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बीमारी हारी, हौसला जीता: ऑक्सीजन सपोर्ट पर दी परीक्षा, 10वीं में माही ने हासिल किए 86%

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Success Story: मुंबई की माही देशवंडीकर ने गंभीर बीमारी और ऑक्सीजन सपोर्ट के बीच 10वीं की परीक्षा दी और 86% अंक हासिल किए. ‘होम स्कूलिंग’ के सहारे पढ़ाई की, मां-पिता और शिक्षकों के सहयोग से यह प्रेरणादायक सफलता …और पढ़ें

बीमारी हारी, हौसला जीता: ऑक्सीजन सपोर्ट पर दी परीक्षा, माही ने किय कमाल

माही देशवंडीकर

मुंबई के कल्याण की रहने वाली माही देशवंडीकर ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल रास्ते को रोक नहीं सकती. माही को सिस्टिक फाइब्रोसिस नाम की एक गंभीर बीमारी है, जिससे उसकी सांसें हमेशा लड़ती रहती हैं. इस हालत में भी उसने दसवीं की परीक्षा दी – वह भी ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे. नतीजा आया तो सब हैरान रह गए – माही ने 86 फीसदी अंक हासिल किए हैं.

8 साल की उम्र में हुआ गंभीर बीमारी का पता
माही को महज आठ साल की उम्र में पता चला कि वह सिस्टिक फाइब्रोसिस नाम की लाइलाज बीमारी से जूझ रही है. यह बीमारी फेफड़ों को कमजोर बना देती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है. इससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है. डॉक्टरों की सलाह पर माही ने दो साल से घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. वह ओक हाई स्कूल, कल्याण वेस्ट की छात्रा है.

‘होम स्कूलिंग’ से बदली पढ़ाई की दिशा
बीमारी की वजह से माही स्कूल नहीं जा सकी, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकी. उसने घर से ही पढ़ाई का फैसला लिया. मां शर्मिला देशवंडीकर ने उसकी सबसे बड़ी मदद की. वह स्कूल जाकर पढ़ाई करतीं, फिर घर लौटकर माही को समझातीं. टीचर भी वीडियो कॉल पर माही की पढ़ाई में मदद करते थे. माही हर दिन 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थी.

परीक्षा से पहले आया डर, लेकिन हौसला नहीं टूटा
दसवीं की परीक्षा से ठीक पहले माही की तबीयत काफी बिगड़ गई. उसे डर लगने लगा कि कहीं वो परीक्षा न दे पाए. लेकिन माही ने हिम्मत नहीं हारी. बीमारी से लड़ते हुए खुद को संभाला और परीक्षा में शामिल हुई. परीक्षा केंद्र तक पहुंचना आसान नहीं था – माही चल नहीं सकती थी, इसलिए उसके पिता ने उसे गोद में उठाकर सेंटर तक पहुँचाया और साथ में ऑक्सीजन सिलेंडर भी ले गए.

टीचर्स और परिवार ने दिया पूरा साथ
ओक हाई स्कूल के शिक्षक बालकृष्ण शिंदे ने कहा, “माही जिद्दी है लेकिन उतनी ही होशियार भी. हमने उसकी हर मुमकिन मदद की और उसकी मेहनत देखकर हम भी भावुक हो गए.” माही की मां ने कहा, “उसने कभी हार नहीं मानी, हर रोज खुद से लड़कर वो पढ़ाई करती रही.”

लोकल18 से बातचीत में माही ने क्या कहा?
लोकल18 से बात करते हुए माही ने कहा, “मैं कभी स्कूल नहीं जा सकी, लेकिन पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा. मम्मी-पापा और टीचर्स की मदद से मैंने ये कर दिखाया.” माही की यह कामयाबी सिर्फ नंबरों की नहीं, बल्कि जज़्बे और उम्मीद की जीत है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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