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17 साल किया झाड़ू-पोछा, शख्स बना गया ₹68 करोड़ का फंड, नहीं किया कोई झोल बस एक सिंपल ट्रिक आई काम

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एक सफाईकर्मी, रॉनल्ड रीड ने साधारण तौर पर ब्लू चिप कंपनियों में निवेश करके ₹68 करोड़ की संपत्ति बनाई. रीड ने धैर्यपूर्वक डिविडेंड स्टॉक में निवेश किया और लंबी अवधि तक बने रहे, जिससे उन्हें मृत्यु के समय एक बड़ा …और पढ़ें

17 साल किया झाड़ू-पोछा, मरने पर शख्स छोड़ गया ₹68 करोड़, कभी नहीं किया कोई झोल

रॉनल्ड रीड के पास 95 कंपनियों के शेयर थे. (सांकेतिक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • एक साधारण सफाईकर्मी बना करोड़पति.
  • निवेश की सीख: धैर्य और ब्लू-चिप शेयरों में निवेश.
  • लॉन्ग टर्म निवेश से बनाई 68 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति.

नई दिल्ली. शेयर मार्केट के किसी भी अच्छे जानकार से अगर आप मिलेंगे तो आपको 10 में से 9 बार यही बात सुनने को मिलेगी कि ‘जमे रहो’. यानी शेयर बाजार से तुरंत-तुरंत पैसा कमाने की बात सोचना छोड़कर लंबी रेस का घोड़ा बनो. अगर आप लंबे समय तक वहां टिके रहते हैं तो पैसा बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा फैंसी ट्रिक्स आजमाने की जरूरत नहीं है. वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने अपने एक लेख में मजेदार किस्से के साथ सिंपल इन्वेस्टिंग की ताकत को समझाया है.

कुमार द्वारा ईटी में लिखे गए इस आर्टिकल में उन्होंने यूएस के एक शख्स की कहानी सुनाई है जिसने 25 साल एक पेट्रोल पंप पर काम किया और फिर 17 साल एक कंपनी में जेनिटर (साफ-सफाई करने वाला) का किया. इस शख्स का नाम रॉनल्ड रीड था. 2014 में जब रीड का निधन हुआ तो वह अपने पीछे 80 लाख डॉलर यानी 68 करोड़ रुपये से अधिक का फंड छोड़ गए थे. कुमार कहते हैं कि रीड ने ये पैसा उन नौकरियों से बनाया जहां से उन्हें बहुत औसत वेतन ही मिलता था.

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रीड कैसे बने करोड़पति?
कुमार लिखते हैं कि रीड ने कभी बहुत ऊट-पटांग निवेश रणनीति नहीं अपनाई. उन्होंने धैर्य के साथ ब्लू चिप कंपनियों में अपना पैसा लगाया. रीड ने कभी उन ट्रेडिंग टेक शेयरों में निवेश करने के बारे में सोचा ही नहीं जिनकी उन्हें समझ नहीं थी. जब उनकी मौत हुई तो उनके पोर्टफोलियो में 95 शेयर थे. इनमें से अधिकांश शेयर लार्ज कैप कंपनियों के थे. रीड ने पीएंडजी, जॉनसन एंड जॉनसन और सीवीएस हेल्थ जैसे शेयर में पैसा लगाया हुआ था.

साधारण निवेश रणनीति
कुमार ने लिखा है कि रीड की निवेश रणनीति बहुत सिंपल थी- डिविडेंड देने वाले क्वालिटी स्टॉक में पैसा लगाओ और फिर उस डिविडेंड से दोबारा शेयर खरीदो और छोड़ दो. कुमार बताते हैं कि जब 2008 के मार्केट कोलेप्स में लिमन ब्रदर्स में उनका पैसा डूबा तो भी रीड को कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उनका पोर्टफोलियो बहुत डायर्वसिफाइड था और यह नुकसान उनके लिए बहुत मामूली रहा. बकौल कुमार, रीड की कहानी भारतीय निवेशकों के लिए एक सीख है. जैसे रीड ने अमेरिका की ब्लू चिप कंपनियों में निवेश सही समझा उसी तरह भारत में भी कई क्वालिटी स्टॉक्स हैं जिनकी डिविडेंड हिस्ट्री बहुत शानदारी है. यह कंपनियां भले सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय न बनें लेकिन इन्होंने लॉन्ग टर्म में अच्छा वेल्थ क्रिएशन किया है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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