक्त परिवार में रक्षाबंधन पर 6 बहन सिद्धार्थ को राखी बांधती थीं।

हादसे में अपने पांच साल के बेटे अनुज को खो देने वाले इंद्रपाल प्रजापति ने बताया कि मेरी पत्नी रानी प्रजापति बेटे को लेने के लिए स्कूल गई थी। अनुज को स्कूल से लेकर लौट ही रही थी, तभी ये हादसा हो गया। दोनों दीवार के नीचे दब गए। मैंने बेटे को खो दिया। पत्नी की हालत गंभीर है।

इन बच्चों की हुई मौत

  • अंशिका गुप्ता (5) पिता सुरेंद्र गुप्ता (एलकेजी)
  • मान्या गुप्ता (7) पिता वीरेंद्र गुप्ता (2nd क्लास)
  • सिद्धार्थ गुप्ता (5) पिता वीरेंद्र गुप्ता (एलकेजी)
  • अनुज प्रजापति पिता इंद्रपाल प्रजापति

एक बच्ची को रेफर किया गया

  • रक्षा गुप्ता (7) पिता सुरेंद्र गुप्ता (4th क्लास)

सिर से लेकर पैर तक मलवे में दब गए थे बच्चे

घटना शासकीय आयुष औषधालय के ठीक पीछे हुई। शासकीय आयुष औषधालय की कंपाउंडर अपर्णा ने बताया कि हम लोग लंच करने के बाद बैठे हुए थे। अचानक जोर की आवाज आई। ऐसा लगा कि कोई भारी भरकम चीज गिरी है। बाहर जाकर देखा तो दीवार गिर चुकी थी। हम तेजी से भागकर मौके पर पहुंचे। लोगों से पूछा कि कोई दीवार के नीचे दबा तो नहीं। इस पर लोगों ने बताया कि बच्चे मलवे के भीतर दबे हुए हैं।

हम तुरंत भागते हुए मेन रोड पर गए। चिल्लाकर लोगों को बुलाया। हमारी आवाज सुनकर आसपास के दुकान वाले और मौजूद लोग तत्काल मौके पर पहुंचे। सभी लोगों ने मलवे को हटाकर बच्चों को बाहर निकाला। बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि स्थानीय स्तर के डॉक्टर उनका इलाज नहीं कर सकते थे। एक बच्ची थोड़ी-बहुत बातचीत कर रही थी। बाकी कोई भी बच्चा बोलने की हालत में नहीं था।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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