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Heavy rain in May…53 districts got wet, records broken | मई में खूब बारिश…53 जिले भीगे, रिकॉर्ड टूटे: इंदौर में 139 साल में सबसे ज्यादा बरसात; एमपी में 7 गुना पानी गिरा – Bhopal News

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रायसेन और गंजबासौदा में शुक्रवार को तेज बारिश हुई थी।

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ओले-बारिश और आंधी। पूरे मई महीने में मध्यप्रदेश में ऐसा मौसम रहा। एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब प्रदेश के किसी न किसी जिले में आंधी-बारिश न हुई हो। एमपी में ऐसा पहली बार हुआ। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत कुल 53 जिले भीग गए। सिर्फ निवाड़ी ही

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मई के आखिरी दिन भी उमरिया और बालाघाट जिले में बारिश हुई। इसे मिलाकर इस महीने करीब 2 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य बारिश से 7 गुना अधिक है। इस महीने की सामान्य बारिश 7 मिमी है। दैनिक भास्कर ने मई महीने में हुई बारिश की वजह जानी और डेटा स्टडी की। वहीं, जून में कैसा मौसम रहेगा, यह सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन से जाना।

मई महीने में पूरे मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा।

मई महीने में पूरे मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा।

सबसे पहले जानिए…मई में गर्मी का मिजाज इस साल अप्रैल में जितनी गर्मी थी, उतनी मई में नहीं रही। अप्रैल में कई शहरों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया था। पिछले सालों की डेटा स्टडी से पता चलता है कि मई में निवाड़ी के पृथ्वीपुर, छतरपुर के नौगांव, खजुराहो, निवाड़ी, ग्वालियर, राजगढ़, दतिया, टीकमगढ़, सतना, दमोह, उज्जैन, गुना, शाजापुर, खंडवा, खरगोन जैसे कई शहरों में पारा 46 से 48 डिग्री या इसके पार पहुंच चुका है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं रहा।

प्रदेश के किसी भी शहर में दिन का तापमान 43 डिग्री तक भी नहीं पहुंचा। नौतपा में भी कम ही गर्मी रही। नौगांव, खजुराहो, टीकमगढ़, ग्वालियर, दमोह, शिवपुरी जैसे शहरों में ही पारा 40 डिग्री के पार पहुंचा। बाकी शहरों में इससे काफी नीचे रहा।

क्यों रहा ऐसा मौसम? मई में भीषण गर्मी की बजाय आंधी-बारिश होने के पीछे क्या वजह रही? इसके बारे में मौसम वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्रन बताते हैं कि मई की शुरुआत से आखिरी तक प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन, वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और टर्फ की एक्टिविटी देखने को मिली। लगातार सिस्टम एक्टिव होते रहे। इस वजह से आंधी-बारिश का दौर भी चलता रहा। आखिरी दिन भी कुछ जिलों में मौसम बदला रहा।

रिकॉर्ड टूटे, ऐसे समझे

  • इंदौर में साल 1886 के मई महीने में 107.7 मिमी यानी, 4.2 इंच पानी गिरा था, जबकि इस बार 114.8 मिमी यानी, 4.6 इंच पानी गिर गया है। इस तरह 139 साल में इंदौर का रिकॉर्ड टूट गया है।
  • उज्जैन में मई की बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना है। इस बार 111.8 मिमी यानी, 4.3 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। साल 2021 में कुल मासिक बारिश 65 मिमी (2.5 इंच) हुई थी। इस हिसाब से उज्जैन में मई की बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना है।
  • देवास में मई में कभी भी इतनी बारिश नहीं हुई। यहां पर इस बार 6.3 इंच से ज्यादा पानी गिर गया।

2 स्लाइड से जानिए, मई में कहां-कितनी बारिश हुई

मई में आंधी-बारिश की 3 तस्वीरें…

मई महीने में इंदौर में तेज बारिश हुई। इससे सड़कों पर पानी भर गया। यहां पर 121 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी भी चल चुकी है।

