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BJP MLA Panna Lal Shakya stands by his statement: | बीजेपी विधायक बोले- डिग्री से बेहतर, पंक्चर की दुकान खोलें: भास्कर के सवाल पर कहा- पंक्चर की दुकान कोई खराब चीज है क्या? – Madhya Pradesh News

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गुना से बीजेपी विधायक पन्ना लाल शाक्य कॉलेज की डिग्री की बजाय पंक्चर की दुकान खोलने वाले अपने बयान पर कायम है। दरअसल, 14 जुलाई को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन कार्यक्रम में शाक्य ने मंच से छात्रों को नसीहत देते हुए कहा था- ‘मेरा आप सब स

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पन्ना लाल शाक्य ने जब ये बयान दिया तब उनके साथ मंच पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार, कलेक्टर सतेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा भी मौजूद थे। इसके अलावा शाक्य ने मोदी की एक पेड़ मां के नाम की मुहिम पर भी सवाल उठाए थे। शाक्य ने कहा था कि ‘पेड़ लगा दिया, रस्म अदा हो गई। कम से कम आदमी की ऊंचाई तक तो बढ़ाओ, तब पर्यावरण बचेगा।’

दैनिक भास्कर ने जब पन्ना लाल शाक्य से उनके दिए बयान को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ‘पंक्चर की दुकान खोलना क्या खराब बात है क्या? मैंने बोला है तो सच ही बोला है।’ पढ़िए विधायक से बातचीत

सवाल: आपने भाषण में जो बातें कही हैं, क्या उन पर कायम हैं?

जवाब: बड़े नेता बड़े हैं, हम थोड़े बडे़ हैं, हम तो छोटे नेता है और हम जिस स्तर के नेता है वैसी ही बात बोली है।

सवाल: आपने छात्रों को पंक्चर की दुकान खोलने की नसीहत क्यों दी?

जवाब: आदमी जब बेरोजगार घूम रहा है तो कुछ तो करे। क्या उसे कुछ नहीं करना चाहिए? वह माता- पिता के भरोसे कब तक रहेगा? खाली दिमाग शैतान का होता है। पंक्चर की दुकान कोई खराब चीज है क्या? मुझे आश्चर्य होता है कि लोगों ने पंक्चर की दुकान को क्या समझ लिया है। एक पंक्चर के 10 रु. लगते हैं। दिन भर में कोई 10 पंक्चर जोड़ेगा तो कितने कमा लेगा।

सवाल: आपने नालंदा विश्वविद्यालय की भी बात की थी कि 12 हजार छात्र 11 लोगों से अपने विश्वविद्यालय को नहीं बचा पाए?

जवाब: समाज को इस विषय में सोचना चाहिए कि ऐसी घटना क्यों हो गई। क्या आज भी महाविद्यालयों में ऐसे लोग नहीं पढ़ रहे क्या। मुझे उनके नाम लेने की आवश्यकता नहीं है। आज भी संस्थाओं में समाज-विरोधी, देश विरोधी गतिविधियां चल रही है। वे उन महाविद्यालयों को बचाएंगे क्या? उनकी सोच उसे नष्ट करना ही है।

सवाल: आपने पेड़ लगाने पर भी सवाल उठाए हैं?

जवाब: आपको मालूम नहीं है क्या कि सरकार ने सामाजिक वानिकी विभाग बनाया था। कहां है वो? क्या हुआ उसका? कितने पेड़ लगाए थे और कितने पेड़ उग गए। मैंने कुछ गलत कहा क्या?

सवाल: ऐसा क्यों कहा कि कॉलेज की डिग्री से कुछ होने वाला नहीं है?

जवाब: कॉलेज में पढ़ाई का स्तर गिरा है या नहीं गिरा है, ये तो मैं नहीं कह सकता। जिस कॉलेज का उद्घाटन किया है उसमें मैं भी पढ़ा हूं और अब उसमें सांइंस, हिस्ट्री की नई किताबें आ गई है।

पढ़िए विधायक जी का पूरा भाषण

‘ये जो महाविद्यालय है, शिक्षण संस्थाएं हैं, ये कोई कंप्रेसर हाउस नहीं हैं। जिसमें डिग्री के हिसाब से हवा भर दी जाए और वो सर्टिफिकेट लेकर चला जाए। वास्तव में शिक्षण संस्थाएं वे होती हैं, जिनके ढाई अक्षर पढ़े सो पंडित होय, पोती पढ़ पढ़ जगमुआ पंडित भया न कोय।’

‘एक विश्वविद्यालय वो था, जिसे नालंदा विश्वविद्यालय कहा जाता था। इस कॉलेज में तो 18 हजार विद्यार्थी हैं। नालंदा में 12 हजार थे और 1200 प्राचार्य थे। सिर्फ 11 लोगों ने नालंदा को जला दिया था। 12 हजार केवल ये सोचते रह गए कि मैं अकेला क्या करूंगा। हिंदुस्तान का ज्ञान खत्म हो गया। क्या हम ऐसी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ये प्रश्न वाचक चिन्ह है।’

उन्होंने आगे कहा कि ‘सबसे पहले उस पंचतत्व को बचाने की पूरी कोशिश करो, जिससे हमारा सब का शरीर बना है- जल, वायु, अग्नि, आकाश, पृथ्वी। आज पर्यावरण को लेकर पूरे हिंदुस्तान में चिंता है। पानी को लेकर पूरे हिंदुस्तान में चिंता है।

जो प्रदूषण फैला है,उससे भी सब लोग चिंतित हैं। कोई आगे बढ़कर काम करने के लिए तैयार नहीं है। पेड़ लगा दिया, रस्म अदा हो गई। कम से कम आदमी की ऊंचाई तक तो बढ़ाओ, तब पर्यावरण बचेगा।’ ‘अवैध रूप से नदी, नाला सब पर कब्जा हो गया है। सरकारी जमीन पर कब्जा हो गया है। चरनोई की जमीन पर कब्जा हो गया है। इतने भूखे हो गए हम? इस स्तर पर हमने पर्यावरण दूषित कर दिया है।”

विधायक ने कहा कि ” प्रधानमंत्री श्रेष्ठ महाविद्यालय का हम शुभारंभ कर रहे हैं। मेरा आप सब से निवेदन है कि केवल एक बोध वाक्य पकड़ लेना। ये कॉलेज की डिग्री से कुछ होने वाला नहीं है। मोटरसाइकिल की पंक्चर की दुकान खोल लेना, जिससे कम से कम अपना जीवन यापन चलता रहे।’

कॉलेज की डिग्री लेने के बाद। पेड़ लगाने का व्रत रखते हो तो हजारों पेड़ खुद लगाओ और खुद उन्हें सिंचित करो। हम यहां से पढ़ के निकल रहे हैं, पेड़ तो लगा दिया हमने, पानी डालने वाला कोई नहीं है तो कैसे बढ़ेगा। मेरा आपसे निवेदन है, जरा लौट कर आओ भारतीय दर्शन की तरफ। हम सभी का कल्याण हो जाएगा।”

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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