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10 रुपये में ‘अमृत’ पिलाकर हर दिन कमाते हैं 4000 रुपये, जानिए आजम बाली की कहानी

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Success Story: सोलापुर के आजम बाली 15 सालों से 10 रुपये में शुद्ध गन्ने का रस बेच रहे हैं. रोज़ाना 500 गिलास बिकते हैं. उनकी सफाई, सादगी और ईमानदारी ने उन्हें आम जनता का चहेता बना दिया है.

₹10 में ‘अमृत’ पिलाकर हर दिन कमाते हैं 4000 रुपये, जानिए आजम बाली की कहानी

गन्ने का रस

सोलापुर शहर के दिल कहे जाने वाले गुरुनानक चौक पर एक ऐसी दुकान है जो पिछले पंद्रह सालों से लोगों की प्यास बुझा रही है. यहां सोलापुर क्लब के सामने गन्ने का रस बेचने वाले आजम बाली की दुकान दिनभर ग्राहकों से भरी रहती है. गर्मी के इस मौसम में जहां पानी भी बोतल में 20 रुपये में मिलता है, वहीं आजम बाली आज भी 15 साल पहले वाली कीमत पर – सिर्फ 10 रुपये में एक गिलास गन्ने का रस बेच रहे हैं.

जूस के दीवाने, हर रोज़ लगती है भीड़
यहां रोजाना 400 से 500 गिलास गन्ने का रस बिक जाता है. पुलिसकर्मी हों या सरकारी अफसर, ऑफिस से लौटते कर्मचारी हों या आम लोग – हर कोई यहां रुककर एक गिलास ठंडा-मीठा रस जरूर पीता है. कुछ तो 5-6 गिलास पार्सल कराकर घर भी ले जाते हैं. ग्राहक इस रस को “अमृत जैसा” बताते हैं और कहते हैं कि इसका स्वाद कहीं और नहीं मिलता.

गुणवत्ता में भी कोई समझौता नहीं
आजम बाली की खास बात यह है कि वे सफाई और स्वाद का पूरा ध्यान रखते हैं. पहले वे लकड़ी की छलनी से रस निकालते थे, लेकिन अब उन्होंने स्टील बॉडी वाली आधुनिक मशीन लगा ली है. इससे रस न तो काला पड़ता है और न ही उसका स्वाद बिगड़ता है. रस हमेशा सफेद, साफ और ताज़ा रहता है, जो ग्राहकों को और भी पसंद आता है.

गरीब-अमीर सभी के लिए एक समान कीमत
आजम बाली कहते हैं कि उन्होंने कभी भी कीमत बढ़ाने का विचार नहीं किया, क्योंकि वे चाहते हैं कि हर वर्ग का इंसान, चाहे वह गरीब हो या अमीर, गर्मी में राहत पा सके. इसी सोच के चलते उन्होंने पिछले 15 सालों में कभी भी 10 रुपये से ज्यादा नहीं लिए. यही वजह है कि लोग यहां बार-बार लौटकर आते हैं.

हर दिन की कमाई 3 से 4 हजार रुपये
गन्ना, बर्फ, कप और दूसरी जरूरतों का खर्च निकालने के बाद भी आजम बाली रोज़ाना 3 से 4 हजार रुपये तक कमा लेते हैं. यह उनके मेहनत और ईमानदारी का नतीजा है कि उनका छोटा-सा गन्ने का ठेला आज सोलापुर में पहचान बन चुका है.

छोटे काम में भी बड़ी इज्ज़त
आजम बाली की कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर लगन और सच्चाई से कोई काम किया जाए, तो छोटा सा धंधा भी इज्ज़त और अच्छी कमाई दे सकता है. उनकी दुकान न सिर्फ प्यास बुझा रही है, बल्कि लोगों को एक सच्ची और प्रेरणादायक कहानी भी सुना रही है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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