खजुराहो। देश-विदेश में ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध खजुराहो डांस फेस्टिवल 2026 इस बार भ्रष्टाचार सहित अव्यवस्थाओं के विवादों के बीच संपन्न हुआ,लेकिन इस आयोजन में एक और लापरवाही सामने आई है। समारोह को खत्म हुए करीब 10 दिन का समय हो चुका है, लेकिन इसमें आमंत्रित कई शिल्पकारों और कारीगरों को अब तक उनका मानदेय नहीं मिल पाया,ये नाराज कलाकार अब विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं,कुछ ने बताया कि मोबाइल लगाने पर उनसे अभद्रता की भाषा बोली जाती है।
जानकारी के मुताबिक 20 से 26 फरवरी तक आयोजित इस समारोह में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगरों ने हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई थी साथ ही कलाकृति बनाई भी थी इन शिल्पकारों प्रतिवर्ष की तरह इस आयोजन के दौरान 15-15 हजार रुपए मानदेय देने का आश्वासन दिया गया था,लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
करीब 20 से अधिक शिल्पकारों का भुगतान अभी भी लंबित बताया जा रहा है। इनमें कई छोटे कारीगर शामिल हैं, जो ऐसे आयोजनों से मिलने वाले मानदेय पर ही अपने खर्च की भरपाई कर पाते हैं। शिल्पकारों का कहना है कि वे अपने खर्च पर दूर-दराज जिलों से खजुराहो पहुंचे थे और उम्मीद थी कि कार्यक्रम के तुरंत बाद भुगतान मिल जाएगा।
शिल्पकार महबूब आलम और पलक दिनकर सहित अन्य कारीगरों ने बताया कि हर साल समारोह खत्म होते ही विभाग की ओर से चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया जाता था, लेकिन इस बार अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है,मजबूरी में कलाकारों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
खास बात यह भी है कि इस बार खजुराहो डांस फेस्टिवल को लेकर पहले भी कई अव्यवस्थाओं की खबरें सामने आई थीं—कहीं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे, तो कहीं कार्यक्रमों के प्रबंधन को लेकर चर्चा रही। अब कलाकारों का मानदेय अटकना भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।वहीं इस मामले पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और संबंधित अधिकारियों से बात कर जल्द भुगतान कराने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं म.प्र. संस्कृति परिषद आदिवर्त संग्रहालय के प्रभारी अधिकारी अशोक मिश्र तथा लेखाधिकारी शेषमणि मिश्रा को जानकारी लेने मोबाइल लगाया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। फिलहाल सवाल यही है कि देश-विदेश में नाम कमाने वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन में कलाकारों और शिल्पकारों को उनका हक कब मिलेगा, या फिर उन्हें यूं ही दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।









