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‘VIP cottage’ found in Dewas forest | देवास के जंगल में मिला ‘वीआईपी कॉटेज’: फ्रिज-कूलर और कम्प्यूटर-लाइब्रेरी भी; ग्रामीणों बोले- फ्री में गेहूं पीसते थे; धर्मांतरण का आरोप – Dewas News

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देवास जिले के शुक्रवासा गांव में एक अनोखा ‘वीआईपी कॉटेज’ मिला है, जो धर्मांतरण के आरोपों के बीच सुर्खियों में है। कोलकाता के रहने वाले सौरभ बनर्जी और उनकी टीम द्वारा पिछले 5 साल से संचालित यह कॉटेज लोहे की पाइप और बांस-बल्ली से बना है।

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HOWL नाम के इस समूह पर स्थानीय आदिवासियों को प्रभावित कर धर्मांतरण कराने का आरोप है। बुधवार (23 जुलाई) को पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने छापेमारी की, जहां उन्हें वीआईपी कमरों के साथ-साथ लाइब्रेरी, मेडिकल सुविधाएं और कम्प्यूटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलीं।

गुरुवार को इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समूह के सदस्यों की हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी। पुलिस ने मामले में शनिवार (26 जुलाई) को हाउल ग्रुप के फाउंडर सौरभ बनर्जी पर FIR दर्ज कर ली। कोर्ट ने उसे 29 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं ग्रुप के सदस्यों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

धर्मांतरण के आरोपों की पड़ताल करने दैनिक भास्कर की टीम देवास से 40 किमी दूर बरोठा थाना इलाके के शुक्रवासा गांव पहुंची। पढ़िए यह रिपोर्ट…

शुक्रवासा गांव स्थित कॉटेज में कई वीआईपी सुविधाएं मिली हैं।

शुक्रवासा गांव स्थित कॉटेज में कई वीआईपी सुविधाएं मिली हैं।

लोहे की पाइप और बांस-बल्ली से बना वीआईपी कॉटेज देवास से 40 किमी दूर बसे शुक्रवासा गांव की आबादी करीब एक हजार है। गांव में 20 मकान आदिवासी समाज के हैं, जिनमें करीब 150 लोग रहते हैं। गांव में धर्मांतरण और इंदौर में जिनकी पिटाई हुई थी, उनके बारे में पूछा तो लोगों ने गांव की तरफ इशारा करते हुए बताया कि जहां आदिवासी समाज रहता है, उससे करीब आधा किमी दूर जंगल में वे लोग कॉटेज बना कर रह रहे हैं।

टीम उस जगह पर पहुंची तो पाया कि एक खेत के बीचोंबीच लोहे की पाइप, बांस-बल्ली सीट, प्लाइवुड और ग्लास की मदद से तीन केबिन वाला कॉटेज बना हुआ है। ऊपर जाने के लिए लकड़ी की घुमावदार सीढ़ी भी बनी हुई है।

लोहे की पाइप, बांस-बल्ली सीट, प्लाइवुड से तीन केबिन वाला कॉटेज बना है।

लोहे की पाइप, बांस-बल्ली सीट, प्लाइवुड से तीन केबिन वाला कॉटेज बना है।

टपरी में आटा चक्की, फ्रिज-कूलर और कम्प्यूटर कॉटेज के ईद-गिर्द पांच छोटी टपरी बनी हुई हैं। इनमें एक टपरी पर कई तरह के छोटे-बड़े औजार रखे हुए थे। यहां काफी मात्रा में डिब्बे भी रखे हुए थे, जिसमें अलग-अलग तरह की सामग्री भरी थी। यहां दो किचन के साथ ही एक टपरी में आटा चक्की है।

ग्रामीणों ने बताया कि वे लोग फ्री में उनका गेहूं पीस देते हैं। एक टपरी में बने किचन में फ्रिज, कूलर, गैस-चूल्हा, कम्प्यूटर के साथ बड़ी मात्रा में दूसरी सामग्री रखी थी। पानी के लिए बोरिंग और कॉटेज से लगा एक छोटा तालाब भी मिला।

कॉटेज की सुरक्षा के लिए चारों ओर तार फेंसिंग यहां मौजूद लोगों का कहना था कि तालाब में मछलियां भी हैं। कॉटेज की सुरक्षा के लिए चारों ओर तार फेंसिंग है। एक टपरी में मेडिकल सुविधाएं मिलीं। ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग क्षेत्र में मेडिकल उपचार के साथ ही अन्य प्रकार की कई सुविधाएं मुहैया कराते हैं।

कुछ आदिवासियों का कहना था कि बाहर से यहां रहने आए इन लोगों ने अभी तक ग्रामीणों का कुछ नुकसान नहीं किया। ये हमारी हर संभव मदद करते हैं।

