छतरपुर। सरानी निवासी सुरेंद्र सिंह परमार की संदिग्ध मौत का मामला एक महीने बाद फिर सुलग उठा है। पुलिसिया तफ्तीश की कछुआ चाल और परिजनों के असंतोष ने शुक्रवार को उग्र रूप ले लिया। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर सिस्टम की चूलें हिला दीं। न्याय की गुहार लगाते प्रदर्शनकारियों ने दफ्तर के बाहर ही जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया।
इंसाफ में देरी, तो घेराव की तैयारी
प्रदर्शन के दौरान करणी सेना ने सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि 4 अप्रैल की घटना के बाद से पुलिस केवल फाइलों का पेट भर रही है। प्रदेश अध्यक्ष ने दोटूक कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं मिलता और सीसीटीवी फुटेज के साथ हर संदिग्ध पहलू की परतें नहीं खुलतीं, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। हालांकि, पुलिस द्वारा दिखाए गए साक्ष्यों में क्षेत्रीय विधायक की भूमिका अब तक स्पष्ट नहीं हुई है, और अनुराग सिंह ने फुटेज देखने के बाद साफ़ कहा की विधायक की कोई गलती नजर नहीं आती हैं लेकिन संगठन ने मांग की है कि उस दुकानदार पर भी कड़ी कार्रवाई हो जिसने बिना किसी सुरक्षा मानक के जहरीला पदार्थ बेचा।
प्रशासनिक आश्वासन और अल्टीमेटम
भारी विरोध को देखते हुए एडिशनल एसपी आदित्य पटले ने मोर्चा संभाला और परिजनों को आश्वस्त किया कि मृतक की पत्नी के बयान दर्ज कर हर एंगल से दोबारा बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून के हाथ दोषियों तक जरूर पहुँचेंगे, चाहे वे कोई भी हों। करणी सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि यह महज एक सांकेतिक विरोध था; यदि अब भी न्याय की राह में रोड़े अटकाए गए, तो यह चिंगारी पूरे जिले में आंदोलन की आग बनकर फैलेगी। फिलहाल, पुलिस के आश्वासन पर प्रदर्शन खत्म हुआ है, लेकिन सरानी गांव का तनाव और इंसाफ की उम्मीद अब भी बरकरार है।









