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a minor daughter in Indore able to donate liver to her father | इंदौर में नाबालिग बेटी के लिवर डोनेशन में पेंच: पिता की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टर बोले – लिवर ट्रांसप्लांट में देरी तो मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा – Indore News

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42 साल के पिता को नाबालिग बेटी अपना लिवर दे सकती है या नहीं इस पर पेंच फंसा हुआ है। पिता का लिवर फेल हो गया है और डॉक्टरों ने तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट के लिए कहा है। मामला हाई कोर्ट में है। पहले 18 जून की तारीख लगी थी। इस दिन सुनवाई के बाद कोर्ट ने व

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इस बीच पिता की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है। इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि लिवर ट्रांसप्लांट में ज्यादा देरी हुई तो मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा है। अधिकतम अगले दस दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दौरान यदि लिवर ट्रांसप्लांट हो जाता है तो बेहतर होगा। जानिए मामले में डॉक्टरों का क्या कहना है…

अगले 7 से 10 दिन महत्वपूर्ण

डॉक्टर का कहना है कि लिवर ट्रांसप्लांट करने का भी एक समय होता है। समय निकलने के बाद ट्रांसप्लांट की सक्सेस रेट कम हो जाता है। अगर मल्टी ऑर्गन फेलियर हो गया। पेशेंट बीमार होकर वेंटिलेटर पर आ गया। डायलिसिस पर आ गया। तब लिवर ट्रांसप्लांट करना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि लिवर ट्रांसप्लांट में सिर्फ लिवर बदला जाएगा।

लेकिन एक से ज्यादा बॉडी ऑर्गन (शरीर के अंग) फेल हो गए तो कैसे मैनेज होगा। अभी पेशेंट आईसीयू में आए है। सुधार हो रहा है, लेकिन आगे तबीयत और ज्यादा बिगड़े उसके पहले लिवर ट्रांसप्लांट करना होगा। अगले 7 से 10 दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। पेशेंट के आईसीयू से वार्ड में आते ही लिवर ट्रांसप्लांट करना है, क्योंकि आगे मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा ये किसी को नहीं पता है।

लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अब तबीयत ठीक होने का इंतजार

लिवर ट्रांसप्लांट की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है वहीं मरीज शिवनारायण की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। 17 जून को तबीयत खराब होने पर परिजन उन्हें विशेष जुपिटर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे और एडमिट किया। नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।

डॉक्टर अब उन्हें स्टेबल करने में जुटे हैं। उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। किडनी में प्रॉब्लम हो गई थी। सुधार होने में 2 से 3 दिन का समय लगेगा। डॉक्टर भी कोर्ट से लिवर ट्रांसप्लांट की परमिशन का इंतजार कर रहे हैं।

तबीयत में सुधार होने पर पेशेंट को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। वार्ड में आने के बाद 2 से 3 दिन में लिवर ट्रांसप्लांट की प्रोसेस की जाएगी। इस तरह अगर सब कुछ ठीक रहा और कोर्ट से परमिशन मिली तो अगले 5 से 7 दिन में लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी करने की बात डॉक्टर ने कही है। उनका कहना है कि अभी तक की प्लानिंग तो यही है।

यह पूरा मामला

दरअसल, 42 साल के पिता को नाबालिग बेटी अपना लिवर दे सकती है? इस सवाल पर इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। पिता ​​​​​​शिवनारायण बाथम 6 साल से ​लिवर की बीमारी से घिरे हैं। उन्हें डोनर नहीं मिला। अब डॉक्टर कह चुके हैं कि 10 से 15 दिन में लिवर ट्रांसप्लांट नहीं किया तो जान को खतरा है। यह सुनकर 17 साल 10 महीने की उनकी नाबालिग बेटी प्रीति सामने आई। उसने कहा कि मैं अपने पिता को लिवर देना चाहती हूं। लेकिन उम्र 2 महीने कम पड़ गई है। जिस पर डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट से मना कर दिया।

13 जून को हाई कोर्ट से लगाई गुहार

मामले में परिवार 13 जून को हाई कोर्ट पहुंच गया। दलील दी कि उम्र सिर्फ 2 महीने कम है तो दूसरी तरफ पिता के लिए अगले 7 से 10 दिन बहुत क्रिटिकल हैं। अदालत ने चीफ मेडिकल ऑफिसर से बाथम की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।

कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 18 जून दी थी। मंगलवार को कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए कल यानी 20 जून की तारीख तय की है। एडवोकेट नीलेश मनोरे ने बताया की हाई कोर्ट ने विशेष जुपिटर हॉस्पिटल से जवाब मांगा है। बाथम की मेडिकल रिपोर्ट भी फिलहाल पेश नहीं हुई है। इसके बाद ही आगे नाबालिग बेटी के लिवर डोनेट करने पर फैसला होगा।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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