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बुंदेलखंड की बदलेगी तस्वीर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 90% मुआवजा वितरण पूरा -कलेक्टर पार्थ जैसवाल

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केन-बेतवा प्रभावितों को 267 करोड़ भूमि और 385 करोड़ पुनर्वास अनुदान का भुगतान
3080 परिवारों को मिला पुनर्वास लाभ; केन-बेतवा प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड के 5 जिलों की प्यास बुझेगी

अरविन्द जैन/ अतुल्य भास्कर
छतरपुर। बुंदेलखंड की प्यासी धरती के लिए जीवनदायिनी बनने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और जिला प्रशासन की सक्रियता से इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने हाल ही में प्रभावित गांवों का दौरा कर स्पष्ट किया कि विस्थापन और मुआवजे की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे नए वर्ष में परियोजना का कार्य तीव्र गति से शुरू हो सकेगा।
मुआवजे का वितरण:
परियोजना से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के हितों का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से मुआवजे की राशि का वितरण किया है। अब तक लगभग 90% भुगतान पूर्ण हो चुका है:
निजी भूमि अधिग्रहण: 14 गांवों के किसानों को उनकी भूमि के बदले 267 करोड़ 68 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
आवास मुआवजा: परियोजना क्षेत्र में आने वाले मकानों के अधिग्रहण के एवज में 84 करोड़ 58 लाख रुपए वितरित किए गए।
पुनर्वास अनुदान: विस्थापित हो रहे 3,080 व्यक्तियों को बेहतर भविष्य और पुनर्वास के लिए लगभग 385 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी गई है।
बुंदेलखंड को मिलने वाले बड़े लाभ
केन-बेतवा लिंक परियोजना न केवल सिंचाई का रकबा बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक ढांचे को भी मजबूती देगी:
तीनों फसलों की खुशहाली: पर्याप्त पानी मिलने से किसान साल में तीन फसलें ले सकेंगे।
जल संकट का अंत: बुंदेलखंड के 4 से 5 जिलों में पेयजल और सिंचाई की समस्या का स्थाई समाधान होगा।
औद्योगिक विकास: पानी की उपलब्धता से क्षेत्र में नए उद्योगों के लिए रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
प्रशासन ने प्रभावित गांवों को शीघ्र खाली करने के निर्देश दिए हैं ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाला वर्ष बुंदेलखंड के किसानों और आम जनमानस के लिए खुशहाली की नई सौगात लेकर आएगा।
“यह परियोजना केवल पानी का माध्यम नहीं है, बल्कि यह छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड में रोजगार, नए उद्योगों और कृषि क्रांति का आधार बनेगी।” 

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— पार्थ जैसवाल, कलेक्टर (छतरपुर)

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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