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Tribal areas have become strongholds of illicit liquor | आदिवासी क्षेत्रों में महुए के अलावा दूसरी शराब बंद हो: विधायक विक्रांत भूरिया बोले- वेस्टर्न एमपी में शराब सिंडिकेट, एमपी से गुजरात हो रही सप्लाई – Bhopal News

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डॉ विक्रांत भूरिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस

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मप्र में अवैध शराब को लेकर राजनीति तेज हो गई है। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ.विक्रांत भूरिया ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों को शराब का गढ़ बना दिया गया है। पूर

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आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ विक्रांत भूरिया ने कहा-

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सरकार धार्मिक स्थलों पर शराब बंदी की बात करती है, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों को शराब का अड्‌डा बना दिया गया है। हमारी मांग है मप्र में शराब बंदी लागू की जाए।

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महुआ की दारू छोड़कर सभी प्रकार की शराब बंद हो कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा- आदिवासी समाज अपने पूजा-पाठ में महुआ की शराब का उपयोग करता है। इसलिए आदिवासी क्षेत्रों में महुआ की शराब को छोड़कर हर तरह की शराब पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।

आदिवासी क्षेत्रों में दहेज, दारु और डीजे के खिलाफ चल रहा अभियान विक्रांत ने कहा- आदिवासी क्षेत्रों में में D3 मुहिम चल रही है जिसका मतलब है- दहेज, दारू और डीजे। इनके खिलाफ यह अभियान चल रहा है। इस D3 अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अब आदिवासी समाज के युवा खुद शराब से मुक्ति पाने मुहिम चला रहे हैं।

वाहन चालक पर कार्रवाई होती है मालिक और ठेकेदार पर नहीं भूरिया ने कहा- धार कलेक्टर का लेटर है जिसमें उन्होंने खुद ये बात लिखी कि नकली होलोग्राम से शराब का कारोबार हो रहा है। जब अवैध शराब पकड़ी जाती है तो परिवहन करने वाले वाहन के ड्राइवर पर कार्रवाई होती है, लेकिन ठेकेदारों और उस शराब के असली मालिक पर एक्शन नहीं होता।

गरीब आदिवासी जिले में 400 करोड़ का ठेका कैसे हो रहा विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा- झाबुआ-अलीराजपुर में शराब का ठेका 400 करोड़ का है। एक गरीब आदिवासी जिले में इतना महंगा ठेका कैसे हो रहा है? अगर इतना महंगा ठेका हो रहा है तो हर आदमी क्या एक लाख की शराब पी रहा है? मध्यप्रदेश में हालत लगातार बिगड़ रहे हैं, गरीब पिस रहा है।

शराब की खेप गुजरात तक जा रही है जो ड्राय स्टेट है। यानि गुजरात में शराब बंदी लागू है लेकिन, शराब की अवैध सप्लाई मप्र से जा रही है। सरकार आदिवासियों का शोषण करने वालों का साथ दे रही है। जोबट में एक करोड़ की शराब पकड़ी गई थी, लेकिन उसके असली मालिकों तक पुलिस और आबकारी विभाग नहीं पहुंच पाया।

सबसे बड़ा शराब का सिंडिकेट हमारे वेस्टर्न एमपी में काम कर रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है हमारे झाबुआ अलीराजपुर में शराब का ठेका 400 करोड़ रुपए का है। जो जिले गरीबी रेखा की सूची में सबसे नीचे देखा जाता है। जो इतना गरीब जिला है वहां इतनी शराब की बिक्री दिखा रहे हैं। उतने में तो हर व्यक्ति एक-एक लाख की शराब पी जाए। इस बडे़ सिंडिकेट का हिस्सा खुद सरकार है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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