लालू रैकवार/ अतुल्य भास्कर
भगवां : कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो गरीबी की दीवार भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के छोटे से गाँव भगवां के अनिकेत साहू ने SSC GD परीक्षा में सफलता हासिल कर CISF में चयनित होकर इसे सच कर दिखाया है। यह जीत केवल एक नौकरी की नहीं, बल्कि एक माँ के वर्षों के संघर्ष और तपस्या की है।

संघर्ष की नींव पर खड़ा हुआ सपना
अनिकेत के घर की स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। पिता मानसिक अस्वस्थता के कारण घर सँभालने में असमर्थ थे। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी माँ के कंधों पर आ गई। माँ ने हार नहीं मानी और सालों तक हाट-बाजारों में मनिहारी और चूड़ियाँ बेचकर बच्चों का पेट पाला और अनिकेत की पढ़ाई जारी रखी।
मामा का साथ और अनिकेत की जिद
जब आर्थिक तंगी सपनों के आगे दीवार बनने लगी, तब अनिकेत के मामा ने सहारा दिया और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। अनिकेत ने भी दिन-रात एक कर दिए। कई बार असफल हुए, कभी मेडिकल में तो कभी फिजिकल में बाहर हुए, लेकिन हर बार गिरकर उन्होंने सिर्फ अपनी माँ के छालों भरे हाथों को देखा और फिर से खड़े हो गए।
आँसुओं की विदाई, गर्व का आगमन
जैसे ही चयन की खबर आई, भगवां नगर खुशी से झूम उठा। माँ की आँखों से बहने वाले आँसू जो कभी लाचारी के थे, आज गर्व में बदल गए। जिस माँ ने चूड़ियाँ बेचकर बेटे को पढ़ाया, आज उसी बेटे ने माँ को देश सेवा की वर्दी का सम्मान दिया।
“यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए सबक है कि हालात चाहे कितने भी विपरीत हों, मेहनत और ईमानदारी से किस्मत की लकीरें बदली जा सकती हैं।”










