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देश की सबसे फेमस ट्रैक्टर कंपनी का पाकिस्तान कनेक्शन, बेहद रोमांचक है कहानी

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नई दिल्ली. 1947 का साल था, बंटवारे का दर्द हर तरफ फैला हुआ था. उसी आग में झुलसती एक फैमिली नंदा ब्रदर्स की थी जो लाहौर से दिल्ली आई. 1944 में लाहौर में बनी कंपनी ‘एस्कॉर्ट्स एजेंट्स लिमिटेड’ को उठाकर दिल्ली लाना सिर्फ एक शिफ्ट नहीं था, ये दर्द में डूबी हिम्मत की शुरुआत थी. ना फैक्ट्री, ना मशीनें, ना पैसा, सिर्फ हौसला और हौसले से बड़ी कोई मशीन नहीं होती. दिल्ली में फिर से सबकुछ जीरो से शुरू किया गया और 1960 में फरीदाबाद में फैक्ट्री लगी. 1961 में जब पोलैंड की उर्सस के साथ पहला ट्रैक्टर बना, तो वो एक मशीन नहीं, उस संघर्ष की पहली जीत थी.

1969 में अमेरिका की फोर्ड मोटर्स के साथ पार्टनरशिप ने एस्कॉर्ट्स को इंटरनेशनल बना दिया. 1971 में जब फोर्ड 3000 ट्रैक्टर इंडिया में लॉन्च हुआ, तो वो हर खेत का हीरो बन गया. इसके बाद Farmtrac और Powertrac जैसे नाम किसानों की जुबान पर चढ़ गए. 1983 में यामाहा के साथ बाइक भी बनी राजदूत और RX100 जैसे आइकॉनिक मॉडल. लेकिन फिर 2001 में कंपनी ने फोकस बदला और सिर्फ ट्रैक्टर और कंपोनेंट्स पर ध्यान दिया. पोलैंड में प्लांट लिया, और 2019 से इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का कमाल अमेरिका और यूरोप में दिखा दिया. 2020 में जब जापान की Kubota ने ₹9,370 करोड़ लगा दिए और 53.5% हिस्सेदारी ले ली, तब ये सिर्फ कंपनी नहीं रही, ये किसानों की क्रांति बन गई.

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अब ये सिर्फ एक कंपनी नहीं, कमाई का महारथी है

2024-25 की पहली छमाही में ₹10,244 करोड़ का राजस्व, ₹1,265 करोड़ का मुनाफा, और ₹38,000 करोड़ से ज्यादा की मार्केट वैल्यू, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, ये मेहनत की स्याही से लिखी गई कहानी है. ट्रैक्टर बिक्री से 80% कमाई होती है, और यूपी में ₹4,500 करोड़ का नया प्लांट कंपनी को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है. स्टीलट्रैक से लेकर Farmtrac 26E तक, हर मॉडल अब किसानों की जरूरतों से सीधा जुड़ता है.

अब एस्कॉर्ट्स खेतों तक सीमित नहीं

चार प्लांट इंडिया में और एक पोलैंड में, हर साल 3 लाख ट्रैक्टर और 50 लाख ऑटो पार्ट्स बनते हैं. कंस्ट्रक्शन मशीनरी, रेलवे ब्रेक सिस्टम से लेकर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तक, एस्कॉर्ट्स कुबोटा अब हर उस सेक्टर में है जहां मशीनें चलती हैं. EKFL नाम की फाइनेंस विंग किसानों को आसान कर्ज देती है. 2028 तक ₹22,500 करोड़ कमाने और देश का दूसरा सबसे बड़ा प्लेयर बनने का टारगेट सामने है.ट

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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