छतरपुर। जिला पुलिस ने एक बार फिर अपनी अद्भुत कार्यक्षमता का परिचय दिया है। कोतवाली पुलिस ने ग्राम कांटी के पास एक ऐसी विशालकाय अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जिसका तामझाम देखकर लग रहा था कि यहाँ से पूरे बुंदेलखंड को हथियारों की सप्लाई होती होगी, लेकिन जब माल गिना गया तो पुलिस की किस्मत और बरामदगी दोनों ही फूटा हुआ कारतूस निकलीं।
कुनबा जुटा भारी, पर कट्टे मिले सिर्फ तीन!
इस ऐतिहासिक रेड में पुलिस ने संसाधनों की ऐसी लिस्ट जारी की है जिसे पढ़कर लगे कि टाटा-बिरला की कोई स्टील यूनिट पकड़ ली गई हो। धुकनी, बांक, निहारी, ग्लैंडर, ड्रिल मशीन, 18 तरह के वर्मा और न जाने कितनी रेतियां… इतना सामान कि एक ट्रक छोटा पड़ जाए! लेकिन इस पूरी औद्योगिक क्रांति के बीच से तैयार माल के नाम पर निकले केवल तीन अदद कट्टे।
इतनी बड़ी टीम, इतने आला अधिकारी और बरामदगी ऐसी कि एक मोहल्ले के बदमाश भी हंस पड़ें। शायद अपराधी वर्क फ्रॉम होम के चक्कर में उत्पादन धीमा कर चुके थे या फिर पुलिस के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे कि साहब आएं तो बस तीन कट्टे दिखाकर ही छुट्टी पा लें।
टीम इंडिया जैसी फील्डिंग, नतीजा शून्य!
इस कार्यवाही में मार्गदर्शन देने वालों और भूमिका निभाने वालों की सूची इतनी लंबी है कि अगर एक-एक पुलिसकर्मी एक-एक पुर्जा भी उठाता, तो भी दो-चार पेचकस बच जाते। एडिशनल एसपी, सीएसपी, पांच-छह थानों के प्रभारी और साइबर सेल की पूरी फौज… मानो दाऊद इब्राहिम को पकड़ने की घेराबंदी हो रही हो।
क्या यह सिर्फ आंकड़ा पूर्ति है?
सवाल यह उठता है कि क्या इतनी बड़ी फैक्ट्री सिर्फ तीन कट्टे बनाने के लिए चल रही थी? या फिर असली माल पुलिस के पहुंचने से पहले ही नदारद हो गया? जब जिले के सारे दिग्गज अधिकारी एक साथ फोटो खिंचवा रहे हों, तो कम से कम बरामदगी का आंकड़ा तो इतना होता कि साहब की वर्दी की चमक फीकी न पड़ती।
बधाई हो छतरपुर पुलिस को! इतनी मेहनत से पहाड़ खोदा और अंत में तीन कट्टों वाली चुहिया निकली। अब देखना यह है कि फरार आरोपी रोहित राजा के पकड़े जाने पर पुलिस को चौथा कट्टा मिलता है या सिर्फ एक और प्रेस नोट!









