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Indore Shooters are not born, they are made | ‘निशानेबाज पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं’: BSF की 52वीं इंटर-फ्रंटियर वेपन शूटिंग प्रतियोगिता; ट्रेनर बोले- निशानेबाज बनने 10 से 14 ‌की उम्र बेहतर – Indore News

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इंदौर में 6 दिनी BSF 52वीं इंटर-फ्रंटियर वेपन शूटिंग प्रतियोगिता चल रही है।

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एक निशानेबाज बनने के लिए उसकी इच्छा शक्ति होना जरूरी है क्योंकि यह फायर आर्म्स है। फिजिकल फिटनेस भी जरूरी है जो निशानेबाजी के लिए टफ होती है। फिर चाहे वो सर्विस वेपन हो या नेशनल लेवल के स्पोर्ट्स वेपन हो। निशानेबाज रुल के हिसाब से फायर करें। अगर वह इ

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इंदौर में सोमवार से 6 दिनी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की 52वीं इंटर-फ्रंटियर वेपन शूटिंग प्रतियोगिता शुरू हुई है। इसमें बीएसएफ के देशभर के 860 श्रेष्ठ निशानेबाज इसमें भाग लेने आए हैं। आयोजन में 11 प्लाटून हथियार प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 10 प्रतियोगिताएं रेवती रेंज और 51 एमएम मोर्टार की एक प्रतियोगिता महू स्थित हेमा रेंज में होगी।

‘निशानेबाज पैदा नहीं होते हैं, बनाए जाते हैं’, बीएसएएफ के इस सूत्र वाक्य को लेकर दैनिक भास्कर ने नरेश कुमार, असिस्टेंट कमांडर (YCP-PBVX) से बात की। उनसे जाना कि एक अच्छा शूटर कैसे तैयार होता है, निशानेबाजी की क्या-क्या बारीकियां हैं।

उनका कहना है कि भारत नेशनल लेवल के स्पोर्टस वेपन में छाया हुआ है। नेशनल राइफल एसोसिएशन ने इस बार भी ओलिंपिक में काफी मैडल हासिल किए हैं। एक शूटर तैयार करने के लिए 10 से 14 वर्ष का बालक की उम्र सही होती है। सीमा सुरक्षा बल ने इसकी शुरुआत की है।

6 महीने तक फायर गतिविधियों में ढालते हैं

असिस्टेंट कमांडर के मुताबिक- ट्रेनिंग लेकर बच्चों को लेक्चर लिए जाते हैं। यानी उन्हें फायर की गतिविधियों में ढालना होता है। फिर उन्हें मस्केट्री (मांसपेशियों से संबंधित) कराई जाती है। इस लेवल पर 6 माह तक काम किया जाता है। इस दौरान वे रुल और फायर समझते हैं। शूटिंग स्पोर्टस कैसे हैंडिल कर सकते हैं यह सब वे छह माह में सिखते हैं। इसमें परिवार की सहमति जरूरी होती है।

ट्रेनिंग के दौरान उन्हें शूटिंग के फंडामेंटल के बारे में जानकारी दी जाती है। शुरुआती दौर में उन्हें डमी वेपन दी जाती है। इसके बारे में ब्लैक बोर्ड पर जानकारी दी जाती है। खासकर जिस पोजिशन में उसे फायर करना है, उस पोजिशन को तैयार करवाया जाता है। यहां प्रहरी बाल विकास योजना है जिसके लिए एक संस्था है।

संस्था के बच्चे नेशनल लेवल पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सीबीएसई नेशनल गेम में उन्होंने राइफल में गोल्ड हासिल किया था। ये बच्चे तीन साल में 19 मैडल से सम्मानित हो चुके हैं। ये रोज दो घंटे की प्रेक्टिस करते हैं। उम्मीद है कि इनमें से कोई बच्चा भ‌विष्य में भारत के लिए तैयार हो सकता है।

असिस्टेंट कमांडर का कहना है कि जब तक वह 60 शॉट नहीं मार लेता तब तक उसकी ट्रेनिंग जारी रहती है। सबसे पहले 10 मीटर एयर वेपन (.177) की ट्रेनिंग देते हैं जो बेसिक रूप से शूटिंग के लिए होता है। इसके बाद उसे 0.22 की कैटेगरी में लिया जाता है।

लगातार प्रैक्टिस के बाद लेते हैं प्रतियोगिता में भाग

उधर, इंटर-फ्रंटियर वेपन शूटिंग प्रतियोगिता के लिए जितने भी फ्रंटियर हैं वे कॉम्पीटिशन के छह माह पहले से ट्रेनिंग शुरू कर देते हैं। ट्रेनिंग में पांच हथियार एसएसजी, एलएमजी, इनसास राइफल, पिस्टल सर्विस वेपन इस्तेमाल किए जाते हैं।

निशानेबाज लगातार फ्रंटियर में प्रैक्टिस करके प्रतियोगिता में भाग लेने आते हैं। इन्हें रुल के हिसाब से फायर करना होता है। ये सभी टाइमर फायर हैं।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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