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मध्य प्रदेश का सांप घोटाला: 279 फर्जी नाम दिखाकर हड़प लिए 11 करोड़ रुपये, जांच टीम के खुलासे कर देंगे हैरान

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Image Source : FILE PHOTO
प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य प्रदेश में सांप घोटाला सामने आया है। यहां सांप काटने से होनी वाली मौत के लिए सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाता है। ऐसे में अधिकारियों ने कई फर्जी एंट्री कर मुआवजा हड़प लिया। जांच में सामने आया है कि अधिकारियों ने कुल 11 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। 2019 से 2022 के बीच हुए इस घोटाले के लिए 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घोटालेबाजों ने सरकार के उस नियम का फायदा उठाया जिसके तहत सांप के काटने सहित प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। 

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जबलपुर संभाग के संयुक्त निदेशक (बजट और लेखा विभाग) रोहित सिंह कौशल ने बताया कि अधिकारियों की मिलीभगत से सांप के काटने के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए खजाने से पैसे निकालने के लिए 279 फर्जी नामों का इस्तेमाल किया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच किए बिना ही राशि मंजूर कर दी गई। उन्होंने बताया कि सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी सचिन दहायत मुख्य साजिशकर्ता था, जिसने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर सरकार की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) में हेराफेरी की और पैसे निकाल लिए।

11.26 करोड़ का घोटाला

कौशल ने कहा “हमारी जांच के दौरान, यह पाया गया कि कागजों पर मृत घोषित किए गए लोग (सांप के काटने से) वास्तव में जीवित थे। साथ ही, मृतकों की सूची में कई फर्जी नाम थे।” केवलारी थाना प्रभारी एस एस राम टेककर ने बताया कि कुल 11. 26 करोड़ रुपये धोखाधड़ी से 46 खातों में ट्रांसफर किए गए, उन्होंने बताया कि 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया, “मुख्य आरोपी सचिन दहायत पहले से ही हिरासत में है और 25 और संदिग्धों को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।”

एक ही नाम से कई डेथ सर्टिफिकेट बनाए

कौशल ने कहा कि कुछ मामलों में, मुआवजे का दावा करने के लिए एक ही नाम से कई मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। संत कुमार बघेल को आधिकारिक तौर पर सांप के काटने से मृत घोषित किया गया था। रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी ‘मृत्यु’ पर कई लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। लेकिन उन्हें सिवनी जिले के मलारी गांव में जीवित पाया गया। उन्होंने कहा “मैंने सुना था कि केवलारी तहसील में ऐसा घोटाला हो रहा था। अब जब आप यहां आए हैं, तो मुझे पता चला है कि मुझे मृत घोषित कर दिया गया है और मेरे नाम पर पैसे निकाले गए हैं। लेकिन मेरे साथ कुछ नहीं हुआ है। सरकार को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी चीजें न हों।”

संत कुमार जीवित, लेकिन रिकॉर्ड में मृत

संत कुमार बघेल के परिवार के सदस्य भी यह जानकर हैरान रह गए कि किसी ने उनके नाम का इस्तेमाल करके मुआवजा मांगा है। संत कुमार के चाचा दुर्वेन सिंह बघेल ने कहा “हां, वह यहां रहता है। वह मेरा भतीजा है और उसकी मौत सांप के काटने से नहीं हुई। वह जीवित है, और उसकी वर्तमान उम्र 75 वर्ष है।” जांच में पाया गया कि बघेल तो जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है, लेकिन बिछुआ रैयत गांव की निवासी द्वारका बाई का कभी अस्तित्व ही नहीं था, फिर भी उनके नाम पर कई मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। एक अधिकारी ने बताया, “उनके नाम पर 28 बार 4 लाख रुपए निकाले गए।” बिछुआ रैयत गांव के निवासी केशुराम गजल (59) ने कहा, “नहीं, इस गांव में इस नाम की कोई महिला नहीं है। न ही इस महिला को सांप ने काटा हो, इसकी कोई रिपोर्ट है। अगर वह यहां नहीं रहती, तो हम उसके बारे में कैसे जान सकते थे?” 

चार साल से चल रहा घोटाला

इसी तरह, ‘श्री राम’ और ‘राम प्रसाद’ के नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सुकतारा गांव के निवासी ‘विष्णु प्रसाद’ की सांप के काटने से मौत हो गई थी और मुआवजा दिया गया था। स्थानीय ग्रामीणों ने ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में कभी नहीं सुना है। स्थानीय निवासी प्रीतम सिंह ने कहा, “नहीं, हमारे ग्राम पंचायत क्षेत्र में विष्णु प्रसाद नाम का कोई व्यक्ति सांप के काटने से नहीं मरा है।” उन्होंने कहा, “यह एक घोटाला है। हम पिछले चार वर्षों से मीडिया के माध्यम से जान रहे हैं कि हमारे केवलारी तहसील में एक बड़ा घोटाला हो रहा है।” (इनपुट- पीटीआई)



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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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