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Hospital for what happened to my daughter | रीवा मेडिकल कॉलेज गैंगरेप केस में नया मोड़: पुलिस बोली- नाबालिग से नहीं हुआ दुष्कर्म, सीसीटीवी में उस समय सड़क पर घूमती दिखी – Madhya Pradesh News

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रीवा के संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में 8–9 जून की दरमियानी रात नाबालिग से गैंगरेप होने की बात सामने आई थी। घटना के करीब 40 घंटे बाद अस्पताल अधीक्षक ने इस बात की पुष्टि भी की थी। अब अस्पताल प्रशासन अपने बयान से पलट गया है। वहीं पुलिस ने भी दावा किया

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इस घटना के बाद से रीवा पुलिस और अस्पताल प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाए थे कि पुलिस और अस्पताल मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि लड़की जिस समय रेप होना बता रही है उस समय वह सड़क पर घूमती नजर आ रही है। पुलिस के पास इसका सीसीटीवी फुटेज भी है।

आखिर क्या हुआ था उस रात, क्या वाकई नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की वारदात हुई या वो सरासर झूठ बोल रही है, क्या पुलिस ने इस मामले को दबाने की कोशिश की, सीसीटीवी फुटेज की सच्चाई क्या है जिसमें लड़की सड़क पर घूमती दिख रही है…

पढ़िए इस रिपोर्ट में-

मां के इलाज के साथ शुरू हुआ पूरा मामला

पीड़िता ने बताया कि 19 मई को मां ईएनटी वार्ड में नाक का इलाज कराने भर्ती हुई थी। शुरुआती 2 दिन वो मां की अटेंडर बनकर अस्पताल में रुकी। 5 जून को दोबार मां की अटेंडर बनकर आई। पहली बार अस्पताल के वार्ड बॉय महेंद्र तिवारी और मनीष ने उसके फोन पर मैसेज किया। उन्होंने अपने आप को लड़की बताया और लगातार मैसेज किए। 7 जून को मां की नाक का ऑपरेशन हुआ।

8 जून को अस्पताल से डिस्चार्ज होना था, लेकिन कागजी कार्यवाही के लिए एक दिन और रोका गया।

(नोट– वार्ड बाॅय को पता चल गया था कि लड़की आज घर चली जाएगी इसलिए 8 बजे शिफ्ट पूरी होने के बाद भी रात 11 बजे वापस हॉस्पिटल आया)

मां ने बताया- एमएलसी की, लेकिन पुलिस को नहीं बताया

पीड़िता की मां ने बताया कि 9 जून की रात 2:35 बजे मेडिसिन वार्ड में एमएलसी होती है। एक ड्रिप और ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। 50 मिनट रखने के बाद वहां मौजूद डॉक्टर कहते हैं कि यह स्त्री रोग विभाग का मामला है, वहां ले जाइए, लेकिन पुलिस को जानकारी अब भी नहीं दी जाती।

रात 3:25 बजे बेटी को स्त्री रोग वार्ड के लेबर रूम में ले जाया जाता है। यहां बताया जाता है कि आपकी बेटी के साथ गलत हुआ है। हम आगे का इलाज पुलिस केस के बाद ही कर पाएंगे, लेकिन डराया भी जाता है कि आपकी लड़की के साथ जो हुआ वो सामने आएगा तो बेटी और परिवार समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचेगा।

इसके बाद लड़की की मां और 12वी में पढ़ने वाला भाई किसी भी तरह के केस करने से मना कर देते हैं।

मां से लिखवाया जाता है कि बेटी के साथ हुई हरकत के लिए किसी भी प्रकार की पुलिस कार्यवाही नहीं चाहती हूं। यह फैसला मैं अपनी मर्जी से ले रही हूं। मुझ पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं बनाया गया। भविष्य में होने वाली किसी भी जिम्मेदारी के लिए मैं स्वयं जिम्मेदार रहूंगी। अस्पताल प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

अगली सुबह अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया

9 जून की सुबह 9 बजे 5 घंटे लेबर रूम में रखने के बाद पीड़िता को उसकी मां से लेटर लिखवाकर डिस्चार्ज कर दिया जाता है। सुबह 10:15 बजे– मां अपनी बेटी को ईएनटी वार्ड में ले आती है। यहां पीड़िता नहाती है। मां उसे चाय– नाश्ता कराती है और वहीं वार्ड में सो जाती है। पीड़िता का भाई अपनी मां के ऑपरेशन के सिलसिले में बची कागजी कार्यवाही करता हैं।

सुबह 11:35 बजे मां का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि आपकी बेटी के साथ गलत हुआ है और आपको पुलिस को बताना चाहिए, लेकिन मां ने कहा कि हमें कुछ नहीं करना है। आप हमें अस्पताल से छुट्‌टी दे दीजिए। करीब 3 बजे अस्पताल में रहने के बाद पीड़िता, उसकी मां और भाई मामा के घर चले गए।

