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Saurai factory smoke ruins crops, makes breathing difficult | सौरई फैक्ट्री के धुएं से फसलें बर्बाद, सांस लेना मुश्किल: ग्रामीण बोले-कुओं का पानी हुआ दूषित, पीते ही आने लगती है उल्टी – Sagar News

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सागर की बंडा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सौरई में स्थित मध्यभारत एग्रो प्रोडक्टस लिमिटेड की फैक्ट्री से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन नर्क बन गया है। फैक्ट्री से उठने वाले धुएं और धूल से पानी दूषित हो रहा है। खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो

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जिस खेत में 80-90 क्विंटल का उत्पादन होता था। वह वर्तमान में 30-35 क्विंटल पर पहुंच गया है। फसलें लगाने के बाद प्रदूषण से वह मुरझा जाती है। प्रशासन से फैक्ट्री के प्रदूषण को लेकर कई बार शिकायत की गई। लेकिन अब तक कोई निराकरण नहीं किया गया है। नतीजा ग्रामों के लोग फैक्ट्री के विरोध में आ गए हैं। जल्द ही ग्रामीण फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने सौरई फैक्ट्री पहुंचकर वास्तविकता का जायजा लिया। सौरई पहुंचकर देखा तो फैक्ट्री से करीब 300 मीटर दूर रायायनिक गंध आ रही थी। कुछ ही देर यहां खड़े रहने पर घबराहट होने लगी। टीम करीब 4 घंटे तक क्षेत्र में रही। नतीजा आंखों में जलन जैसी स्थिति भी बनीं। फैक्ट्री के प्रदूषण को लेकर क्षेत्रीय कार्यालय मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सागर में बैठे अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने फैक्ट्री नियमों का पालन करते हुए संचालित होने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत करेगा तो जांच करा लेंगे। जांच के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

इन गांव की जमीन और लोग हो रहे प्रभावित
सौरई फैक्ट्री के खिलाफ बंडा में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें उन्होंने बताया कि फैक्ट्री के प्रदूषण से ग्राम सौरई, डिलाखेड़ी, फतेहपुर, मोनपुर, कंदारी, पनारी, काटी, सलैया, हनौता पटकुई, छापरी, झागरी, पिपरिया चौदा, बमूरा, परासिया, रीछईसागर, चौका, बिजरी, जगथर, बिजपुरी, गडर, आमलपुर, गनयारी समेत बंडा नगर प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने 15 दिन में समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

सबसे ज्यादा प्रभावित गांव सौरई, बीलाखेड़ी, काटी, फतेहपुर, मौनपुर सहित 15 गांव हैं। दो दिन पहले पहले एसडीएम के नाम तहसीलदार बंडा को ज्ञापन दिया। यहां की करीब 5 हजार जनसंख्या प्रभावित हैं। श्वास संबंधी समस्या होती है। गंध से घुटन होने लगती है। आंखों में जलन होती है।

फैक्ट्री के चिमनी से उठता हुआ धुआं।

फैक्ट्री के चिमनी से उठता हुआ धुआं।

पहले बेचते थे पानी, अब घर के पीने खरीदना पड़ रहा
फैक्ट्री के पास स्थित ग्राम डीलाखेड़ी के रहने वाले किसान राममिलन सिंह ठाकुर ने बताया कि कई सालों से खेती करते आ रहे हैं। लेकिन फैक्ट्री शुरू होने के बाद लगातार हो रहे प्रदूषण से फसलें बर्बाद होने लगी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जिस खेत में 80-90 क्विंटल फसल का उत्पादन होता था। अब वहां 30-35 क्विंटल फसल का उत्पादन हो रहा है। वहीं फैक्ट्री के प्रदूषण से कुओं का पानी दूषित हो गया है। पहले मैं खुद बंडा में पानी बेचता था। लेकिन अब स्थिति यह है कि मुझे पीने के लिए बंडा से पानी खरीदना पड़ता है। फैक्ट्री से उठने वाला रासायनिक धुआं और अवशिष्ट से आसपास के क्षेत्र के जल स्त्रोत दूषित हो रहे हैं। आंखों में जलन हो रही है। पिछले दिनों बेटे की आंखों की जांच कराई थी। जांच में डॉक्टर ने इंफेक्स होना बताया था। फैक्ट्री के कारण लोगों का घर में रहना मुश्किल हो रहा है।

फैक्ट्री से निकालने वाला पानी प्रदूषित हो गया है। इसकी रोकथाम के उपाय नहीं हुए हैं।

फैक्ट्री से निकालने वाला पानी प्रदूषित हो गया है। इसकी रोकथाम के उपाय नहीं हुए हैं।

जांच में 75% फसलों का नुकसान बताया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला
किसान राहुल लोधी ने बताया कि फैक्ट्री के प्रदूषण से फसलें बर्बाद हो रही हैं और पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं। वर्ष 2022 में प्रदूषण बोर्ड और कृषि विभाग में प्रदूषण से फसलें खराब होने की शिकायत की थी। शिकायत के बाद अधिकारियों ने मौके पर आकर निरीक्षण किया था। उन्होंने अपनी जांच में 75 प्रतिशत नुकसान होना बताया था। लेकिन अब तक न तो प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई प्रयास किए गए हैं और न ही फसलों का नुकसान होने का मुआवजा दिया गया है।

