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अगर आप जनजातीय खानों का शौक रखते हैं तो आप 6 मई से होने जा रहे मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। कई कार्यक्रमों के अलावा यहां पर देश के कुछ खास प्रदेशों के जनजातीय फूड भी सर्व किए जाएंगे। निदेशक, जनजातीय ल
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यह डिशेज रहेंगी खास
जनजातीय संग्रहालय में होने वाले इस फूड फेस्टिवल में खास तौर पर उड़ीसा की खास महुआ पीठा जिसे आम भाषा में पेठा भी कहा जाता है। सर्व किया जाएगा। इसके अलावा मणिपुर की चहऊ जो कि चावल की खीर होती है। गुजरात की करी खिचड़ी और बाजरे का रोटला आदि सर्व किया जाएगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश के कई ट्राइब्स के खाने भी यहां मौजूद रहेंगे। जिसमें मक्का की रोटी, चटनी, दाल पतिया, महुआ के जलेबी, महुआ के लड्डी, महुआ के गुलाब जामुन, महुआ की पूडी़ चटनी आदि सर्व की जाएगी।

महुआ की जलेबी।
300 कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
इस पांच दिवसीय समारोह में फूड फेस्टिवल के अलावा, कठपुतली डांस और जनजातीय नृत्य प्रस्तुतियां भी शामिल रहेंगी। इसमें पहली बार सांस्कृतिक विभाग द्वारा बैंड तैयार किया गया है, जिसकी तैयारियां संग्रहालय के सभागार में शुरू हो गई है। इस बैंड में निमाड़, बघेलखंड और बुंदेलखंड के गायक अपनी तैयारियां इन दिनों संग्रहालय में कर रहे हैं। इस समारोह में पांच दिन में 300 कलाकार अलग-अलग दिन प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा यहां शिल्प बाजार भी लगेगा। वहीं कठपुतली डांस का भी आयोजन किया जाएगा।
यह है 5 दिन का शेड्यूल
- 6 जून :मालवा का लोक संगीत पर आधारित गाने का कार्यक्रम होगा इसमें उज्जैन के कलाकार स्वाति उखले और अजय गांगोलिया एवं साथी कलाकारों की बैंड प्रस्तुति होगी। इसी दिन रामचंद्र सिंह के निर्देशन में ‘वीरांगना रानी दुर्गावती’ की प्रस्तुति होगी।
- 7 जून: इसमें बुंदेलखंड के कलाकार लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा शाम को अतिथि राज्य गुजरात के कलाकारों का सिद्धीधमाल, होली हुडोरास, मणियारोरास और ढोलोराणो-टिटोडो नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।
- 8 जून: कार्यक्रम की शुरुआत बघेलखंड लोक संगीत की प्रस्तुति होगी। इसके बाद अतिथि राज्य में ओडिसा के कलाकारों का छाऊ, शंखध्वनि, गोटीपुआ और पाइका नृत्य होगा।
- 9 जून :इस दिन गायन की शुरुआत निमाड़ गायन से होगी। इसके बाद अतिथि राज्य तेलंगाना के कलाकारों का ओगूढोलू, कोमूकोया, बोनालू और लांबड़ी नृत्य होगा।
- 10 जून : इस दिन मणिपुर राज्य का लोक संगीत, लाई हरोबा, थांग-टा, पुंग चोलम, ढोल-ढोलक चोलाम, बसंत रास की प्रस्तुतियां देंगे।

जनजातीय संग्रहालय।
इनकी होगी स्थापना
जनजातीय समुदाय की जीवन शैली को समझने प्रदेश की सात प्रमुख जनजातियों क्रमशः गोंड, भील, बैगा, कोरकू, भारिया, सहरिया और कोल के सात आवास बनाए गए हैं। इन आवासों का शुभारंभ 6 जून को किया जाएगा। वहीं संग्रहालय में 2 टन लोहे से गोंड समुदाय का वाद्य यंत्र ‘बाना’ तैयार हो गया है। 35 फीट लंबा यह वाद्य यंत्र जनजातीय संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जा चुका है, जिसका शुभारंभ स्थापना दिवस पर किया जाएगा।
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