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न सजा, न शिकायत – सिर्फ कर्तव्य! जानिए नेवी चीफ दिनेश त्रिपाठी की प्रेरणादायक कहानी

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एडमिरल दिनेश त्रिपाठी भारतीय नौसेना के 26वें प्रमुख बने हैं. रीवा के सैनिक स्कूल के छात्र रहे त्रिपाठी ने 40 वर्षों की सेवा में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वे आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी के सहपाठी और दोस्त भी हैं. यह पहली बार है जब एक ही स्कूल से दो चार-सितारा सैन्य प्रमुख बने हैं.

कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन की कमान सभांल चुके हैं.

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 1 जुलाई 1985 को नौसेना की कार्यकारी शाखा में नियुक्त हुए. उन्होंने आईएनएस विनाश, किर्च और त्रिशूल की कमान संभाली है. इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और वाइस एडमिरल के रूप में कार्य किया.

चालीस वर्ष से नौ सेना में अधिकारी हैं.

वाइस एडमिरल डीके त्रिपाठी ने आर हरि कुमार के सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद 26वें नौसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार पर हैं. उनका जन्म 15 मई 1964 को हुआ था और वे एक जुलाई 1985 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. त्रिपाठी ने 40 साल की अवधि में कई महत्वपूर्ण असाइनमेंट्स किए हैं.

रीवा सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र हैं त्रिपाठी.

कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉर एक्सपर्ट एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी 26वें नौसेना प्रमुख हैं. सतना जिले के रामपुर बघेलान स्थित महुडर गांव में जन्मे एडमिरल दिनेश त्रिपाठी मध्य प्रदेश के सैनिक स्कूल-रीवा और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला के पूर्व छात्र हैं.

इस लिए भी है रीवा से लगाव.

एडमिरल त्रिपाठी थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के क्लासमेट हैं. वास्तव में, वे सैनिक स्कूल-रीवा में एक ही बेंच पर पढ़ते थे और अच्छे दोस्त थे. नौसेना प्रमुख ने लगभग एक सप्ताह पहले अपने गांव और अल्मा मेटर का दौरा किया था. एडमिरल त्रिपाठी के स्कूल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह नियमों का पालन करने वाले थे. उनके नाम पर कोई सजा पत्र नहीं था और उन्होंने परीक्षाओं में हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया.

मां से है काफी लगाव.

नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालने से पहले एडमिरल त्रिपाठी ने अपनी मां रजनी त्रिपाठी से आशीर्वाद लिया था जो काफी चर्चा का विषय भी बना हुआ था और वो फोटो सोशल मीडिया में वायरल भी था.

अपने बेहतर नेतृत्व के लिए खास पहचान रखते हैं.

उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला के कमांडेंट के रूप में भी कार्य किया. उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और नौ सेना पदक (एनएम) भी मिला हुआ है. सैनिक स्कूल, रीवा ने भारतीय सेना को 700 से अधिक अधिकारी दिए हैं, जिनमें तीनों सेवाओं में कम से कम 21 सामान्य रैंक के अधिकारी शामिल हैं.

अलग-अलग पदों में संभाली जिम्मेदारी.

उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण परिचालन और स्टाफ नियुक्तियों पर भी काम किया है। इसमें वेस्टर्न कमांड के संचालन अधिकारी, नौसेना संचालन निदेशक, प्रमुख निदेशक-नेटवर्क फोकस्ड संचालन और प्रमुख निदेशक, नौसेना योजना शामिल हैं. रियर एडमिरल के रूप में, उन्होंने पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया.

विंध्य के लाल हैं दिनेश त्रिपाठी.

रीवा सैनिक स्कूल ने 700 से अधिक सैन्य अधिकारी तैयार किए हैं, जिनमें कम से कम 25 जनरल रैंक के हैं, जिनमें से दो अब चार सितारा सेवा प्रमुख हैं. सैनिक स्कूल रीवा के सीनियर मास्टर डॉ. आरएस पांडे कहते हैं कि हमारे लिए, हमारे सैनिक स्कूल रीवा और हमारे राज्य के लिए बहुत गर्व की बात है. यह पहली बार है कि सशस्त्र बलों के दो विंग के प्रमुख सहपाठी और स्कूल के साथी हैं और विंध्य क्षेत्र से हैं.

सरल और सहज स्वभाव के है नौ सेना प्रमुख.

नेवी चीफ दिनेश कुमार त्रिपाठी और आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी दोनों एक ही स्कूल से पढ़े हुए हैं. स्कूल के दिनों से ही दोनों के बीच दोस्ती भी पक्की है. जनरल द्विवेदी और एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी साल 1973 से 1981 तक मध्यप्रदेश के सैनिक स्कूल रीवा में छात्र थे. दिनेश त्रिपाठी बहुत ही सरल सहज स्वभाव के हैं. अपनी जिम्मेदारियों के प्रति काफी गंभीर हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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