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खेती बर्बाद, पशुपालन फेल, फिर भी नहीं मानी हार! 70 साल में कर्ज लेकर खड़ा किया धांसू बिजनेस!

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सांगली जिले के रेणावी के बालकृष्ण यादव ने सत्तर साल की उम्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में कदम रखा. अपने दोनों बेटों की मदद से उन्होंने माउली फूड्स ब्रांड के तहत चक्की फ्रेश आटा स्टार्टअप शुरू किया है.

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70 साल की उम्र में शुरू किया सफल आटा चक्की बिजनेस!

हाइलाइट्स

  • बालकृष्ण यादव ने 70 साल की उम्र में आटा चक्की का बिजनेस शुरू किया.
  • 30 लाख का कर्ज लेकर माउली फूड्स ब्रांड के तहत स्टार्टअप शुरू किया.
  • 2022-23 में 50 टन से 2024-25 में 400 टन तक बिक्री बढ़ी.

प्रीति निकम/सांगली: सूखा, खेती, राजनीति इन सब से जूझते हुए सांगली के खानापुर तालुका के रेणावी गांव के आप्पा ने सत्तर साल की उम्र में नया स्टार्टअप शुरू किया है. जीवन भर के अनुभव, अध्ययन और जिद के बल पर दोनों बेटों को साथ लेकर सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (Micro food processing industries) में 30 लाख का कर्ज प्रोजेक्ट लेकर आटा चक्की का बिजनेस (Flour Mill Business) शुरू किया है, तो चलिए जानते हैं कि पिछले ढाई साल से आटा चक्की कैसे चलती है और सत्तर वर्षीय आप्पा ने मार्केट में कैसे धूम मचाई…

रेणावी गांव के बालकृष्ण पांडुरंग यादव 70 साल के किसान हैं. पहाड़ी इलाके में स्थित गांव में उनकी लगभग 10 एकड़ खेती है. सूखे से जूझते हुए उन्होंने अंगूर और केले की बागें भी उगाईं और दो-तीन साल अच्छा फसल लिया, लेकिन फिर सूखा पड़ते ही फिर से नुकसान सहना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने कई साल खेती करते हुए पशुपालन में भी हाथ आजमाया. सामाजिक प्रतिष्ठा और राजनीति के चक्कर में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हुआ. आत्मनिरीक्षण (Introspection) करते हुए बालकृष्ण यादव उर्फ आप्पा ने खेती, पशुपालन और सूतगिरणी बिजनेस (cotton mill Business) करते हुए फिर से परिवार पर ध्यान दिया.

संकट ने दिखाया रास्ता
बालकृष्ण के बेटों प्रशांत और प्रसाद को भी संघर्ष का सामना करना पड़ा. सूतगिरणी (cotton mill) स्थापित की, लेकिन उसमें भी असफलता मिली. कर्ज हो गया. उससे निकलने के लिए भागदौड़ शुरू हुई. कोरोना आया और उसमें सूतगिरणी पूरी तरह बंद हो गई. अब परिवार ने जीविका का ठोस विकल्प ढूंढना शुरू किया.

कोरोना ने सिखाया
बता दें कि कोरोना काल में एक बात समझ में आई कि बाकी सभी बिजनेस, चीजें इस दौरान ठप हो जाती हैं. लेकिन अनाज, खाद्य पदार्थ निर्माण और उनकी मांग नहीं रुक सकती. इसी विचार से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उतरने का निर्णय लिया. विभिन्न जानकारी स्रोतों, यूट्यूब आदि के माध्यम से बिजनेस की खोज शुरू की. कई विकल्पों में से तुलनात्मक रूप से कम खर्च में करने योग्य गेहूं से आटा निर्माण का प्रोजेक्ट सही लगा.

शुरू किया स्टार्टअप
प्रसंस्करण उद्योग (Processing Industry) के लिए आवश्यक कच्चा माल, उसकी उपलब्धता, बाजार में दर आदि का अध्ययन किया. इसके लिए मध्य प्रदेश, पंजाब की गेहूं बाजारों का दौरा किया. प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना की जानकारी मिली. प्रोजेक्ट की कीमत 30 लाख थी.

इसके लिए 35 प्रतिशत अनुदान पाने और प्रशिक्षण देने के लिए भी केंद्र सरकार के आत्मा विभाग ने मदद की. पूंजी उपलब्ध होने के बाद आवश्यक मशीनें राजकोट से खरीदीं. विटा शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर घाणवड की औद्योगिक बस्ती में जगह किराए पर ली. वहां, माउली फूड्स नाम से प्रसंस्करण उद्योग का स्टार्टअप 2022-23 में शुरू किया.

बिजनेस का ग्राफ बढ़ता
बालकृष्ण का स्वभाव मिलनसार होने के कारण उन्हें विश्वास था कि वे अपने उत्पाद का मार्केटिंग अच्छे से कर सकते हैं. वे विभिन्न दुकानों में अपना आटा लेकर जाते, उसकी विशेषताएं, गुणवत्ता विक्रेताओं को समझाते. विक्रेता एक बैग रखकर जाने को कहते. धीरे-धीरे गुणवत्ता समझ में आने लगी और उनसे मांग आने लगी. इसके अनुसार बालकृष्ण ने मार्केट तैयार करना शुरू किया. अब आसपास के ग्राहक भी आकर खरीदारी करते हैं. वर्ष 2022-23 में 50 टन, 2023-24 में 300 टन, और 2024-25 में अब तक 400 टन की बिक्री तक बिजनेस का ग्राफ बढ़ता रहा है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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