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उद्योगपतियों के साथ चर्चा करते मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (फाइल फोटो)
मध्यप्रदेश सरकार अब रियल एस्टेट सेक्टर को शहरी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने जा रही है। इसके लिए 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम की थीम है- “नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिट
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कॉन्क्लेव का मकसद शहरी इलाकों में निवेश बढ़ाना और भविष्य के शहरों की रूपरेखा तय करना है। आयोजन से पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन रियल एस्टेट कारोबारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं।
सरकार नए मॉडल पर काम कर रही
प्रदेश में शहरों का तेजी से विस्तार हो रहा है, खासकर इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में।यहां सस्ती जमीन, कुशल श्रमिक और निवेश के अनुकूल नीतियां मौजूद हैं।प्रधानमंत्री गति-शक्ति, स्मार्ट सिटी और अमृत 2.0 जैसी योजनाएं इस विकास को और तेज़ कर रही हैं।
प्रदेश की लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी बेहतर है, जिससे यहां नया शहरी इकोसिस्टम तैयार करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
इन क्षेत्रों में होगा निवेश पर फोकस
कॉन्क्लेव में शहरी विकास से जुड़े इन अहम सेक्टरों पर फोकस रहेगा।
- मेट्रो, ई-बस और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट
- किफायती आवास और झुग्गी बस्तियों का पुनर्विकास
- कचरा और सीवेज प्रबंधन
- जल आपूर्ति और झील संरक्षण
- ई-गवर्नेंस और डिजिटल सुविधाएं
- हरित भवन और अक्षय ऊर्जा
प्रमुख परियोजनाएं जो कॉन्क्लेव में रहेंगी चर्चा में।
- भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट
- स्मार्ट सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर्स
- इंडस्ट्रियल टाउनशिप और न्यू टाउन प्लान
- आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट्स और स्ट्रीट वेंडिंग ज़ोन
- शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की योजना
सरकार को भरोसा है कि इस कॉन्क्लेव से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और शहरी विकास में निजी कंपनियां भी सक्रिय भागीदार बनेंगी।सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को बढ़ावा दे रही है और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से करार की तैयारी चल रही है।
सरकार का मानना है कि यह कॉन्क्लेव सिर्फ सड़कों और भवनों की बात नहीं करेगा, बल्कि डिजिटल, सामाजिक और आर्थिक विकास को भी आगे बढ़ाएगा।
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