इस तरह मुरझा जाती हैं फसलें।

इस तरह मुरझा जाती हैं फसलें।

रात में छत पर बैठ नहीं पाते और न सो पाते हैं
किसान राहुल ने बताया कि दिन में एक या दो चिमनी ही चलाई जाती है। वहीं रात होते ही फैक्ट्री की करीब सात चिमनी शुरू कर दी जाती है। जिससे आसपास के क्षेत्र में रासायनिक धुआं फैलता है। धुआं से आने वाली रासायनिक गंध से लोग घरों के बाहर खड़े नहीं हो पाते हैं। इतना ही नहीं यदि लाइट बंद हो जाए तो परिवार के लोग छत पर आकर नहीं बैठ सकते हैं। यदि बैठते हैं तो उन्हें उल्टियां होने लगती हैं। फैक्ट्री के प्रदूषण से कई लोग बीमार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा श्वास संबंधी बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। कुछ लोग कैंसर से भी पीड़ित है। महिलाओं को भी कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण विभाग से लेकर कलेक्टर को भी मामले की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन कोई निराकरण नहीं हो रहा है।

वर्ष 2022 में जांच प्रतिवेदन में कृषि विभाग ने बताया था फसलों को नुकसान।

वर्ष 2022 में जांच प्रतिवेदन में कृषि विभाग ने बताया था फसलों को नुकसान।

आंखों में मिर्ची की तरह लगता है धुआं
फैक्ट्री के पास रहने वाले ग्राम सौरई निवासी कल्लू अहिरवार ने बताया कि फैक्ट्री के कारण परिवार का जीवन दुश्वार हो गया है। प्रदूषण फैल रहा है। धुआं और धूल उड़ती है। धुआं से आंखों में ऐसा लगता है, जैसे मिर्ची लग रही हो। परिवार के लोग बीमार हो रहे हैं। दवाइयां कराते रहते हैं। वहीं सौरई निवासी फूल बाई ने बताया कि फैक्ट्री से आने वाली गंध से सांस लेना मुश्किल होता है। अक्सर बीमार पड़ जाती हूं। घर का पानी दूषित हो जाता है। घर के बोर का पानी भरने के कुछ समय बाद ही दूषित हो जाता है। ऐसे में गांव से पानी लाना पड़ता है। नल-जल योजना शुरू होने के बाद पानी की किल्लत खत्म हुई है। वरना पांच किमी दूर से भी पानी लाना पड़ता था।

फैक्ट्री के आसपास के खेतों में बने कुओं में पानी हुआ दूषित।

फैक्ट्री के आसपास के खेतों में बने कुओं में पानी हुआ दूषित।

फलदार पेडों में नहीं लगे फल, कुछ मुरझा गए
सौरई फैक्ट्री के आसपास लगे फलदार पेड़ों में फल नहीं लग रहे हैं। आम के पेड़ों की स्थिति देखें तो उनमें एक भी फल नहीं लगा है। वहीं कुछ पेड़ मुरझा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के प्रदूषण के दुष्परिणाम के कारण ही फलदार पेड़ों में फल नहीं लगते हैं। इसके अलावा आसपास के कुओं में गर्मी के कारण पानी सूख गया है। लेकिन जितने भी कुओं में पानी है उनका पानी दूषित है। कुछ कुओं में सफेद गंदा पानी भरा है तो कुछ का पानी हरा हो रहा है। पानी ऐसा है कि लोग इसे पीने में उपयोग नहीं कर सकते हैं।

सौरई फैक्ट्री में ये कच्चा माल पहुंचता है
बंडा के ग्राम सौरई में करीब 23.370 हेक्टेयर भूमि पर बनी मध्यभारत एग्रो प्रोडक्टस लिमिटेड की फैक्ट्री में लो ग्रेड रॉक फास्फेट, सल्फर, जिंक, आयरन डस्ट, सल्फ्यूरिक एसिड, कामन साल्ट, बाम्साइड, हाइड्रोन लाइन, हाइड्रोक्लोरिक एसिड आदि कच्चा माल पहुंचता है। इनका उपयोग केमिकल फर्टिलाइजर और उनके विभिन्न प्रोडक्ट बनाने में उपयोग किया जाता है। फैक्ट्री में सिंगल सुपर फास्फेट, दानेदार एसएससी, ट्रिपल सुपर फास्फेट, सिंथेटिक जिपसम, फास्फोरिक एसिड, राक फास्फेट बेनिफिकेशन, सोडियम सिलिका फ्लोराइड जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड एक रजिस्टर कंपनी है। जिसका मुख्यालय भीलवाड़ा राजस्थान में है। कंपनी मध्यप्रदेश समेत राजस्थान में उध्यमशील है। सागर, छतरपुर में अधिक मात्रा में रॉक फास्फेट पाया जाता है। इसलिए कंपनी ने सौरई इंडस्ट्रीयल एरिया जिला सागर में एक औद्योगिक इकाई लगाई है। जिसमें केमिकल फर्टिलाइजर और राक फास्फेट और वेनिफिकेशन प्लांट की स्थापना की गई है। उक्त कंपनी के मेनेजिंग डॉयरेक्टर पंकज ओस्टवाल हैं।

नियमानुसार हो रहा फैक्ट्री का संचालन
मध्यभारत एग्रो प्रोडक्टस लिमिटेड की फैक्ट्री के एचआर हेड आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामीणों के फैक्ट्री से प्रदूषण उठने वाले आरोप निराधार हैं। फैक्ट्री का संचालन प्रदूषण विभाग और शासन के नियमों का पालन करते हुए किया जा रहा है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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