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Mahakal Temple Gopal Temple Janmashtami on 6th September in Sandipani | इस्कॉन मंदिर में 7 सितंबर को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनेगा

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उज्जैन34 मिनट पहले

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भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी शुरू हो गई है। उज्जैन में जन्माष्टमी का पर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर, बड़े गोपाल मंदिर और सांदीपनि आश्रम में 6 सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं, आश्रम में 7 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। इस्कॉन मंदिर में 7 सितंबर की रात भगवान का जन्मोत्सव मनाते हुए अभिषेक पूजन कर आरती की जाएगी।

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है। भगवान के जन्मोत्सव मनाने के लिए श्रीकृष्ण मंदिरों में तैयारी शुरू हो गई है। श्री महाकालेश्वर मंदिर, बड़ा गोपाल मंदिर और सांदीपनि आश्रम पर जन्माष्टमी 6 सितंबर को मनाया जाएगा। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष गुरू ने बताया कि 6 सितंबर को महाकाल मंदिर के नैवेद्य कक्ष में संध्या पूजन आरती के बाद भगवान लड्डू गोपाल का पूजन-अर्चन कर भोग लगाया जाएगा।

वहीं, मंगलनाथ मार्ग स्थित श्री सांदीपनि आश्रम में 6 सितंबर को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन बड़े गोपाल मंदिर पर भी जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिर में संध्या के समय पवमान पूजन होगा। माता यशोदा की झांकी सजेगी। रात्रि में पट खुलेगे और आरती होगी। इधर, इस्कॉन मंदिर के पीआरओ राघव पंडितदास ने बताया कि इस्कॉन मंदिर में 7 सितंबर को लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव रात्रि में मनाया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में जन्माष्टमी पर अन्य आयोजन भी होगें।

सांदीपनि आश्रम में भुट्टे और नींबू से होगी सज्जा

सांदीपनि आश्रम जहां भगवान कृष्ण ने महर्षि सांदीपनि गुरु से 64 कला सीखी थीं। उस स्थान पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा। पुजारी रूपम व्यास ने बताया भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 6 सितंबर को श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मंदिर में भुट्टे और नींबू एवं फूलों से सज्जा की जाएगी। रात में गोपालजी का अभिषेक-पूजन कर रात 12 बजे भगवान की महा आरती की जाएगी और अगले दिन 7 सितंबर को नंद महोत्सव का आयोजन होगा।

6 सितंबर को जन्माष्टमी पर्व शास्त्रागत रहेगा

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है इस बार 6 सितंबर बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी युक्त मध्य रात्रि में विशेष मानी जाती है और अष्टमी तिथि का भी योग बुधवार की मध्य रात्रि में रहेगा। इस दृष्टि से 6 सितंबर बुधवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाना शास्त्रागत रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में श्री कृष्ण जन्माष्टमी

पंचांग की गणना के अनुसार देखे तो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार का दिन एवं मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र रहने से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन चंद्रमा अपने उच्च अंश में वृषभ राशि के साथ रहेंगे। चंद्र उच्च अंश में होकर केंद्र त्रिकोण को साधेंगे। इस दृष्टि से यह योग विशेष रूप से पूजन का फल देने वाला बताया जाता है। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग में विशिष्ट पूजन, साधना, आराधना की जा सकती है।

भगवान की श्रृंगार सामग्री से सजी दुकानें

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के लिए बाजार में रौनक दिखाई देने लगी है। मुख्य बाजार में भगवान श्री कृष्ण की पोशाखें व लड्डू गोपाल की सुंदर प्रतिमाएं व अन्य पूजन सामग्री से दुकानें सज गई है। लड्डू गोपाल के लिए इस बार भी कई तरह की पोशाखें व श्रृंगार सामग्री आई है। शहर की भक्ति भंडार व पूजन सामग्री की दुकानों पर जन्माष्टमी पर्व के लिए मथुरा, वृंदावन से श्रृंगार सामग्री लाई जाती है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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