छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापन को लेकर ढोढन गांव आज युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। लेकिन इस खूनी संघर्ष और चीख-पुकार के बीच मानवता और वीरता का एक ऐसा अध्याय लिखा गया, जो बुंदेलखंड के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। यह कहानी है अपर पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले और जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया के अदम्य साहस की, जिन्होंने मौत के साये में खड़े अपने एक बुजुर्ग साथी के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
मौत का तांडव और अधिकारियों का निर्णय
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान अचानक शुरू हुए भीषण पथराव ने स्थिति को भयावह बना दिया। अधिकारी अपनी गाड़ियों में सुरक्षित निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी ASP आदित्य पटले और CEO नमः शिवाय अरजरिया की नजर पीछे छूट गए एक उम्रदराज पुलिसकर्मी पर पड़ी। वह कर्मचारी उम्र और दहशत के कारण भागने में असमर्थ था और पत्थरबाजों का आसान निशाना बन सकता था। अपनी जान बचाने के बजाय, इन दोनों अधिकारियों ने वीरता दिखाते हुए धधकते आक्रोश के बीच अपनी गाड़ी रुकवा दी और उस बुजुर्ग कर्मचारी को गाड़ी के भीतर खींचा गया, वह खौफ और शारीरिक दबाव के कारण माइनर हार्ट अटैक का शिकार होकर अचेत हो गया। चारों तरफ से पत्थरों की बारिश हो रही थी, गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो रहे थे, लेकिन अधिकारियों का ध्यान केवल अपने साथी की उखड़ती सांसों पर था। बिना एक पल गँवाए, अधिकारियों ने वहीं CPR थेरेपी देना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि —बाहर हिंसा का तांडव था और भीतर दो वरिष्ठ अधिकारी एक डूबती जिंदगी को संजीवनी दे रहे थे।
वरिष्ठ अधिकारियों के सामने जहाँ एक तरफ जनता का आक्रोश था, वहीं दूसरी तरफ खाकी और प्रशासन का वह संवेदनशील चेहरा था जो अपने मातहतों के लिए ढाल बनकर खड़ा हो गया। यह घटना साबित करती है कि संकट के समय असली नायक वही है जो अपनी सुरक्षा से पहले अपने साथी की सांसों की कीमत समझता है। ढोढन की धरती आज इस वीरता और त्याग की साक्षी बनी है। हालांकि ASP आदित्य पटले और जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ जिससे पुलिसकर्मी का नाम पता नहीं चल सका.. निश्चित ही आज जहाँ पत्थर बरस रहे थे, वहाँ ये अफसर फरिश्ते बनकर खड़े थे… सलाम है ऐसे जज्बे को!










