Home अजब गजब सिविल इंजीनियर से डेयरी उद्यमी बने डोपे पाडू की सफलता की कहानी

सिविल इंजीनियर से डेयरी उद्यमी बने डोपे पाडू की सफलता की कहानी

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Agency:भाषा

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Success Story- डोपे पाडू की कहानी बताती है कि अगर जुनून और साहस हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है. उन्होंने न सिर्फ खुद के लिए एक नई राह बनाई, बल्कि यह भी दिखाया कि सरकारी नौकरी ही सफलता की गारंटी न…और पढ़ें

भाई से पैसे उधार ले शुरू किया बिजनेस, अब हर महीने कमाते हैं 3 लाख रुपये

डोपे पाडू 120 रुपये प्रति लीटर दूध बेचते हैं.

हाइलाइट्स

  • डोपे पाडू ने सरकारी नौकरी छोड़कर डेयरी फार्म शुरू किया.
  • पाडू अब हर महीने 3 लाख रुपये कमाते हैं.
  • पाडू अरुणाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बने.

नई दिल्ली. क्या आपने कभी सोचा है कि एक सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक व्यक्ति, जिसने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी हो, वह कैसे लाखों में कमाने वाला डेयरी उद्यमी बन सकता है? अरुणाचल प्रदेश के डार्का गांव के रहने वाले डोपे पाडू की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने अपने साहसिक फैसले से न केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि अपने गांव और आसपास के इलाकों में भी मिसाल कायम की. आज, उनके उद्यम ‘गोयम डेयरी फार्म’ ने उन्हें अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले में घर-घर में चर्चित कर दिया है. वे अपने डेयरी फार्म से अब महीने में 3 लाख रुपये कमाते हैं.

32 वर्षीय पाडू कभी अरुणाचल प्रदेश पुलिस हाउसिंग एंड वेलफेयर कॉरपोरेशन में साइट इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. महज 12,000 रुपये प्रति माह की नौकरी में वे पूरे राज्य में दौड़-भाग करते थे, लेकिन अंत में जेब में बचते थे सिर्फ 1,000 रुपये. लगातार यात्राएं, खर्चों का बोझ और भविष्य की अनिश्चितता ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया. पाडू बताते हैं, “मुझे तिरप, चांगलांग, लोंगडिंग जैसी दूरदराज की जगहों पर जाना पड़ता था. विभाग यात्रा भत्ता भी नहीं देता था. महीने के अंत में हाथ में कुछ नहीं बचता था. जीवन में स्थिरता की कमी ने मुझे परेशान कर दिया था.”

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भाई से पैसे ले खोला डेयरी फार्म
जब नौकरी में कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो पाडू ने 2021 के दिसंबर में एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया. उन्होंने अपने बड़े भाई से वित्तीय मदद ली और ‘गोयम डेयरी फार्म’ की स्थापना की. शुरुआत में उन्होंने गायों की खरीद और शेड बनाने में निवेश किया. आज उनके पास जर्सी, एचसीएफ और साहीवाल जैसी उच्च नस्लों की 30 गायें हैं, जिन्हें हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से मंगवाया गया है. पाडू कहते हैं, “मैं गायों को विशेष डेयरी राशन और मवेशी चारा खिलाता हूं, जो असम के सिलापाथर, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया से मंगवाता हूं.”

‘आलो के दूधवाले’ की पहचान
पाडू ने अपने डेयरी फार्म के संचालन के लिए सात कर्मचारियों को रखा है, जिसमें एक डिलीवरी बॉय भी शामिल है. अब पाडू ‘आलो के दूधवाले’ के नाम से मशहूर हो चुके हैं. वे सुबह के समय आलो कस्बे में और दोपहर में रामकृष्ण मिशन स्कूल, काबू, सिपु पुई और डार्का गांवों में दूध पहुंचाते हैं. जब फार्म में अधिकतम उत्पादन होता है, तो प्रतिदिन 100 लीटर से अधिक दूध तैयार होता है. हालांकि, वर्तमान में कई गायों के बछड़े होने के कारण उत्पादन घटकर 60-70 लीटर प्रतिदिन रह गया है.

मासिक आय तीन लाख से अधिक
पाडू की मेहनत रंग लाई है. वे दूध के 120 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से हर महीने तीन लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं. मवेशियों के चारे पर एक लाख रुपये खर्च करने और कर्मचारियों को वेतन देने के बाद भी पाडू के पास हर महीने लगभग एक लाख रुपये की बचत होती है. पाडू सिर्फ दूध बेचने तक सीमित नहीं हैं. वे 1,000 रुपये प्रति किलो पनीर और 200 रुपये प्रति किलो दही भी बेचते हैं.

प्रतिस्पर्धा नहीं, मौके ही मौके
पाडू कहते हैं, “आलो में डेयरी व्यवसाय के लिए बहुत संभावनाएं हैं क्योंकि यहां कोई सीधी प्रतिस्पर्धा नहीं है. अधिकांश दूध की आपूर्ति गैर-स्थानीय लोग करते हैं, जो छोटे क्षेत्रों में दूध बेचते हैं.” अपनी आय को और बढ़ाने के लिए पाडू ने अपने खेत के पास तीन मछली तालाब भी बनाए हैं. वे बताते हैं, “मैं सभी प्रकार की मछलियां पालता हूं और उन्हें गाय के गोबर से खाद दी जाती है.” इससे न केवल उनकी आय में इजाफा हुआ है, बल्कि क्षेत्र में कृषि और पशुपालन के लिए एक नई राह भी खुली है.

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भाई से पैसे उधार ले शुरू किया बिजनेस, अब हर महीने कमाते हैं 3 लाख रुपये

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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