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Fraud in the name of getting lease | पट्टा दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी: ढाई लाख रुपए में एक एकड़ जमीन देने का कहा; पैसे लेकर फर्जी किताब थमा दी – Guna News

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कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है।

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जमीन के पट्टे दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से पैसे ठगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने उसे झांसे में लेकर पहले पट्टे दिलाने के नाम पर ढाई लाख रुपए ले लिए, फिर उसे जमीन की फर्जी किताब भी से दी। उसे एक हेक्टेयर से ज्यादा की किताब बनाकर दे दी। पुलिस ने

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पांज गांव के रहने वाले भैयालाल(45) पुत्र अमर सिंह गुर्जर ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि “कुछ समय पहले महेश प्रजापति पुत्र फुलचंद प्रजापति निवासी भार्गव कालोनी उन्हें गुना तहसील में मिला। उसने बोला कि तुम्हारे हल्के में पट्टे हो रहे हैं, तुम्हें 5 बीघा का पट्टा करा देता हूँ। तुम्हे 2.50 लाख रुपए देने पड़ेंगे। तब मैंने उससे कहा की ठीक है। फिर अपने घर वालों से चर्चा कर ढाई लाख रुपये लेकर आया और पटवारी हल्का के पीछे बने कमरे में मैंने पैसे महेश प्रजापति को दे दिये। उसके करीब 8 दिन बाद मुझे महेश ने भू-अधिकार पुस्तिका क्र. 124882, पटवारी हल्का नम्बर 55, खसरा नम्बर 220/1/5 रकबा 1.045 लगान 6 मुझे दे द, जिसमें नायब तहसीलदार गुना की सील व हस्ताक्षर हैं। किताब में पटवारी हल्का नम्बर 55 के हस्ताक्षर हैं।

फिर मैंने अपने हल्के के पटवारी प्रमोद शर्मा को किताब बताई, तो उन्होंने कहा कि यह किताब तो फर्जी है। तब मैंने कंप्यूटर पर खसरा चैक कराया तो मेरे नाम पर कोई जमीन नही आई। महेश प्रजापति के पिता पटवारी थे, इस कारण मैंने उस पर विश्वास करके पैसे दे दिए थे, लेकिन महेश प्रजापति द्वारा मेरे से ढाई लाख रुपए लेकर फर्जी जमीन की किताब मुझे देकर धोखाधड़ी की है।” भैयालाल की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने महेश प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी की FIR दर्ज कर ली है।

वकील के साथ मिलकर किया था खेल

सूत्रों की मानें तो इस मामले के आरोपी महेश प्रजापति ने एक महिला वकील के साथ मिलकर और भी किसानों से फ्रॉड किया है। दोनों में मिलकर उनसे पैसे लेकर जमीन की फर्जी किताबें बनाकर दे दीं। बता दें कि अगस्त 2023 में राजस्थान के ग्रामीणों ने कैंट थाने में शिकायती आवेदन दिया था। राजस्थान के बारां, छीपा बड़ौद जिले के नागरिकों ने बताया था कि 2020 में उनके पास कुछ व्यक्ति आए। उन्होंने कहा कि गुना जिले के बमोरी इलाके में उन्हें 15-15 बीघा जमीन के पट्टे दिलवा देंगे। उसकी किताब भी मिल जाएगी। इसके लिए 50 हजार रुपये लगेंगे। गुना में एक वकील हैं, वह जमीन दिलवा देंगी।

ग्रामीणों ने यकीन कर लिया और वह गुना में आकर वकील से मिले। वकील ने उन्हें कहा कि पीपलखेड़ी गांव में जमीन का पट्टा दिला देंगे। ग्रामीणों को यकीन हो गया और उन्होंने 50-50 हजार रुपये दे दिए। दो-चार दिन बाद ही वकील ने उन्हें जमीन की किताब दे दीं। इन किताबों में बाकायदा खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल लिखा हुआ था। किताबों में पटवारी, RI और तहसीलदार के सील-सिक्के और हस्ताक्षर भी थे।

140 किसानों से फ्रॉड किया गया था।

140 किसानों से फ्रॉड किया गया था।

ग्रामीणों ने बताया कि वकील ने उनसे कहा था कि 6 महीने तक किसी से इस बारे में बात न करें। 6 महीने में जमीन ऑनलाइन उनके नाम हो जाएगी। ऑनलाइन के नाम पर उनसे फिर 7-7 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ग्रामीणों को हर दो-तीन महीने में बुलवाया जाता और कोर्ट में पेशी कराई जाती। वहां उनसे किसी कागज पर हस्ताक्षर करा लिए जाते। हर पेशी पर वकील 500-600 रुपये ले लेती। ग्रामीणों ने कई बार जमीन का कहा लेकिन किसी न किसी बहाने से उन्हें टाल दिया जाता। ग्रामीणों ने जब जोर देकर कहा तो किसी आदमी को पटवारी बताकर जमीन नापने के लिए भेज दिया। वह व्यक्ति भी ग्रामीणों को जमीन दिखाकर वापस आ गया।

लगभग 3 वर्षों तक ग्रामीण जमीन देने की कहते रहे, लेकिन उन्हें जमीन नहीं मिली। जब ग्रामीणों को जमीन नहीं मिली, तो उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ। वह सभी इकट्ठे होकर कैंट थाने पहुंच गए। यहां उन्होंने शिकायत की। पुलिस अभी तक मामले की जांच कर रही है। ग्रामीणों को दी गयी जमीन की किताबों की भी जांच कराई जा रही है। किताबें असली हैं या फर्जी, यह तक जांच के बाद ही सामने आ पायेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 140 लोगों से 50-50 हजार रुपये लिए गए और जमीन की फर्जी किताबें बनाकर दे दी हैं।

वकील का साथी है महेश

सूत्रों की मानें तो सोमवार को कोतवाली में दर्ज हुए मामले का आरोपी महेश प्रजापति महिला वकील पूजा शर्मा का ही साथी है। पूजा किसानों को झांसे में लेती थी। जमीन की किताबें महेश ही बनाकर देता था। चूंकि, उसके पिता पटवारी रहे, ऐसे में संभवतः महेश को जमीन की किताबों, खसरे सहित अन्य मामलों की जानकारी रहे होगी। इसी का फायदा उठाकर वह फर्जी किताबें बनाकर वकील पूजा शर्मा को देता रहा होगा और वकील उन्हे किसानों को दे देती थी।

किताब में बाकायदा खसरा नंबर, क्षेत्रफल सहित सारी जानकारी रहती थी।

किताब में बाकायदा खसरा नंबर, क्षेत्रफल सहित सारी जानकारी रहती थी।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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