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25 लाख कमाई, 6 राज्यों में डिमांड! महिला ने बेटियों के लिए सिर्फ 12,000 रुपये से शुरू किया ये बिजनेस

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Business Success Story: बेटियों को सॉस, पल्प, जैम पसंद था. इसलिए मां ने घर में बनाना शुरू किया. अब यह एक बिजनेस बन गया है और ये प्रोडक्ट्स 6 राज्यों में बेचे जा रहे हैं.

25 लाख कमाई, 6 राज्यों में डिमांड!महिला ने सिर्फ 12,000 से शुरू किया ये बिजनेस

सॉस, जैम बिजनेस की सफलता की कहानी

कोल्हापुर: घर में बेटियों को फलों के सॉस, जैम, पल्प पसंद थे, लेकिन बाजार में मिलने वाले ये उत्पाद केमिकल युक्त होते थे, इसलिए कोल्हापुर की हाउसवाइफ ने इन्हें घर पर ही बनाना शुरू किया. खास बात यह है कि बेटियों के लिए शुरू किए गए इन उत्पादों से फलों की प्रोसेसिंग का कारोबार शुरू हुआ और अब यह कोल्हापुर का एक प्रसिद्ध ब्रांड बन गया है. इस बिजनेस से कोल्हापुर की मीनल भोसले सालाना 20 से 25 लाख रुपये कमा रही हैं. इस बिजनेस के बारे में उन्होंने लोकल18 से बात करते हुए जानकारी दी.

बता दें कि फलों की प्रोसेसिंग के बारे में आज भी उतनी जागरूकता नहीं है, लेकिन मौसमी फलों की उपलब्धता के अनुसार घर पर ही फलों की प्रोसेसिंग की जाए तो अच्छे उत्पाद मिल सकते हैं. कोल्हापुर की मीनल भोसले पिछले कई सालों से फलों की प्रोसेसिंग के बिजनेस में अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. मौसमी फलों की प्रोसेसिंग कर वे खुद इन्हें बेचती हैं. साथ ही जो लोग प्रोसेसिंग कराना चाहते हैं, उनके लिए भी आम का पल्प, टमाटर सॉस, इमली सॉस आदि बनाती हैं. छोटे पैमाने पर शुरू किए गए इस व्यवसाय को अब बड़ा रूप मिल गया है.

कैसे हुई शुरुआत?
बता दें कि मीनल भोसले की शुरुआत दरअसल उनकी बेटियों की वजह से हुई. उनकी दोनों बेटियों को सॉस, जैम,  पल्प बहुत पसंद थे. इसलिए बेटियों को पसंद आने वाले ये उत्पाद घर पर ही बनाकर खिलाने के उद्देश्य से उन्होंने इन्हें बनाना शुरू किया. कोल्हापुर के आर के नगर इलाके में रहने वाले भोसले दंपत्ति ने ‘पियुष’ नाम से इस कारोबार की शुरुआत की. इसमें मीनल भोसले के पिता का बड़ा योगदान रहा.

कोल्हापुर में बढ़ा कारोबार
मीनल के पति प्रतापराव भोसले एसटी विभाग में थे, इसलिए वे पुणे में रहते थे. वहीं उन्हें इस प्रोसेसिंग उद्योग (Processing Industry)  के बारे में जानकारी मिली. इससे उन्हें फलों की प्रोसेसिंग का शौक हो गया. उन्होंने इसके लिए आवश्यक कोर्स भी किए. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे इस बिजनेस की शुरुआत की. शुरुआत में उन्होंने घर पर बेटियों और रिश्तेदारों को बनाए हुए उत्पाद खिलाए. ये उत्पाद उन्हें भी स्वादिष्ट लगे. इसके बाद वे कोल्हापुर आ गईं. कोल्हापुर में इस व्यवसाय का काफी विस्तार हुआ.

कोल्हापुर आने के बाद स्वयंसिद्धा संस्था का साथ मिला. इसका फायदा उन्हें लगातार मिला. बहुत कम पूंजी में और घर पर ही उनका यह व्यवसाय आज चल रहा है. उनके इस व्यवसाय की सराहना कोल्हापुर के विभिन्न उद्यमियों और सामाजिक संस्थाओं ने की और उन्हें पुरस्कारों से सम्मानित भी किया.

सीधे किसानों से कच्चा माल खरीदना
किसी भी व्यवसाय के लिए और अगर यह उद्योग खेती से जुड़ा हो तो कच्चे माल की उपलब्धता कैसे होगी, यह सवाल उठता है, लेकिन मीनल भोसले सीधे किसानों के खेतों से ही व्यवसाय के लिए आवश्यक फल खरीदती हैं. साथ ही कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से उन्हें कच्चा माल मिलता है. अब किसानों को इस उद्योग की जानकारी होने के कारण अधिकांश किसान उन्हें घर पर ही माल पहुंचाते हैं.

6 राज्यों से मांग
अधिकांश लोगों को लगता है कि फलों की प्रोसेसिंग का उद्योग बहुत पूंजी वाला होता है, लेकिन यह उद्योग बहुत कम पूंजी में भी किया जा सकता है, यह भोसले दंपत्ति ने साबित कर दिया है. अब तक भोसले दंपत्ति ने सालाना लगभग 20 से 25 लाख रुपये की कमाई की है. वर्तमान में ‘पियुष’ नाम से शुरू किए गए इस व्यवसाय को बड़ा रूप मिल गया है. लगभग 6 राज्यों में उनके बनाए उत्पादों की मांग है.

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लोकल 18 से बात करते हुए मीनल ने कहा कोल्हापुर जिले में सब्जियों और फलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन कभी-कभी फलों के दाम गिर जाते हैं तो फलों का क्या करें? यह सवाल किसानों के सामने खड़ा हो जाता है. उन्हें उत्पादन लागत भी सही से नहीं मिलती. ऐसे में फलों की प्रोसेसिंग का उद्योग जोड़ दिया जाए तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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