कॉटेज में दो किचन के साथ ही एक टपरी में आटा चक्की है।

कॉटेज में दो किचन के साथ ही एक टपरी में आटा चक्की है।

कॉटेज में आरामदायक बिस्तर और लाइब्रेरी भी सीढ़ियों की मदद से जब कॉटेज की पहली मंजिल पर हम पहुंचे तो यहां का नजारा हैरान करने वाला था। कॉटेज में कुछ वीआईपी तो कुछ साधारण कमरे हैं। इसमें वो सभी सुविधाएं थीं, जो एक अच्छे होटल में मिलती हैं। यहां आरामदायक बिस्तर से लेकर, टेबल-कुर्सी, अलमारी, कूलर, पंखे, फ्रिज और लैपटाप है।

लाइब्रेरी में कई देसी-विदेशी लेखकों की किताबें मिलीं है।

लाइब्रेरी में कई देसी-विदेशी लेखकों की किताबें मिलीं है।

दो कमरों में लाइब्रेरी, देशी-विदेशी लेखकों की किताबें लकड़ी और लोहे की पाइप के सहारे बने इस कॉटेज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हरियाली के साथ आने-जाने वाले व्यक्तियों को भी देखा जा सकता है। कॉटेज में दो कमरों के एक हिस्से में लाइब्रेरी भी है, जिनमें चे गेवरा की फोटो और किताब के साथ ही बड़ी संख्या में दूसरे देशी-विदेशी लेखकों की किताबें हैं।

टेबल पर HOWL लिखी हुई कुछ कैप और एक पेज रखा हुआ था, जिसमें वर्ग विशेष के 16 लोगों के नाम, नंबर और किस गांव के हैं, लिखा हुआ था।

हाउल ग्रुप ने अपने नाम से कैप भी प्रिंट करवाई है।

हाउल ग्रुप ने अपने नाम से कैप भी प्रिंट करवाई है।

हिंदू संगठनों की शिकायत पर ऐसे उठा धर्मांतरण का मुद्दा विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल देवास के कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार और थाना प्रभारी को एक आवेदन दिया। इसमें लिखा- बरोठा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत पर्वतपुरा के ग्राम शुक्रवासा के जंगल में पिछले 4-5 सालों से कुछ संदिग्ध लड़के-लड़कियां HOWL GROUP के नाम से रहते हैं।

ये लोग गरीब आदिवासियों को आर्थिक मदद और अन्य लाभ प्रदान करते हैं। यहां वे रविवार को जंगल में बने कैंप पर सभी आदिवासियों को एकत्रित कर उनकी मीटिंग रखते हैं।

यहां वे आदिवासी भाई-बहनों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काने की साजिश कर रहे हैं। उनकी यह गतिविधि धर्मांतरण की साजिश लग रही है। इनके द्वारा पर्वतपुरा पंचायत विकास समिति भी बनाई गई है, जो इनके सभी कामों में शामिल है। संगठनों ने संदिग्ध लोगों को यहां से हटाने और उनकी जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

विहिप और बजरंग दल देवास के कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर से मामले की शिकायत की।

विहिप और बजरंग दल देवास के कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर से मामले की शिकायत की।

पुलिस को देखकर भागे लोग, चार को थाने लेकर आए धर्म परिवर्तन जैसी संदिग्ध गतिविधियां संचालित करने की शिकायत पर बुधवार को राजस्व की टीम बरोठा पुलिस के साथ जांच के लिए शुक्रवासा गांव पहुंची। यहां जंगल में खेत के बीच में एक कॉटेज बना था। पुलिस को देखकर कुछ लोग जंगल की ओर भाग गए, जबकि चार लोग हाथ लगे, इन्हें पूछताछ के लिए थाने लाया गया।

2 हजार ‎रुपए महीने में ली आदिवासी की 6 बीघा जमीन पूछताछ के बाद बरोठा टीआई अजय गुर्जर टीम के साथ फिर से गांव पहुंचे। पूछताछ में खुलासा हुआ‎ कि इन लोगों ने शुक्रवासा के देवराज‎ भील की साढ़े 6 बीघा जमीन एग्रीमेंट ‎पर ली है। यह जमीन सिर्फ 2 हजार ‎रुपए महीने में ली गई है।

इसका इस्तेमाल ‎यह लोग अपनी गतिविधियों के लिए ‎कर रहे हैं।‎ यहां कॉटेज के साथ दो लाइब्रेरी और एक ऐसा कमरा भी मिला, जो क्लिनिक जैसा नजर आ रहा था, जिसमें दवाइयां रखी हुई थीं। इनके पास मोबाइल, लैपटॉप और ‎अन्य संसाधन थे।