मई महीने में इंदौर में तेज बारिश हुई। इससे सड़कों पर पानी भर गया। यहां पर 121 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी भी चल चुकी है।

आंधी की वजह से धार, बड़वानी और खरगोन में पीपल और पपीते की फसल भी बर्बाद हो गई।

आंधी की वजह से धार, बड़वानी और खरगोन में पीपल और पपीते की फसल भी बर्बाद हो गई।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के 53 जिलों में मई महीने में बारिश हुई।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के 53 जिलों में मई महीने में बारिश हुई।

मई में ऐसा मौसम पहली बार मई में ऐसा मौसम पहली बार है, जब पूरे महीने ही आंधी, बारिश का दौर रहा। हालांकि, 26 अप्रैल से ही मौसम बदल गया था और आंधी-बारिश हो रही थी। कुछ जिलों में तो ओले भी गिर चुके हैं। इससे पहले साल 2023 में मई में 20 दिन बारिश हुई, लेकिन पानी पूरे महीने ही गिरा था, लेकिन लगातार नहीं।

देवास में 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा, 6 जिलों में 4 इंच से ज्यादा मई में देवास जिले में सबसे ज्यादा 6.3 इंच बारिश हुई। वहीं, इंदौर में 4.6 इंच, अनूपपुर में 4.5 इंच, रतलाम में 4.4 इंच, उज्जैन में 4.3 इंच और झाबुआ में 4.3 इंच बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, खरगोन, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, मुरैना, अलीराजपुर, डिंडौरी, रायसेन, नीमच, हरदा और धार में ढाई से साढ़े 3 इंच तक पानी गिरा।

निवाड़ी जिले में भी मौसम बदला, लेकिन बूंदाबांदी रिकॉर्ड में नहीं आ सकी। इस कारण यह जिला बारिश वाले जिलों में शामिल नहीं हो सका। दतिया, मुरैना, टीकमगढ़, रीवा, नरसिंहपुर, सतना, छतरपुर, जबलपुर और ग्वालियर में 1 इंच या इससे कम बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में 45.6 मिमी यानी, 1.8 इंच पानी गिरा गया। पिछले साल भोपाल में 2 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। हालांकि, 10 साल में तीसरी बार इस बार सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

अब जानिए… जून में कैसा रहेगा मौसम जून में कैसा मौसम रहेगा? इसे लेकर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी टर्फ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की एक्टिविटी है। इस वजह से अगले चार दिन यानी, 4 जून तक आंधी-बारिश का अलर्ट है। कई शहरों में दिन-रात के पारे में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। उमस भी बढ़ जाएगी।

इधर, मानसून 7 से 10 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। यदि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो मानसून के एंटर होने से पहले प्रदेश में तेज गर्मी का असर रहता है। सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल गर्म रहता है, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग भी जमकर तपते हैं। जून के आखिरी दिनों में ही टेम्प्रेचर से थोड़ी राहत मिलने लगती है। हालांकि, जून में रात का टेम्प्रेचर 8 से 10 डिग्री तक लुढ़क जाता है। अबकी बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।

एमपी में कितना तापमान, ग्राफिक्स से जानिए…

अब जानिए, 10 साल में कैसा रहा मौसम…

भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर रहा। 3 साल तो टेम्प्रेचर 45 डिग्री के पार पहुंच गया। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल भी साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।

इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 4 साल यानी- 2020, 2021, 2022 और 2023 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.1 डिग्री के बीच रहा है। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल 4 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।

ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्प्रेचर ग्वालियर में मई के बाद जून भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है। अबकी बार भी मानसून आने तक गर्मी पड़ेगी। पिछले साल 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।

जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यही से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2014 से 2023 तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो कोटे की 30% तक बारिश हो चुकी है। पिछले साल 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है।

उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2015 से 2023 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। 20 जून तक यहां मानसून एंटर हो सकता है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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