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‘रानी बेगम’ का अंत, ‘शीला यादव’ का उदय: 30 साल बाद पूर्व पार्षद ने त्यागा इस्लाम, संतों की मौजूदगी में ली सनातनी दीक्षा

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छतरपुर | छतरपुर के वार्ड नंबर 11 की पूर्व पार्षद रानी बेगम अब इतिहास बन गई हैं। उनकी जगह अब शीला यादव की पहचान फिर से जीवित हो उठी है। 30 साल पहले जिस रास्ते पर कदम मुड़े थे, तीन दशक बाद आत्मज्ञान और श्रद्धा की डोर उन्हें वापस उनकी जड़ों तक ले आई। शहर की अनगढ़ टौरिया पर संतों के सानिध्य और हनुमान जी की साक्षी में विधि-विधान और शुद्धिकरण के साथ शीला यादव ने सनातन धर्म में घर वापसी की।
1995 का निकाह और 2018 का तलाक: एक लंबा संघर्ष
ग्राम कुर्रा (ईशानगर) की निवासी और चिंटोले यादव की पुत्री शीला ने बताया कि वर्ष 1995 में साबिर काजी के साथ निकाह के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाया था। करीब 21 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद जब उन्हें महसूस हुआ कि वे अपनी मूल संस्कृति और परंपराओं को नहीं भूल पा रही हैं, तो उन्होंने 2018 में तलाक ले लिया। तभी से उनके मन में ‘घर वापसी’ की तड़प थी, जिसे आज संतों के आशीर्वाद ने पूर्ण कर दिया।
बागेश्वर सरकार की प्रेरणा और ‘हिंदू राष्ट्र’ का संकल्प
शीला यादव ने अपनी इस वैचारिक और धार्मिक क्रांति का श्रेय बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को दिया। उन्होंने कहा कि महाराज जी द्वारा चलाए जा रहे घर वापसी अभियान ने उन्हें अपनी पहचान के लिए लड़ने की शक्ति दी। शीला के अनुसार, “सनातन धर्म ही मेरी आत्मा है और यहीं मुझे शांति मिली है।”
दस्तावेजों की लड़ाई: कलेक्टर कार्यालय के काट रहीं चक्कर
अपनी पहचान को कानूनी रूप देने के लिए शीला यादव पिछले एक साल से संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने समाचार पत्रों में इश्तिहार प्रकाशित कराए और आधार कार्ड अपडेट के प्रयास किए, लेकिन प्रशासन की सुस्ती उनके आड़े आ रही है। कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद शासकीय दस्तावेजों में अभी भी पुराना नाम दर्ज है।
साधु-संतों ने भरी हुंकार: “शीला को मिले उसका संवैधानिक हक”
इस मौके पर मौजूद महंत भगवानदास श्रंगारी महाराज और महंत महावीर दास जी महाराज सहित सनातन धर्म सेवा समिति ने प्रशासन से कड़ी मांग की है। संतों ने कहा कि शीला यादव के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए उनके दस्तावेजों में नाम और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए।
इस ऐतिहासिक घर वापसी के साक्षी पं. सौरभ तिवारी, मुन्ना तिवारी (शिवसेना), राजेन्द्र अग्रवाल, विजय व्यास, आनंद चौबे, राजकुमार अवस्थी, और शहर के दर्जनों विद्वान ब्राह्मण व पुजारी रहे।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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