आरोपी पूरी रात अस्पताल में घूूम रहा था

ईएनटी वार्ड में जब पीड़िता सो रही थी तो आरोपी महेंद्र तिवारी पूरी रात अस्पताल में ही था। पीड़िता की मां को अम्मा कह कर पुकार रहा था, लेकिन तभी वहां मौजूद गार्ड ने उसे वहां से भगा दिया। डॉक्टर सुरेंद्र सिंह ने भी कहा था कि उन्हाेंने दोनों वार्ड बॉय को निकाल दिया है, लेकिन सुरेंद्र सिंह ने पुलिस को नहीं बताया था। पीड़िता ने बताया कि इस बीच महेंद्र तिवारी ने विकास के साथ मिलकर पैसा देने की बात भी कही। विकास ने पीड़िता के परिजनों से कहा कि कुछ ले देकर मामला रफा- दफा कर देते हैं। पीड़िता ने जिन चार लोगों पर रेप के आरोप लगाए हैं उनमें विकास भी है। उसके अलावा महेंद्र तिवारी, मनीष और हर्ष के नाम हैं।

भाई का आरोप- अगले दिन पुलिस रात भर घुमाती रही

पीड़िता के भाई ने बताया कि 10 जून को पुलिस ने हमें गोविंदगढ़ रेस्ट हाऊस में बुलाया। हम करीब शाम 7 बजे वहां पहुंचे। 2 घंटे वहां रखने के बाद पुलिस हमें अमइया थाना ले जा रही थी। तभी एसपी सर का फोन आया तो बीच रास्ते से वापस गाड़ी मोड़ ली। फिर गाेविंदगढ़ थाना गए। वहां 12 बजे तक पूछताछ चली। पूछताछ के बाद पुलिस से घर छोड़ने की बात कही।

हमने पुलिस को ये भी बताया कि मां का दो दिन पहले ऑपरेशन हुआ है। उन्हें दवा लेनी बहुत जरूरी है, जो घर पर है। उन्होंने खाना भी नहीं खाया है। इसके बाद भी पुलिस हमें एक जगह से दूसरी जगह घुमाती रही और कहा कि आज रात आपको वन स्टॉप सेंटर ही रुकना होगा।

मुझे और मेरे मामा को घर भेज दिया। कहा- सुबह आ जाना। मां और बहन को पूरी रात खाना नहीं दिया। अगले दिन सुबह वन स्टॉप सेंटर पहुंचे तो मिलने तक नहीं दिया। दोपहर 2 बजे दाेनों को बाहर आने दिया। वहां से बिछिया जिला अस्पताल ले गए। वहां मेडिकल कराया। मेडिकल के बाद कोर्ट ले गए। लेकिन बयान होने से पहले तक किसी से मिलने नहीं दिया।

(भास्कर को वो सीसीटीवी फुटेज जिसमें लड़की उस समय घूमती नजर आ रही है पुलिस ने देने से इनकार कर दिया।)

इस घटना को गैंगरेप कहना गलत– अस्पताल अधीक्षक

संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने दो अलग मौकों पर दो बयान दिए। उन्होंने शुरुआत में कहा था कि दो वार्ड बॉय द्वारा दुष्कर्म की सूचना पर पीड़िता को भर्ती किया गया था। रिकॉर्ड में भी यही दर्ज है, लेकिन अब जब हमने उनसे बात की तो बोले इस घटना को गैंगरेप कहना बिल्कुल गलत है।

भास्कर के सवाल और अधीक्षक के जवाब…

भास्कर– पुलिस को सबसे पहले सूचना किसने दी? सूचना देने में देरी हुई?

अधीक्षक– पुलिस को सबसे पहले सूचना हमने दी। जैसे ही हमें आशंका हुई तो हमने सबसे पहले पुलिस को बताया।

(पुलिस ने बताया कि हमें जानकारी मीडिया से मिली, अस्पताल ने 36 घंटे बाद सूचना दी।)

भास्कर– आपने कहा था कि लड़की के साथ दो लोगों ने यौन शोषण किया?

अधीक्षक– मैंने मीडिया के सामने कहा था कि एक लड़की इस आशंका के साथ अस्पताल में भर्ती हुई है। हो सकता है, उसके साथ रेप हुआ हो। मैंने रेप की पुष्टि नहीं की।

रेप की आशंका की जांच हमारे सीनियर डॉक्टर्स ने की। जांच में पता चला कि रेप जैसी कोई घटना लड़की के साथ नहीं हुई है। दो और जांचे हमारे अस्पताल के बाहर करवाई गई। एक कलेक्टर मैडम ने और दूसरी जिला अस्पताल में पैनल बनाकर की गई। किसी में भी रेप की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

भास्कर– पीड़िता को अस्पताल से बिना पुलिस को बताए डिस्चार्ज कैसे कर दिया?

अधीक्षक– हमने उनसे भर्ती रहने की गुजारिश की, लेकिन वो नहीं रूकीं। हमने डिस्चार्ज करने से मना कर दिया था, लेकिन लड़की बिना बताए चली गई।

(पीड़िता ने भास्कर को बताया था कि अस्पताल ने छुट्‌टी देते वक्त लेटर लिखवाया था कि हम अपनी मर्जी से जा रहे हैं।)

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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