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श्रावण माह के दूसरे सोमवार पर देशभर से बड़ी संख्या में महाकाल के भक्त उज्जैन पहुंचे हैं। पहले सोमवार को 2.5 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए थे। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों के यहां पहुंचने की उम्मीद है। शाम चार बजे बाबा की सवारी भी निका
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मंदिर और सवारी की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 2700 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 1300 पुलिसकर्मियों के साथ 1200 कर्मचारी और 200 अधिकारी व्यवस्था संभालेंगे।
सीएम डॉ. मोहन यादव भी भगवान महाकाल की सवारी में शामिल होंगे। वे सुबह उज्जैन आएंगे। स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद दोपहर में महाकाल मंदिर के सभा मंडपम में भगवान का पूजन-अर्चन करेंगे।
श्रावण माह के दूसरे सोमवार पर विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के बाद तड़के 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। अब रात 10 बजे शयन आरती तक दर्शन का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

उज्जैन में सावन के पहले सोमवार को 2.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे।
बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक सभा मंडप में वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन कर भगवान से आज्ञा लेकर चांदी का पट खोला गया। कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान, ध्यान, पूजन किया गया।
जल से भगवान महाकाल का अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। भगवान महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट, आभूषण, भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार कर भस्म अर्पित की गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ सुगंधित फूलों की माला भगवान महाकाल ने धारण की। फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।
भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था में बिना अनुमति वाले भक्तों ने भी चलित दर्शन किए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई थी।
जल अर्पित कर महाकाल का आशीर्वाद ले सकेंगे भक्त महेश पुजारी ने बताया कि श्रावण तपस्या का माह होता है। मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्त जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रसन्न करते हैं।
महाकाल मंदिर समिति ने ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने के लिए दो पात्र लगाए हैं। पहला कार्तिकेय मंडपम के पास और दूसरा सभा मंडपम में। इन पात्रों में भक्त जल अर्पित कर सकेंगे। यहां से चढ़ाया गया जल सीधे बाबा महाकाल को अर्पित होगा।

कांवड़ यात्रियों की अलग दर्शन व्यवस्था महाकाल मंदिर में आने वाले कांवड़ यात्रियों द्वारा पूर्व सूचना दिए जाने पर शनिवार, रविवार और सोमवार को छोड़कर द्वार क्रमांक 04 से प्रवेश दिया जाएगा।
इसके बाद विश्रामधाम, रैम्प होते हुए सभा मंडपम् में जल पात्र के माध्यम से बाबा महाकाल को जल अर्पण करने की व्यवस्था की गई है। जिन्होंने सूचना नहीं दी है, वे कांवड़ यात्री सामान्य दर्शनार्थियों की तरह लाइन में लगकर दर्शन करेंगे।
महाकाल मंदिर में अलग-अलग द्वारों से आने वाले श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल त्रिवेणी संग्रहालय, महाकाल लोक प्लाजा, बड़ा गणेश के पास, हरसिद्धि मंदिर के पास, मानसरोवर भवन के पास और प्रशासनिक भवन के पास उतार सकेंगे।

शाम चार बजे निकलेगी महाकाल की सवारी शम 4 बजे भगवान श्री महाकालेश्वर, श्री चंद्रमौलेश्वर के रूप में पालकी में और हाथी पर श्री मनमहेश के रूप में विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि सवारी निकलने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधिवत पूजन-अर्चन होगा। उसके बाद भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर, रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा सलामी दी जाएगी।
सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। यहां मां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ समाज की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई शाम करीब 7 बजे दोबारा श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
सवारी के लाइव दर्शन कर सकेंगे श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी का लाइव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पेज पर किया जाएगा। सवारी के अंत में चलित रथ में लगी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सवारी मार्ग में दर्शन के लिए खड़े श्रद्धालुओं के लिए लाइव दर्शन की व्यवस्था भी की गई है।

7 राज्यों के कलाकार देंगे प्रस्तुति दूसरी सवारी में 7 राज्यों के 8 जनजातीय कलाकारों का दल सहभागिता करेगा। इसमें मध्यप्रदेश (झाबुआ) का भगोरिया नृत्य, महाराष्ट्र (नासिक) का सौगी मुखौटा नृत्य, गुजरात का राठ जनजातीय नृत्य, राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य शामिल है।
इनके अलावा ओडिशा का शंखध्वनि लोकनृत्य दल, छत्तीसगढ़ का लोकपंथी लोकनृत्य दल रामघाट पर सवारी पहुंचने के बाद प्रस्तुति देंगे। वहीं, हरियाणा का हरियाणवी घूमर लोकनृत्य, मध्यप्रदेश (छतरपुर) का बरेदी लोकनृत्य दल क्षिप्रा तट के दूसरी ओर दत्त अखाड़ा क्षेत्र में सवारी के रामघाट पहुंचने पर प्रस्तुति देंगे।
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