ये खुद को पढ़ा-लिखा‎ बता रहे थे, लेकिन पुलिस को इनके पास ‎से कोई डिग्री नहीं मिली। यहां पता चला कि मुख्य‎ व्यक्ति सौरभ बनर्जी है, जो कोलकाता का रहने वाला है। इनमें कुछ युवक शहडोल और‎ पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं, जबकि दोनों युवतियां इंदौर की हैं।‎

यहां यह भी पता चला कि करीब 5 साल पहले पश्चिम बंगाल का रहने वाला सौरभ इस गांव में आया था। बाद में उसने 8-10 लोगों की टीम बना ली। पुलिस ने यहां से लैपटॉप और पांच मोबाइल जब्त कर जांच में लिए हैं।

टीम के सदस्यों ने 2 हजार ‎रुपए महीने में आदिवासी की 6 बीघा जमीन लीज पर ली है।

टीम के सदस्यों ने 2 हजार ‎रुपए महीने में आदिवासी की 6 बीघा जमीन लीज पर ली है।

इन बिंदुओं पर हाे रही पूछताछ

  • मुख्य संदिग्ध व्यक्ति सौरभ बनर्जी है। वह हाउल क्लब का संचालन करता है, पुलिस उससे इस संबंध में जानकारी जुटा रही है।
  • सौरभ बनर्जी पश्चिम बंगाल के कोलकाता का रहने वाला है। वो यहां कैसे और कब आया? कौन-कौन लोग उसके ग्रुप में हैं?
  • इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए उसे फंडिंग कहां से हो रही है? उसकी संस्था व उसके बैंक खातों की जांच की जा रही है।
  • जब्त मोबाइल, लैपटॉप और अन्य दस्तावेजों से यह पता लगाया जा रहा है कि इन लोगों के गांव में रहने का मकसद क्या है?

इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे तो लोगों ने पीटा धर्मांतरण का आरोप लगने के बाद गुरुवार (24 जुलाई) को 8 लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस करने इंदौर प्रेस क्लब पहुंचे। इनके आने की सूचना मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता पहुंच गए और मारपीट कर दी। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि ये लोग देवास के एक गांव में रहकर धर्मांतरण कर रहे हैं। सेंट्रल कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा शांत कराया। बाद में उन्हें देवास पुलिस अपने साथ ले गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिंदू संगठनों ने कार्यकर्ताओं की पिटाई कर दी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिंदू संगठनों ने कार्यकर्ताओं की पिटाई कर दी।

हाउल ग्रुप के सदस्य बोले- सारे आरोप बेबुनियाद पुलिस के मुताबिक मामले में सौरभ बनर्जी और एक युवती पक्ष रखने आए थे, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही कार्यकर्ताओं ने उनकी पिटाई कर दी। बनर्जी ने कहा कि हम पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। हम भी सामाजिक काम करते हैं, वे सभी प्रशासन की जानकारी में होते हैं।

धर्मांतरण के आरोप झूठे, गांव में एक भी ईसाई नहीं फाउंडर के सदस्यों का कहना है कि धर्मांतरण के सारे आरोप झूठे और गलत है। हमारी टीम का कोई सदस्य ईसाई नहीं है। इस पूरे गांव में एक भी ईसाई आपको नहीं मिलेगा। अगर चार साल से हम धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं तो यहां का एक भी व्यक्ति ईसाई क्यों नहीं बन पाया।

ये सोशल आर्गनाइजेशन, अपनी कमाई इसमें लगा रहे हमारा एक सोशल आर्गनाइजेशन है। हमारी टीम में 9 सदस्य हैं। इसमें पत्रकार, इंजीनियर, डॉक्टर, डांसर, फिल्म मेकर शामिल हैं। सभी वर्किंग प्रोफेशनल अपनी कमाई इस सामाजिक सहायता के सपने में लगाते हैं। धर्मांतरण और नक्सलवाद की सारी बातें एकदम झूठी हैं।

फाउंडर पर केस दर्ज, हिरासत में पूछताछ जारी पुलिस ने शिकायत के शनिवार (26 जुलाई) को हाउल ग्रुप के फाउंडर सौरभ बनर्जी पर केस दर्ज किया है। सौरभ को कोर्ट में पेश किया गया है, जहां से उसे 29 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर दिया गया है। साथ ही राजस्व विभाग ने अवैध तरीके से आदिवासी की जमीन लेने के मामले में नोटिस भी चस्पा कर दिया है।

आरोपी को मिलने वाली फंडिंग, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस की अलग-अलग टीमें इस मामले की जांच में लगी हुई हैं। जांच के बाद आने वाले दिनों में प्रकरण में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें पुलिस के सामने युवक-युवतियों को पीटा, कालिख पोती इंदौर के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए 8 युवक-युवतियों के साथ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मारपीट की है। युवतियों से भी धक्का-मुक्की की गई। इन पर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा है। पढ़ें पूरी खबर…

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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