Home मध्यप्रदेश Indore: Tiffins Scattered In Harda’s Firecracker Factory, Torn Clothes Were Showing The...

Indore: Tiffins Scattered In Harda’s Firecracker Factory, Torn Clothes Were Showing The Scene Of Devastation. – Amar Ujala Hindi News Live

56
0

[ad_1]

Indore: Tiffins scattered in Harda's firecracker factory, torn clothes were showing the scene of devastation.

Google search engine

फैक्ट्री में टिफिन के अलावा कुछ भी साबूत नहीं बचा।
– फोटो : amar ujala digital

विस्तार


धुआं उगलता बारुद सुलग रहा है… मलबे से उड़ती राख के बीच कुछ टिफिन खुले पड़े हैं… बिखरी दाल, सूखी रोटियां और सब्जी… लेकिन कोई खाने वाला नहीं रहा। जिनके लिए यह टिफिन आए थे, वह जिंदा भी है या नहीं, यह प्रशासन की लिस्ट में खोजना पड़ रहा है। सब बर्बाद हो चुका है। दो-चार सौ रुपये की खातिर मजदूरी करने वाले अब कफन के नाम पर चंद कपड़ों में लिपटे पड़े हैं…

यह तस्वीर है हरदा की उस सोमेश पटाखा फैक्टरी की, जिसे मंगलवार को हुए ब्लास्ट ने बर्बादी के मंजर में बदल दिया। न केवल पटाखा फैक्टरी को नुकसान पहुंचा, बल्कि आसपास रहने वाले करीब 50 परिवार बेघर हो गए। आग और विस्फोटों के कारण उनके मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। इन गरीबों ने पाई-पाई जोड़कर अपनी दुनिया बसाई थी, जो चंद रुपयों के लालच के सामने छोटी पड़ गई। 

नेहा ने खो दिए माता-पिता

फैक्टरी के पास ही नेहा चंदेल रहती है। नेहा ने बताया, “मैं काॅलेज जा रही थी, तभी एक धमाका हुआ। दो बहनें और माता-पिता घर से भागे। घर में दादाजी थे। उन्हें चलने में तकलीफ है। मेरे माता-पिता उन्हें लेने घर गए। दादाजी को तो उन्होंने सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन दूसरे धमाके के बाद पत्थरों की बारिश होने लगी। बड़े-बड़े पत्थर माता-पिता के सिर पर गिरे। दोनों की मौत हो चुकी है। नेहा ने कहा कि हम अनाथ हो गए। रहने को घर भी नहीं बचा। माता-पिता की अर्थी भी दूसरों के घर से उठाना पड़ी।”

फोन कर बिजली बंद कराई, नहीं तो करंट से लोग मरते

फैक्टरी के पास की बस्ती में बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारी इशहाक खान भी रहते हैं। वे हादसे के वक्त घर के पास थे। उन्होंने कहा, “धमाके के बाद बिजली के पोल झुक गए। तार जमीन तक आ गए थे। मैंने तत्काल फोन लगाकर बिजली सप्लाई बंद कराई, नहीं तो भगदड़ के दौरान लोग बिजली के तारों के करंट से भी मरते।”

पत्थरों की बरसात हो रही थी

प्रत्यक्षदर्शी लोकेश कलम ने बताया- “धमाके के बाद पत्थरों की बरसात हो रही थी। ज्यादातर लोग पत्थर लगने से घायल हुए है। खेतों में शवों के टुकड़े थे। एक बच्ची का हाथ कंधे से अलग हो गया था। फैक्ट्री की लोहे की छत के नुकिले टुकड़े दूर-दूर तक उड़े। आसपास के खेतों मे लगे पेड़ और फसलें तक जल गई।” 

[ad_2]

Source link

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here