छतरपुर। प्रधानमंत्री के पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को सिर-आंखों पर बिठाने की सियासी होड़ में शनिवार को मध्य प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार का एक अनोखा और बेहद कैमरा-फ्रेंडली रूप देखने को मिला। मंत्री जी अचानक अपनी चमचमाती सरकारी गाड़ियों के भारी-भरकम तामझाम और वीआईपी सुरक्षा घेरे को छोड़कर ई-स्कूटी और ई-रिक्शा पर सवार नजर आए। उन्होंने भाजपा कार्यालय से छतरपुर रेलवे स्टेशन तक का चंद किलोमीटर का सफर आम जनता की तरह ई-रिक्शा में बैठकर तय किया और लगे हाथ जनता को ईंधन बचाने व प्रदूषण कम करने का मुफ्त ज्ञान भी दे डाला।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि सादगी और पर्यावरण प्रेम की यह संक्रामक लहर केवल राज्यमंत्री तक ही सीमित नहीं रही। छतरपुर के ही एक अन्य मोर्चे पर केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार भी शनिवार को कभी ई-रिक्शा तो कभी खचाखच भरी आम बसों की सवारी करते हुए कैमरों में कैद हुए। हालांकि, राजनैतिक पंडितों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री महोदय के लिए यह कोई नई बात नहीं है, वे पहले भी सैकड़ों बार ऐसे सादगी भरे प्रयोग कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर मंत्रियों का यह इको-फ्रेंडली अवतार भले ही खूब सुर्खियां बटोर रहा हो और समर्थक इसे एक क्रांतिकारी संदेश बता रहे हों, लेकिन जमीन पर खड़ी जनता इस तमाशे को अलग चश्मे से देख रही है।
सराहनीय संदेश या कैमरे के सामने का ग्रीन प्रोपेगैंडा?
जनता के बीच दबी जुबान में नहीं, बल्कि अब खुलकर यह चर्चा शुरू हो गई है कि यह वाकई पर्यावरण के प्रति जागा कोई वास्तविक प्रेम है या फिर कैमरों के लेंस को देखकर की जाने वाली पारंपरिक प्रतीकात्मक राजनीति। बुंदेलखंड की समझदार जनता अब सीधा और तीखा सवाल पूछ रही है कि स्टेशन और बस स्टैंड तक का यह महज दो किलोमीटर का सफर तो ई-रिक्शा से बड़े आराम से कट गया और सुर्खियां भी बटोर ली गईं, लेकिन क्या मंत्रियों के दौरों में चलने वाले लंबे-चौड़े आधिकारिक वीआईपी काफिलों और उनके पीछे बेवजह दौड़ने वाली दर्जनों डीजल गाड़ियों के ईंधन पर भी कभी ऐसी ही लगाम लगेगी? क्या मंत्रियों के गृह नगर से लेकर भोपाल और दिल्ली तक के सफर भी इसी सादगी से तय होंगे?
बहरहाल, वजह चाहे जो भी हो—सच्चा पर्यावरण प्रेम या फिर राजनैतिक पीआर स्टंट—मंत्रियों की इस चंद मिनटों की सवारी से कम से कम कुछ देर के लिए ही सही, छतरपुर की सड़कों को वीआईपी हूटरों के शोर और सरकारी गाड़ियों के काले धुएं से राहत जरूर मिल गई।










