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Big administrative negligence came to light | बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई: इंदौर के जिस आश्रम में पांच बच्चों की मौत, पिछले साल गड़बड़ी में उस पर एफआईआर के आदेश हुए ​थे – Bhopal News

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इंदौर में युगपुरुष धाम आश्रम में 5 बच्चों की मौत के मामले में बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। राष्ट्रीय बाल आयोग ने नियम विरुद्ध चल रही 13 बाल संरक्षण संस्थाओं के खिलाफ महिला बाल विकास विभाग को फरवरी 2023 में एफआईआर के आदेश दिए थे। लेकिन लगातार र

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इन संस्थाओं में युगपुरुष धाम संस्था का नाम भी था। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भोपाल, इंदौर, दमोह, सागर सहित कई जिलों में नियम विरुद्ध चल रही 13 बाल संरक्षण संस्थाओं की लिस्ट विभाग को भेजी थी। आयोग ने तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी को कहा था कि इन संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन तत्काल खत्म कर इन पर एफआईआर की जाए। इसके बावजूद केस दर्ज नहीं किया गया।

13 में 8 मिशनरी संस्थाएं थीं
आयोग ने जिन 13 संस्थाओं की लिस्ट भेजी थी, उनमें भोपाल के एसओएस बालग्राम, बाल निकेतन ट्रस्ट, नित्य सेवा सोसायटी मिशनरी ऑफ चैरिटी, उज्जैन के सर्वधर्म आश्रम, सागर के महिला एवं बाल विकास समिति, सेंट फ्रांसिस सेवा धाम, कबीर मानव सेवा धर्म, जबलपुर के मिशनरी ऑफ चैरिटी, होशंगाबाद के जीवोदय सोसाइटी, इंदौर के युगपुरुष धाम और दमोह के सेंट्रल इंडिया क्रिश्चियन मिशन शामिल थे। इन पर रजिस्ट्रेशन न होने, सरकारी जमीं पर कब्जा करने, लड़के-लड़कियों को एक ही परिसर में रखने, आयु के अनुसार अलग-अलग रजिस्ट्रेशन न लेने जैसे आरोप थे। मिशनरी संस्थान पर धर्मांतरण के आरोप भी थे।

– राज्य बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह के अनुसार, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में गड़बड़ी मिलने पर धारा 42 में संस्था पर एफआईआर का भी प्रावधान है।

बाल आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले- विभाग की पीएस की भूमिका जांचेंगे

  • राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के निर्देश पर आयोग की सदस्य डॉ. दिव्या गुप्ता शनिवार को इंदौर में बच्चों की मौत के मामले की जांच करेंगी।
  • राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष कानूनगो के अनुसार, मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी की भूमिका की भी जांच करेंगेे। भास्कर ने रस्तोगी का पक्ष जानना चाहा तो सवाल सुनकर ही उन्होंने कॉल डिसकनेक्ट कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि ‘मैं कमेंट नहीं कर सकती, वर्तमान अधिकारी से जानकारी लें।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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