छतरपुर। जिले की चरमराती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के बीच छतरपुर पुलिस अब इमेज मेकिंग के नए पैंतरे आज़मा रही है। एसपी अगम जैन सहित जिले के तमाम थाना प्रभारियों और एसडीओपी द्वारा गांवों में किया गया जनसंवाद और रात्रि विश्राम इन दिनों चर्चाओं में तो है, लेकिन यह चर्चा सराहना से ज्यादा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को लेकर है।
ग्राउंड जीरो पर समाधान या सिर्फ फोटो सेशन?
एसपी अगम जैन और एडिशनल एसपी ने ओरछा रोड थाना क्षेत्र के मुकरबा गांव में पूरी रात बिताई। पुलिस का दावा है कि इसका उद्देश्य जनता से तालमेल बढ़ाना है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह केवल एक सुनियोजित पीआर स्टंट है। जिले में जब सरेराह लूट, चोरी, फर्जी एफआईआर और अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा हो, तब पुलिस का पूरा अमला थानों को छोड़कर गांवों में बिस्तर बिछाए बैठा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जनता के बीच जाने का नाटक वही विभाग कर रहा है, जिसके गेट पर खड़ा संतरी एक आम आदमी को अंदर घुसने से पहले दस बार घुड़कता है। जब थाने में फरियादी की सुनवाई नहीं होती, तब साहबों का गांव में सोना केवल एक प्रतीकात्मक ड्रामा नजर आता है। अगर इसी तरह गांव-गांव जाकर सोने से अपराध कम होते, तो सरकार को थानों और जेलों की जगह विश्राम गृह खुलवा देने चाहिए। वहीं गाँव के शैलेन्द्र कौशिक ने बताया कि जबसे ट्रेनी आईपीएस लेखराज मीणा ने ओरछा ठाणे का प्रभार संभाला है तब से थाने में राजनैतिक दखलंदाजी दूर हुई है और पहले से बहुत अच्छी व्यवस्था है।
समस्याओं का अंबार, पर कार्रवाई शून्य
निश्चित ही ग्रामीणों ने जनसंवाद के नाम पर अपनी पीड़ा तो खुलकर रखी, और साहब ने बड़ी तसल्ली से सुना भी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन समस्याओं का समाधान कागजों से बाहर निकल पाएगा? पुलिसिया तंत्र की सुस्ती का आलम यह है कि मुकरबा जैसे क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की सूचनाएं पहले भी दी जा चुकी हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर केवल ढाक के तीन पात ही रहे हैं। हाँ इस बार जरूर एसपी साहब ने भरोसा दिया है कि अब रेगुलर गस्त होगी।









