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नगर निगम ने शहर काे पशु विचरण मुक्त ताे कर दिया है लेकिन तीन महीने बाद भी अन्य पशु ताे छाेड़िए शहर में पहले से चिह्नित डेयरियां तक बाहर नहीं हाे पाई हैं। जिला प्रशासन, निगम प्रशासन के अफसर अब भी डेयरियां शिफ्ट कराने में लगे हुए हैं जबकि पहले से चिह्नित यह डेयरियां एक आदेश पर शहर से बाहर की जा सकती थीं, लेकिन अफसरों के ढीले रवैये के कारण तीन महीने बाद भी शहर की सड़काें पर भैंसों के झुंड देखने काे मिल जाते हैं।
प्रमुख वार्डाें में अब भी डेयरियां चल रही हैं। शहर के प्रमुख इलाकाें में गाेबर के ढेर लगे हैं। इस काम में बीते तीन महीने से निगम के अफसरों के साथ राजस्व विभाग के अफसर अपना समय दे रहे हैं लेकिन काम पूरा नहीं करा पाए हैं। आवारा पशु अब भी सड़क पर दुर्घटना का बड़ा कारण बन रहे हैं। साेमवार काे 35 पशुओं काे बाहर कराया गया
डेयरी विस्थापन कार्रवाई के तहत लक्ष्मीपुरा व पंतनगर वार्ड स्थित डेयरी के 35 पशुओं को शहर से बाहर शिफ्ट किया गया। इनमें लक्ष्मीपुरा वार्ड स्थित डालचंद घोषी के 18 पशु एवं चंद्रभान घोषी के 17 पशु आमेट गांव नगर निगम के वाहन द्वारा भेजे गए।
इसके अलावा डेयरी विस्थापन दल के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने विभिन्न वार्डों में शेष रह गईं डेयरियों के विस्थापन के लिए पशुपालकों को पशुओं को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए हिदायत दी। सहायक आयुक्त राजेश सिंह की उपस्थिति में हुई कार्रवाई के तहत 2 वार्डों की डेयरी के 35 पशुओं को शहर से बाहर शिफ्ट किया गया।
कार्रवाई में तेजी लाएं, जुर्माना लगाएं : निगम आयुक्त चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि डेयरी विस्थापन दलों को निर्देश दिए हैं कि जिन डेयरी संचालकों ने अपनी डेयरी विस्थापित करने के लिए आश्वस्त किया है उनके पशुओं को प्राथमिकता के साथ शहर से बाहर कराएं अन्यथा पशु विचरण मुक्त क्षेत्र सागर में पशुओं के विचरण करते हुए पाए जाने पर पशुओं को जब्तकर जुर्माने की कार्रवाई करें। उन्होंने नगर निगम के सभी जोन प्रभारी, उपयंत्री एवं वार्ड दरोगा को निर्देश दिए हैं कि वे डेरियों को शहर से बाहर विस्थापित करने की कार्रवाई में तेजी लाएं।
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